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The two prime ministers of the future contested in election for the first time: भविष्य के दो प्रधानमंत्रियों ने पहली बार लड़ा चुनाव

अंबाला। स्वतंत्र भारत का दूसरा लोकसभा चुनाव कई मायनों में याद किया जाता है। कई सुनहरी यादों में एक इतिहास यह भी है कि इस चुनाव ने भारत को भविष्य के दो प्रधानमंत्री दिए। एक थे अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरे थे चंद्रशेखर। यह अलग बात है कि तीन सीट पर लड़ने के बाद वाजपेयी को एक सीट पर सफलता मिली थी, जबकि एक पर उनकी जमानत जब्त हो गई थी। वहीं चंद्रशेखर को भी हार का सामना करना पड़ा था। बड़ा ही रोचक इतिहास है 1957 के लोकसभा चुनाव का।
-चंद्रशेखर ने पहला चुनाव 1957 में पीएसपी के टिकट पर लड़ा था। तब बलिया और गाजीपुर के कुछ हिस्से को मिलाकर रसड़ा संसदीय सीट हुआ करती थी। चंद्रशेखर ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था और तीसरे नंबर पर रहे थे। जीत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सरयू पांडेय की हुई थी।
– जनसंघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी के संसदीय जीवन की शुरुआत इसी आम चुनाव से हुई थी। उन्होंने उत्तर प्रदेश की तीन सीटों से एक साथ चुनाव लड़ा था।
– वाजपेयी बलरामपुर संसदीय क्षेत्र से तो जीत गए थे, लेकिन लखनऊ और मथुरा में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। मथुरा में तो उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी। लखनऊ से कांग्रेस के पुलिन बिहारी बनर्जी ने उन्हें हराया था, जबकि मथुरा से निर्दलीय उम्मीदवार राजा महेंद्र प्रताप की जीत हुई थी।
– 1957 के लोकसभा चुनाव की यह भी विशेषता रही कि पहली बार कम से कम पांच बड़े क्षेत्रीय दल अस्तित्व में आए थे। तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कड़घम (द्रमुक), ओडिशा में गणतंत्र परिषद, बिहार में झारखंड पार्टी, संयुक्त महाराष्ट्र समिति और महागुजरात परिषद जैसे क्षेत्रीय दलों का गठन इसी चुनाव में हुआ था।
-तमाम क्षेत्रिय दलों के सामने आने के बावजूद कांग्रेस की चमक फिकी नहीं पड़ी। चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई और पंडित जवाहरलाल नेहरू फिर से प्रधानमंत्री बने। कांग्रेस ने पहले आम चुनाव के मुकाबले सात सीटें ज्यादा जीतीं।
-चुनाव में एक तरफ कांग्रेसी, दूसरी तरफ वामपंथी- समाजवादी और दक्षिणपंथी पार्टियां- भारतीय जनसंघ, अखिल भारतीय हिंदू महासभा एवं अखिल भारतीय राम राज्य परिषद अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में डटी थीं। भारतीय जनसंघ इस चुनाव में भी उस तरह कमाल नहीं कर पाई और उसके खाते में पहले आम चुनाव से सिर्फ एक सीट ही ज्यादा आई।
– कांग्रेस का वोट शेयर जहां पहले आम चुनाव में 45 फीसदी था वहीं दूसरे लोकसभा चुनाव में यह बढ़कर 47.8 फीसदी हो गया। दूसरा लोकसभा चुनाव करीब साढ़े तीन महीने तक चला। यह चुनाव24 फरवरी से 9 जून के बीच संपन्न हुआ।
-1957 के दूसरे आम चुनाव में सिर्फ दो ही पार्टियां दहाई का आंकड़ा छू पाईं। ये दो कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी थीं। उस वक्त भारत में 13 राज्य और 4 केंद्र शासित प्रदेश थे। यह चुनाव इन 17 राज्यों के 403 निर्वाचन क्षेत्रों की 494सीटों पर हुआ था। चुनाव में 16 पार्टियों और कई सौ निर्दलीय उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था।

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