Business News : दो प्रतिशत डीए वृद्धि से कर्मचारी संगठन नाखुश

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Business News : सरकार की दो प्रतिशत डीए वृद्धि से कर्मचारी संगठन नाखुश
Business News : सरकार की दो प्रतिशत डीए वृद्धि से कर्मचारी संगठन नाखुश

कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर लगाया जानबूझकर देरी से घोषणा करने का आरोप

Business News (आज समाज), बिजनेस डेस्क : शनिवार को केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए डीए में दो प्रतिशत की वृद्धि का ऐलान कर दिया। हालांकि सरकार द्वारा किए गए इस ऐलान का फायदा देश के 50 लाख कर्मियों और 69 लाख पेंशनरों को सीधे तौर पर मिलेगा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद हुई प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी है। पिछली बार केंद्र सरकार ने दीवाली पर कर्मचारियों के महंगाई भत्ते एवं पेंशनरों की महंगाई राहत में तीन फीसदी की बढ़ोतरी की थी। लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों ने सरकार के इस फैसले से नाराजगी जताई है।

इसलिए केंद्र ने किया घोषणा में विलंब

डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा, आमतौर से होली और दीवाली पर की जाती है। हालांकि डीए/डीआर की दरों में वृद्धि हर साल एक जनवरी और एक जुलाई से किए जाने का प्रावधान है। अगर तय समय से कुछ माह बाद डीए की घोषणा होती है तो सरकारी कर्मचारियों के खाते में उतने ही माह का एरियर आ जाता है। केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन भत्तों को तय समय पर जारी न कर केंद्र सरकार, खुद लाभ कमा रही है।

कॉन्फेडरेशन आॅफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के अध्यक्ष एसबी यादव ने बताया, ‘डीए’ की दरों में बढ़ोतरी की घोषणा जानबूझकर कई माह देरी से की जाती है। इससे सरकार को फायदा होता है। चूंकि डीए/डीआर की दरों में हुई बढ़ोतरी से सरकार पर हजारों करोड़ रुपये का भार पड़ता है। ऐसे में सरकार, डीए/डीआर की घोषणा, तीन चार माह देरी से करती है। इस अवधि के दौरान सरकार का पैसा निवेश होता है, जिस पर उसे अच्छा खासा ब्याज मिलता है।

इसलिए भी नाखुश हैं कर्मचारी संगठन

केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर, एक जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दरों में बढ़ोतरी होने की राह देख रहे थे। अमूमन मार्च तक इन भत्तों में वृद्धि होती रही है, लेकिन इस बार अप्रैल में दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी यह घोषणा नहीं हो सकी। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी, सरकार से सवाल करने लगे थे कि डीए/डीआर की घोषणा टलने के पीछे क्या ‘पश्चिम एशिया संकट’ जिम्मेदार है। सरकारी कर्मियों को यह डर सताने लगा कि कोरोनाकाल की तरह कहीं एक बार फिर डीए/डीआर फ्रीज तो नहीं हो जाएगा।