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Within five years, the country saw five prime ministers: पांच साल के अंदर देश ने देखे पांच प्रधानमंत्री

अंबाला। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में तीसरे लोकसभा का कार्यकाल 1962 से 1967 तक रहा। यह एक ऐसा कार्यकाल था कि देश ने इन पांच सालों में पांच बार प्रधानमंत्री बनते देखा। कांग्रेस एक बार फिर बहुमत के साथ सत्ता पर काबित हुई थी। 1962 में पंडित जवाहर लाल नेहरू एक बार फिर से प्रधानमंत्री बने थे। देश की अंदरूनी स्थिति तो मजबूत हो रही थी, लेकिन विदेश नीति में भारत बूरी तरह पिछड़ गया था। सभी पड़ोसी आंख दिखा रहे थे। उस समय पाकिस्तान के साथ संबंध खराब बने हुए थे। चीन के साथ दोस्ताना संबंध भी अक्टूबर 1962 के सीमा युद्ध से एक मिथ्या ही साबित हुए। हिंद चीन भाई भाई का नारा फ्लाप हो चुका था। चीन पूरी तरह तैयार बैठा था। भारतीय सेना कहीं भी चीनी सेना के सामने टिक नहीं सकी। भारतीय सेना खराब साजो समान, हथियार सहित युद्ध नीति में बुरी तरह पिछड़ गई। नेहरू की नीतियों की हर तरफ आलोचना शुरू हो गई। हाल यह हुआ कि नेहरू ने तत्कालीन रक्षामंत्री कृष्ण मेनन को हटा दिया।

– 1962 के युद्ध ने पंडित नेहरू को अंदर से हिला कर रख दिया। उनका स्वास्थ तेजी से खराब होने लगा। वे 1963 में स्वास्थ्य लाभ के लिए कश्मीर में कई महीने गुजारने के लिए बाध्य हो गए।
– मई, 1964 में उनके कश्मीर से लौटने पर वे सदमे से पीड़ित हुए और बाद में दिल का दौरा पड़ने से 27 मई 1964 को उनका निधन हो गया।
– नेहरूजी की मौत के बाद 2 सप्ताह के लिए वयोवृद्ध कांग्रेसी नेता गुलजारीलाल नंदा ने उनकी जगह प्रधानमंत्री की शपथ दिलाई गई।
– कांग्रेस द्वारा लालबहादुर शास्त्री को नया नेता चुने जाने तक उन्होंने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम किया।
– लालबहादुर शास्त्री ने प्रधानमंत्री का पद संभाला। 1965 में पाकिस्तान ने आक्रमण कर दिया। शास्त्री ने अप्रत्याशित रूप से 1965 में पाकिस्तान पर जीत दिलाने में देश का नेतृत्व किया।
– शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अय्यूब खान ने पूर्व सोवियत संघ के ताशकंद में 10 जनवरी 1966 को एक शांति संधि पर हस्ताक्षर किए।
– हालांकि शास्त्री अपनी जीत के फायदे देखने के लिए ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहे। प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए ही उनका देहांत हो गया।
– शास्त्री जी के निधन के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री पद पर संकट पैदा हो गया। गुलजारी लाल नंदा को फिर से कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
– लंबे विवाद के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए चयनित किया।
– तमाम विरोधों के बावजूद जवाहर लाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी 1966 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
– इस तरह पांच सालों में भारत ने जवाहर लाल नेहरू, गुलजारी लाल नंदा, लाल बहादूर शास्त्री, गुलजारी लाल नंद और अंत में इंदिरा गांधी के रूप में पांच प्रधानमंत्री देखे।

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