उत्तर प्रदेश में जहां देखिए जान बचाने की जंग है, रोजाना बुरे समाचार हैं और चारों ओर ऑक्सीजन, अस्पताल में बेड और बुनियादी इंतजामों के लिए हाहाकार है । मुख्यमंत्री योगी का अपना जिला गोरखपुर हो या रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रतिनिधित्व वाला लखनऊ । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस का भी हाल अच्छा नहीं है । बाकी जिले तो अदने हैं जिनकी किस्मत में हर संकट में तबाही ही लिखी है।
 सरकार के अहम मंत्री  ब्रजेश पाठक ने कुछ दिन पहले लिखा था कि  सीएमओ फोन नहीं उठाते। अफसर मनमानी कर रहे हैं।
लखनऊ के मोहनलालगंज से सांसद कौशल किशोर ने अभी लिखा है कि  मरीजों को बेड और वेंटिलेटर नहीं मिल रहा और सिस्टम फेल हो गया है।
मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने ऑक्सीजन के घनघोर संकट पर सवाल खड़े किए हैं।  पार्टी के कई विधायकों और संगठन से जुड़े लोगों ने व्यवस्थाओं की बदहाली पर सवाल उठाए हैं।
 दूसरी ओर, जिन पर मुख्यमंत्री को अपने घेरे में लिए जाने के आरोप सार्वजनिक हो रहे हैं , वह टीम -11  मानती है कि ये सब अफवाह है। दवा, इंजेक्शन, बेड- वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सब पर्याप्त है। यह सूबे के चुनिंदा ग्यारह नौकरशाहों की टीम है जिसको पिछले साल आपदकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के  सम्पूर्ण भरोसे के साथ हालात काबू करने की जिम्मेदारी थी । यही टीम इस बार भी सब कुछ देख रही है।
वैसे तो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित समूचे उत्तर भारत में क्रूर कोरोना के कहर से त्राहि – त्राहि मची है और लोग ऑक्सीजन के बगैर मर रहे हैं लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे बरसों तक बीमारू बना दिए गए राज्य अब  हेल्थकेअर इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति लम्बी उपेक्षा की कड़ी सजा भुगत रहे हैं ।
योगी सरकार के दवा, अस्पताल बेड और आक्सीजन की कोई कमी न होने के दावे जमीन पर नहीं नजर आ रहे हैं। राज्य में इधर एक दो दिन से हालांकि संक्रमण की दर में कुछ सुधार जरुर हुआ है पर मरीजों के लिए आक्सीजन , दवाओं और अस्पताल में बेड की  मारामारी थमीं नही है।  ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ने के साथ ही इसके उपयोग वाले मरीजों की तादाद भी बढ़ती जा रही है। आक्सीजन के इस्तेमाल को लेकर सरकारी फरमान  फिलहाल लोगों की मुसीबत को और ही बढाते दिखे  हैं।
झारखंड के बोकारो से मध्यप्रदेश के सागर जिला अस्पताल के लिए आ रहे आक्सीजन टैंकर को यूपी के फतेहपुर में रोक लिया गया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हस्तक्षेप पर छोड़ा गया।
कोरोना की दूसरी लहर को रोकने में खुद को कामयाब बताने में जुटी यूपी सरकार अजब गजब आदेश जारी करती जा रही है। आक्सीजन की कमी को लेकर हाहाकार मचने के बाद अब प्रदेश सरकार ने अपनी ओर से दावा ठोंकते हुए कह दिया है कि कहीं कोई कमी नहीं और जो भी इस तरह की बात करेगा उस पर गंभीर धाराओं में मुकदमा करते हुए संपत्ति जब्त कर  ली जाएगी। दरअसल यूपी सरकार ने एक आदेश जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में न तो दवा, न अस्पतालों में बेड की और न ही आक्सीजन की कोई कमी है। सरकार ने कहा है कि इस बारे में भ्रामक जानकारी देने वाले या अफवाह फैलाने पर सख्त कारवाई की जाएगी।
योगी सरकार की इस धमकी पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके कहा है कि मुख्यमंत्री जी, पूरे प्रदेश में ऑक्सीजन इमरजेंसी है। आपको मेरे ऊपर केस लगाना है, सम्पत्ति ज़ब्त करनी है, तो अवश्य करें।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि मगर भगवान के लिए स्थिति की गम्भीरता को पहचानिए और तुरंत लोगों की जान बचाने के काम में लगें। प्रियंका गांधी के निर्देश पर यूपी कांग्रेस ने हेल्पडेस्क की भी शुरुआत की है। हालांकि समूचे विपक्ष का मानना है कि मुश्किल हालात में जो कुछ भी लोगों के प्राण को बचा सकती है वह है सरकार के संसाधन,  जिसकी भारी कमी है।
