Editorial Aaj Samaaj |राकेश सिंह| आजकल दुनिया की अर्थव्यवस्था में टैरिफ का खेल बड़ा जोरों पर चल रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जो 27 अगस्त 2025 से लागू हो गया। वजह? भारत रूस से तेल खरीद रहा है और हथियार भी। ये टैरिफ भारत के 48.2 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है। अब सवाल ये है कि मोदी सरकार इससे कैसे निपटेगी? कौन से देशों में भारत के लिए नई उम्मीदें हैं? क्या भारत चीन के और करीब जाएगा? और चीन दौरे से क्या मिलेगा? साथ ही, अमेरिकी टैरिफ से अपने उद्योगों को कैसे बचाएगी सरकार?
सबसे पहले अमेरिकी टैरिफ की बात। ट्रंप ने भारत पर ये सजा इसलिए दी क्योंकि हम रूसी तेल और हथियारों पर निर्भर हैं। पहले से ही 25 प्रतिशत टैरिफ था, अब इसे दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया गया। इससे भारत के एक्सपोर्टर परेशान हैं। तमिलनाडु जैसे राज्यों में एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लेकिन मोदी सरकार फायरफाइटिंग मोड में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कहा है कि मेक इन इंडिया को बढ़ावा दो, घरेलू प्रोडक्ट्स खरीदो। सरकार का कहना है कि ये टैरिफ हमें आत्मनिर्भर बनने का मौका देगा। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने जीएसटी रेट्स घटाने का ऐलान किया है, ताकि कंज्यूमर ज्यादा खर्च करें और अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिले। साथ ही, एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन लॉन्च किया जा रहा है, जिसमें इंटरेस्ट सब्सिडी और नए मार्केट्स में मदद मिलेगी।
अब देखिए, ये टैरिफ सिर्फ भारत को नहीं, पूरी दुनिया को हिला रहा है। लेकिन मोदी सरकार की रणनीति है ट्रेड को डाइवर्सिफाई करना। मतलब, अमेरिका पर कम निर्भर रहना और दूसरे देशों के साथ रिश्ते मजबूत करना। यहां चीन की एंट्री होती है। क्या भारत चीन के नजदीक जाएगा? लगता तो यही है। मोदी जी 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन जा रहे हैं, एससीओ समिट के लिए तियानजिन में। ये उनका सात वर्षों में पहला चीन दौरा है। वहां प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मिलेंगे, साथ ही रूस के पुतिन से भी। उम्मीदें क्या हैं? सबसे पहले बॉर्डर इश्यू पर बात। 2020 के गलवान क्लैश के बाद रिश्ते खराब हुए थे, लेकिन अब सुधार हो रहा है। ट्रेड फिर से शुरू हो रहा है, डायरेक्ट फ्लाइट्स रिज्यूम हो रही हैं। 2025 में भारत-चीन ट्रेड 127.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। चीन हमें ह्यएशिया की डबल इंजनह्ण कह रहा है। ट्रंप के टैरिफ से दोनों देश करीब आ रहे हैं, क्योंकि दोनों ही अमेरिकी दबाव से परेशान हैं। इस दौरे से भारत को निवेश, टेक्नोलॉजी और बॉर्डर पीस की उम्मीद है। साथ ही, रउड में भारत इनोवेशन, हेल्थ और कल्चर एक्सचेंज पर फोकस करेगा।
चीन के अलावा, कौन से देश हैं जहां भारत की उम्मीदें हैं? मोदी जी का ये दौरा सिर्फ चीन तक नहीं, बल्कि एशिया टूर है। पहले जापान 29-30 अगस्त को। वहां पीएम शिगेरु इशिबा से मिलना। इंडिया-जापान स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को मजबूत करेंगे। फोकस डिफेंस, ट्रेड, एआई और सेमीकंडक्टर पर। जापान के साथ सिक्योरिटी और ट्रेड टाई मजबूत हो रही हैं, खासकर अमेरिकी टैरिफ के बीच। फिर रूस। पुतिन एससीओ में मिलेंगे, और रिपोर्ट्स हैं कि पुतिन 2025 के अंत तक भारत आएंगे। भारत रूस से तेल खरीदता रहेगा, टैरिफ के बावजूद। इसके अलावा, ब्राजील के साथ ट्रेड बढ़ा रहा है। साउथईस्ट एशिया जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस में भी नए अवसर तलाश रहा है, जहां ट्रंप के साथ उनके अच्छे डील हुए हैं। कुल मिलाकर, भारत ग्लोबल साउथ को एकजुट कर अमेरिकी दबाव का मुकाबला कर रहा है।
