Editorial Aaj Samaaj | राजीव रंजन तिवारी | इनके मुंह से विश्वास की बातें बेईमानी लगती है, झूठे नेताओं के बीच सच्चाई अनजानी लगती है। न जाने कितने झूठे किस्से हैं इन झूठे नेताओं के, करे कोई नेता इमानदारी तो मेहरबानी लगती है। किसी ने क्या खूब लिखा है। जी, हां। मौजूदा सियासी हालात को कुछ इसी तरह से परिभाषित किया जा सकता है। देश के अधिकांश नेताओं का यही हाल है। चाहे वे सत्ताधारी हों अथवा विपक्षी। काम करने वाले मुट्ठी भर ही हैं। बाकी तो हवाबाजी से ही काम चला रहे हैं। बिना कुछ किए शोर मचाने वालों की संख्या बहुत अधिक है। बात चल पड़ी है तो बता दें कि इंदौर का मामला एक बार फिर गरम है। मामला इसलिए गरम नहीं है कि गंदे पानी की वजह से लोगों की मौत हो गई। बल्कि इसलिए सुर्खियां पा रहा है कि वहां के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अनर्गल प्रलाप कर दी है। मेरा मानना है कि कैलाश विजयवर्गीय की बातों को बहुत गंभीरता से नहीं लेनी चाहिए। उन्हें उल्टी-पुल्टी बातें करते रहने की आदत है। अब लोग कैलाश विजयवर्गीय के अनर्गल प्रलाप को बारीकी से समझने की कोशिश कर रहे हैं। लोग उनकी कसक और करतूत के बीच के अंतर को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश का इंदौर पिछले कुछ वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है, लेकिन शहर में पीने के दूषित पानी के कारण कम से कम 10 लोगों की मौतों के बाद राज्य सरकार की किरकिरी हो रही है। दो माह पहले राज्य में जहरीले कफ सिरप से 20 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला अभी लोग भूले भी नहीं थे कि इंदौर की मौतें राज्य की भाजपा सरकार के लिए अपयश का कारण बन गई हैं। सरकार के मंत्री दबाव में आपा खो रहे हैं। मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को एक पत्रकार के सवाल पर आपा खोते हुए देखा गया। सवाल था कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों की जिम्मेदारी केवल कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारियों पर ही क्यों डाली जा रही है और वरिष्ठ नेताओं पर क्यों नहीं। क्या नगरीय प्रशासन मंत्री और क्षेत्र के विधायक होने के नाते इसकी जिम्मेदारी विजयवर्गीय की भी नहीं बनती? क्या इसकी जिम्मेदारी जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट की नहीं है, जो मुख्यमंत्री के बगल में बैठे थे? उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिवारों को चिकित्सा खर्चों की प्रतिपूर्ति न मिलने का मुद्दा भी उठाया।
इस तरह के सवालों पर दबाव बनाया गया तो कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अनावश्यक प्रश्न मत पूछो। जब रिपोर्टर ने अपनी बात जारी रखी और बताया कि परिवार मेडिकल बिलों से जूझ रहे हैं और उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला है, तो मंत्री अपना आपा खो बैठे। मंत्री को यह कहते सुना गया कि छोड़ो यार, तुम फोकट प्रश्न मत पूछो यार। इस पर पत्रकार ने कहा कि फोकट नहीं, मैं वहां से (मौके पर) होकर आया हूं। इस पर विजयवर्गीय यह कहते सुने गए कि क्या घंटा होकर आए हो तुम। पत्रकार ने इस पर आपत्ति जताई और मंत्री को अपनी भाषा पर ध्यान देने को कहा। बहरहाल, इसके बाद विजयवर्गीय ने अपनी टिप्पणियों पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र की स्थिति सुधारने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि मेरे लोग दूषित पानी से पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए हैं। इस गहरे दुख की स्थिति में मीडिया के एक सवाल के जवाब में मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं। लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं चुप नहीं बैठूंगा।
इस बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि इंदौर में जहरीले पानी के कारण होने वाली मौतें आठ से बढ़कर 10 हो गई हैं। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री मोहन यादव नैतिक आधार पर विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगें। मुख्यमंत्री ने भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैले डायरिया को आपातकाल जैसी स्थिति बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। इंदौर के घनी आबादी वाले इलाके भागीरथपुरा में परिवारों का दावा है कि पानी पीने से कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है, जबकि आधिकारिक मृत्यु संख्या अलग-अलग रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में चार मौतों का उल्लेख किया गया है, जिसमें 212 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और 50 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। बाद में विजयवर्गीय ने कहा कि 1400-1500 लोग प्रभावित हुए थे। 198 अस्पताल में भर्ती थे। कुछ को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। सभी जिम्मेदार अधिकारी काम पर लगे हैं। हम स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं और प्रभावितों की निगरानी कर रहे हैं। समर्पित डॉक्टरों की एक टीम ड्यूटी पर है।