 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार को सत्ता का दम्भ छोड़कर एक परिवार वाले की तरह सोचना चाहिए।
योगी सरकार की यह भी बदकिस्मती है कि   उनके यहां आपदकाल में अजीबोगरीब बयान देने वाले कुछ मंत्री हैं जो मौका चूकते नहीं, कुछ न कुछ बोल देते हैं । सरकार के पहले साल ही गोरखपुर में ऑक्सीजन के चलते मौत के बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था कि अगस्त के महीने में ज्यादा मौते होती ही हैं तो पूरे देश दुनिया में बड़ी किरकिरी हुई । अभी दो दिन पहले जब अस्पतालों में ऑक्सीजन और बेड के लिए अभूतपूर्व संघर्ष था तो चिकित्सा शिक्षा और वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना का बयान आया कि कहीं कोई कमी नहीं है और सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है। जब मीडिया और सोशल मीडिया में मंत्री जी खींचे गए तो आज उनका एक और बयान  संशोधन के तौर पर आया जो चर्चा में है । मंत्री ने कहा है कि एक्सपर्ट फेल हो गये और हमें नहीं बताया कि कोविड की लहर इतनी तीव्र होगी ।  मंत्री ने कहा किहम स्थिति संभाल रहें हैं ।
 उनके मुताबिक ऑक्सीजन की दिक्कत नहीं थी, दिक्कत ऑक्सीजन को पहुंचाने की थी,हमने गैस टैंकरों की संख्या बढ़ा कर 62 कर दी है।
प्रियंका के बयान के बाद कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य व वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने यूपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि ऑक्सीजन की कमी, बेड की कमी व एम्बुलेस की कमी है। इसके चलते लोगो की मौत हो रहीहै लेकिन सीएम को जमीनी हकीकत नही मालूम है।
वास्तव में कोरोना को लेकर बदहाल इंतजामों के बीच पंचायत चुनाव कराने की सरकार की योजना ने अब उसी की मुसीबतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं।
जानकारों का कहना है कि यूपी में पंचायत चुनावों का आखिरी चरण गुरुवार को समाप्त हुए हैं और उधर गांवों और कस्बों से भी अब मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है। पंचायत चुनावों के चरण दर चरण जिलों में मरीजों की तादाद कई कई गुना बढ़ी है।  कोरोना गांवों में असर दिखाने लगा है और आने वाले दिनों में  मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं के बूते इसे संभालना और भी दुष्कर हो जाएगा।
 कोरोना काल में हुए इस चुनाव के दौरान अब तक 577 बेसिक शिक्षकों की मौत का आरोप  राज्य शिक्षक संगठन ने लगाया है । इससे पहले एक अखबार ने  जब पंचायत चुनाव के दौरान 135 पोलिंग अफसरों की मौत की खबर छापी तो इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया था ।
राज्य शिक्षक संगठन ने उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को उन 577 शिक्षकों की सूची भी सौंपी है, जिनकी मौत पंचायत चुनाव में ड्यूटी के बाद हुई है।  लिस्ट सौंपने के बाद राज्य शिक्षक संगठन ने 2 मई को होने वाली मतगणना टालने की भी मांग की है । हालांकि चुनाव आयोग की ओर से मतगणना को टालने की कोई कोई खबर नहीं है और अव्वल तो अब यह संभव भी नहीं है ।
उधर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे पर भी सरकार को घेरा है।
उनके मुताबिक  पंचायत चुनावों की ड्यूटी में लगे लगभग 500 शिक्षकों की मृत्यु की खबर दुखद और डरावनी है। उन्होंने सरकार से सवाल किया है कि जब चुनाव ड्यूटी करने वालों की सुरक्षा का प्रबंध लचर था तो उनको क्यों भेजा?
