West Asia Crisis : खाड़ी देशों में आठ भारतीयों की मौत : विदेश मंत्रालय

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West Asia Crisis : खाड़ी देशों में आठ भारतीयों की मौत : विदेश मंत्रालय
West Asia Crisis : खाड़ी देशों में आठ भारतीयों की मौत : विदेश मंत्रालय

युद्ध के चलते हुए हमलों की चपेट में आने से गई जान, कुवैत से 20 भारतीयों के पार्थिव शरीर भारत पहुुंचे

West Asia Crisis (आज समाज), नई दिल्ली : ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए जा रहे हमलों में अभी तक आठ भारतीयों की मौत हो चुकी है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दूसरे महीने में पहुंचे खाड़ी संघर्ष में अब तक कुल 8 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि एक व्यक्ति लापता है।

एक अधिकारी ने बताया कि कुवैत में भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि कुवैत में हुए हमले में जान गंवाने वाले एक भारतीय नागरिक के पार्थिव शरीर को वापस लाया जा सके। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बुधवार को वायु रक्षा प्रणाली की तरफ से एक ड्रोन को हवा में नष्ट किए जाने के बाद उससे निकले छर्रे से एक भारतीय घायल हो गया।

कुवैत से 20 भारतीयों के पार्थिव शरीर भारत पहुंचे

कुवैत में विभिन्न कारणों से जान गंवाने वाले 20 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर बुधवार को केरल के कोचीन हवाईअड्डे पर पहुंचे। इनमें तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मुथुकुलथुर निवासी संथानसेल्वम कृष्णन का शव भी शामिल था, जिनकी पानी संयंत्र पर ड्रोन हमले में मृत्यु हो गई थी। अधिकारियों ने बताया कि अन्य 19 व्यक्तियों की मृत्यु अलग-अलग घटनाओं में हुई थी, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण उनके पार्थिव शरीर को वापस लाने में देरी हुई।

ईरान से सुरक्षित अजरबैजान पहुंच रहे भारतीय

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत और अजरबैजान के बीच कूटनीतिक स्तर पर अहम बातचीत हुई है। अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बेरामोव ने भारत के राजदूत अभय कुमार से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। पिछले कुछ हफ्तों में कई भारतीय नागरिक ईरान से निकलकर जमीनी रास्ते से अजरबैजान पहुंचे हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब क्षेत्र में संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। इस बैठक में भारत और अजरबैजान के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद से आपसी सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

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