अब अमेरिकी टैरिफ से उद्योगों को कैसे बचाएगी सरकार? कुछ सेक्टर जैसे फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को एग्जेम्प्ट रखा गया है। लेकिन स्टील, एल्युमिनियम और एग्रीकल्चर पर असर पड़ेगा। सरकार एक्सपोर्टरों को आश्वासन दे रही है कि ह्यलाइवलीहुड प्रोटेक्ट करेंगे, हम आपके साथ हैंह्ण। नेक्स्ट जेन रिफॉर्म्स ला रही है, जैसे जीएसटी कट और नए मार्केट्स में एंट्री। साथ ही, मेक इन इंडिया को बूस्ट मिलेगा, क्योंकि अमेरिकी टैरिफ से घरेलू प्रोडक्शन बढ़ेगा। एक्सपोर्ट एसोसिएशंस का अनुमान है कि 55 प्रतिशत एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है, लेकिन सरकार लेआॅफ से बचाने के लिए स्कीम्स ला रही है। पीएम मोदी कहते हैं कि ह्यभारी कीमत चुकाने को तैयार हैंह्ण, लेकिन संप्रभुता पर समझौता नहीं।
कुल मिलाकर, ये टैरिफ भारत के लिए चुनौती है, लेकिन अवसर भी। चीन के साथ नई शुरूआत, जापान-रूस जैसे दोस्तों के साथ मजबूती, और घरेलू इंडस्ट्री को सशक्त बनाना। यही मोदी सरकार की प्लानिंग है। दुनिया बदल रही है, ट्रेड वॉर में भारत स्मार्ट प्लेयर बनकर उभरेगा। उम्मीद है कि ये कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और करोड़ों नौकरियां बचाएंगे। गौरतलब है कि अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है और ये स्थिति 2021-22 से बनी हुई है। 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर का सामान बेचा, जबकि अमेरिका से 45.3 अरब डॉलर का माल खरीदा।
यूं कहें कि दोनों देशों के बीच 131.8 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। भारत ने साल 2024-25 में दुनिया भर में जो कुल सामान निर्यात किया (437.42 अरब डॉलर), उसमें केवल अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 20% रही। यानी भारत की निर्यात इनकम में अमेरिका की बड़ी भूमिका है। इसी कड़ी में वाणिज्य मंत्रालय कई अहम बैठकें करने वाला है। केमिकल्स, जेम्स और आभूषण जैसे सेक्टर के निर्यातकों के साथ मंत्रालय बातचीत करेगा ताकि यह समझा जा सके कि किन नए देशों में भारतीय सामान की मांग बढ़ाई जा सकती है। एक अधिकारी ने बताया कि 2025-26 के बजट में घोषित ‘निर्यात प्रोत्साहन मिशन’ पर भी तेजी से काम चल रहा है। अगले 2-3 दिनों में मंत्रालय इस दिशा में और कदम उठाने के लिए उद्योगों के साथ चर्चा करेगा।
कुल मिलाकर, ये टैरिफ भारत के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन अवसर भी। चीन के साथ नई शुरूआत, जापान-रूस जैसे दोस्तों के साथ मजबूती, और घरेलू इंडस्ट्री को सशक्त बनानाझ्रयही मोदी सरकार की प्लानिंग है। दुनिया बदल रही है, ट्रेड वॉर में भारत स्मार्ट प्लेयर बनकर उभरेगा। उम्मीद है कि ये कदम इकोनॉमी को मजबूत करेंगे, करोड़ों नौकरियां बचाएंगे और भारत को ग्लोबल लीडर बनाएंगे। (लेखक आईटीवी नेटवर्क के प्रबंध संपादक हैं।)
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