 प्रियंका ने  शिक्षकों के परिवारों को 50 लाख रु मुआवाजा व आश्रितों को नौकरी की माँग का  समर्थन किया है।
फिलवक्त यूपी में सबसे बड़ी समस्या अस्पतालों में बेड और आक्सीजन की है। जहां तमाम कवायद के बाद भी मरीजों की तुलना में अस्पतालों में बेड बढ़ने की रफ्तार खासी धीमी है वहीं आक्सीजन की कमी सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। प्रदेश भर में इस समय आक्सीजन का उपयोग सामान्य दिनों की अपेक्षा पांच गुना से भी ज्यादा बढ़ चुका है। अस्पतालों के ज्यादातर बेडों पर आक्सीजन का उपयोग हो रहा है।
गौरतलब है कि योगी सरकार के लाख दावों के बाद भी आक्सीजन को लेकर जनता की दिक्कतें घटने के बजाय बढ़ती जा रही हैं ।आक्सीजन के उपयोग को लेकर यूपी सरकार के हालिया आदेश नें लोगों की मुसीबत को बढ़ाने का काम किया है। बड़ी तादाद में होम आइसोलेशन में रह कर कोरोना का इलाज करा रहे लोगों को अब आक्सीजन मिलना मुश्किल हो गया है। आक्सीजन लेने के नए आदेश के मुताबिक अब इसके लिए डाक्टर का पर्चा और आवश्यकता दर्शाना होगा। उधर यूपी में हालात यह है कि अस्पतालों से कई गुना ज्यादा मरीज गऱों पर ही रहकर अपना इलाजा करा रहे हैं और उनमें से भी ज्यादातर को आक्सीजन की जरुरत पड़ रही है। नए आदेश के मुताबिक अस्पतालों को ही दी जाएगी पर घरों पर इलाज करा रहे लोगों को कुछ औपचारिकताए पूरी करने के बाद ही इसे दिया जा सकेगा।
इस तरह से यूपी में आक्सीजन की आपूर्ति का पूरा नियंत्रण अब प्रशासन के हाथों में आ गया है जिसके चलते अब लोगों की दिक्कतें बढ़ गयी हैं। यही हाल जीवन रक्षक रेमिटिसिवर इंजेक्शन के साथ भी हो रहा है जिसके इस्तेमाल के लिए तमाम औपचारिकताए मांगी जा रही हैं। सरकारा हालांकि दावा कर रही है और अस्पतालों में आक्सीजन से लेकर दवाओं की उपलब्धता पर ध्यान दे रही पर बड़ी तादाद में अस्पतालों के बाहर पड़े मरीजों की मुश्किलों का कोई हल नही सूझ रहा है। प्रदेश सरकार ने आनान फानन में 100 बेडों से ज्यादा क्षमता वाले सभी अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही नए आक्सीजन प्लांट लगाने के लिए औपचारिकताएं एक दिन में पूरी की जा रही हैं। हालांकि इन सब कवायदों का नतीजा जल्द निकलने वाला नहीं है। विशेषतज्ञों की मानें तो कोरोना संक्रमण के चलते आक्सीजन की फौरी जरुरत बाहर से आपूर्ति कर ही की जा सकती है जिसके लिए सरकार को युद्धस्तर पर प्रयास करने होंगे।