इस त्रासदी का सबसे छोटा शिकार छह महीने का एक बच्चा था, जिसके माता-पिता ने एक बेटे के लिए पूरे एक दशक तक इंतजार किया था। बच्चे के पिता सुनील की आवाज़ में दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने बताया कि उसे दस्त और बुखार था। हम उसे डॉक्टर के पास ले गए। वह दो दिन तक ठीक था। लेकिन अचानक रात में उसे बहुत तेज़ बुखार आया। उसने उल्टी की और घर पर ही उसकी मौत हो गई। मरने वालों में से अधिकांश लोग बीमार पड़ने से पहले पूरी तरह स्वस्थ थे। 31 वर्षीय उमा कोरी की मौत की कहानी भी उतनी ही दर्दनाक है। उनके पति बिहारी कोरी ने बताया कि उमा ने रविवार की रात सामान्य खाना खाया था, लेकिन सोमवार तड़के 3 बजे उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं। शुरुआत में इसे फूड पॉइज़निंग समझा गया, लेकिन उनकी हालत तेजी से बिगड़ी। शरीर में पानी की कमी (डिहायड्रेशन) और लगातार उल्टियों के कारण सुबह 11 बजे तक वह बेहोश हो गईं। उनके पति उन्हें बाइक पर अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
खैर, इन घटनाओं से अधिक विजयवर्गीय का बयान चर्चाओं में है। मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय अक्सर भड़काऊ बयानों के कारण विवादों में रहने का एक लंबा इतिहास रखते हैं। इसबार के घंटा कुवाच के अलावा पहले उनका मुंह जब भी खुला है, उनकी पार्टी, सरकार, राजनीति को शर्मसार ही होना पड़ा है। अक्टूबर 2025 में इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के साथ कथित छेड़छाड़ की घटना पर टिप्पणी करते हुए उन पर विक्टिम-ब्लेमिंग (पीड़िता को ही दोषी ठहराने) के आरोप लगे। इस पर कैलाश ने सुझाव दिया कि खिलाड़ियों को होटल से निकलने से पहले अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था और इसे अधिकारियों के लिए एक सबक के रूप में पेश किया। अगस्त 2025 में 78वें स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने 1947 के विभाजन को कटी-फटी आजादी करार दिया और अखंड भारत के तहत पाकिस्तान में भारतीय ध्वज फहराने की परिकल्पना की। इस पर कांग्रेस ने उन पर स्वतंत्रता संग्राम का अपमान करने का आरोप लगाया।
इतना ही नहीं, जून 2025 में उन्होंने छोटे कपड़ों को अभारतीय और विदेशी प्रभाव वाला बताते हुए महिलाओं की आलोचना की। उन्होंने महिलाओं से नैतिक अखंडता के लिए देवी का रूप धारण करने का आग्रह किया, जिससे जेंडर और परंपरा पर बहस फिर से शुरू हो गई। अप्रैल 2023 में एक धार्मिक कार्यक्रम में, उन्होंने गंदे या छोटे कपड़े पहनने वाली लड़कियों की तुलना रामायण की राक्षसी शूर्पणखा से की, जिससे महिलाओं के पहनावे पर उनके विचारों को लेकर काफी गुस्सा भड़का। इसके अलावा एकबार इनका पुत्र विधायक एक अधिकारी पर बैटिंग करते हुए दिखा था। उस पर भी जब उनसे सवाल किए गए तो वे भड़क गए थे। मीडिया वालों को जमकर खरी-खोटी सुनाई थी। मतलब ये कि कैलाश विजयवर्गीय अपनी आदतों से लाचार हैं। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी में जिम्मेदार विजयवर्गीय को अपनी शैली सुधारने की जरूरत है। दरअसल, कैलाश विजयवर्गीय की वजह से विपक्ष को हमला करने का मौका मिल जाता है और पार्टी को असहज होना पड़ता है।
बहरहाल, यह समय की मांग है कि मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपनी शैली में सुधार करें और शुचिता पेश कर यह बताने का प्रयास करें कि वे एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में जनता के बड़े हितैषी नेता हैं। आज सोशल मीडिया का जमाना है। बात निकलते ही दूर तलक चली जाती है। फिर उसे संभालना मुश्किल हो जाता है। पार्टी को इस बारे में विचार करना चाहिए। कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता के लिए इस तरह की बातें शोभा नहीं देती। खैर, देखते हैं कि आगे क्या होता है? (लेखक आज समाज के संपादक हैं।)
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