Mahabharat Katha: द्रौपदी के पूर्वजन्म की अधूरी इच्छा ने बनाया 5 पतियों की पत्नी

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Mahabharat Katha: द्रौपदी के पूर्वजन्म की अधूरी इच्छा ने बनाया 5 पतियों की पत्नी
Mahabharat Katha: द्रौपदी के पूर्वजन्म की अधूरी इच्छा ने बनाया 5 पतियों की पत्नी

महादेव ने दिया था वरदान
Mahabharat Katha, (आज समाज), नई दिल्ली: द्रौपदी महाभारत काल की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शामिल थीं। द्रौपदी ने किसी के गर्भ से जन्म नहीं लिया था, बल्कि वो राजा द्रुपद के यज्ञ कुंड से अवतरित हुई थीं। इसलिए द्रौपदी को यज्ञसेनी भी कहा जाता है। महाभारत का युद्ध जिन कारणों से हुआ, उसमें एक वजह द्रौपदी के अपमान को माना जाता है। द्रौपदी पांडवों की पत्नी थीं। उनका विवाह पांचों पांडवों के साथ हुआ था।

हालांकि, बहुत कम लोग ये जानते हैं कि द्रौपदी का पांचों पांडवों से हुआ विवाह उनके पूर्वजन्म की अधूरी इच्छा का ही नतीजा था। पूर्वजन्म में ज्यादा पाने की लालसा में द्रौपदी ने ऐसी भूल कर दी, जिससे उन्हें अगले जन्म में पांच पति मिले। आइए जानते हैं द्रौपदी के पूर्वजन्म की कथा। साथ ही जानते हैं उनके पांच पतियों का रहस्य।

कथा के अनुसार

व्यासजी ने द्रौपदी के जन्म की कथा महाभारत के आदिपर्व में लिखी है। कथा के अनुसार, द्रौपदी यानी यज्ञ से जन्मी यज्ञसेनी पिछले जन्म में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में पैदा हुईं थीं। इस वजह से ब्राह्मणी महिला को पति से कोई सुख नहीं मिला। एक दिन ब्राह्मणी के पति की बीमारी से मौत हो गई। जिसके बाद ब्राह्मणी विधवा हो गई। विधवा ब्राह्मणी के पति के मर जाने के बाद समाज से उसे यातनाएं दीं।

उस ब्राह्मणी के घर पर कोई कमाने वाला नहीं था। इसलिए हमेशा वो भूखे पेट दिन गुरारती थी। एक रात महिला ने सोचा कि अगर अगले जन्म में भी उसके साथ कुछ ऐसा ही हुआ, तो उसे एक बार फिर से अधूरी इच्छाओं का बोझ ढोना होगा। इसलिए उसने भगवान शिव की कड़ी तपस्या करनी शुरू कर दी। कई वर्षों की तपस्या बाद महादेव प्रसन्न होकर प्रकट हुए।

महादेव ने दिया वरादान

उस ब्राह्मणी ने महादेव से अगले जन्म में सर्वगुण संपन्न पति की मांग की, लेकिन उसने जो भी विशेषताएं बताई वो किसी एक मनुष्य में होना असंभव थीं। ब्राह्मणी ने पांच बार महादेव से प्रार्थना की। अंत में महादेव ने महिला को उसके हठ के अनुसार वरदान दे दिया। पूर्वजन्म की अधूरी इच्छाएं ही द्रौपदी के पांच पतियों की आधार बनी। महाभारत में पांचाल देश के राजा दुपद्र ने बेटी द्रौपदी का स्वंयवर रचाया।

अर्जुन ने जीता था स्वंयवर

पांडु पुत्र अर्जुन ने द्रौपदी का स्वंयवर जीता। अर्जुन जब सभी भाइयों और द्रौपदी को लेकर वन में पहुंचे। फिर माता कुंती से कहा कि देखिए माता हम आपके लिए क्या लाए हैं। अर्जुन की पूरी बात सुने बिना माता कुंती ने कहा कि तुम जो भी लाए हो, उसे पांचों भाई आपस में बांट लो। माता कुंती ने जब द्रौपदी को देखा तो क्रोधित हुई। उन्होंने कहा कि कन्या के लिए तुमने वस्तु शब्द का प्रयोग किया। अब इसे बांटकर दिखाओ।

श्रीकृष्ण ने पूर्वजन्म का रहस्य बताया

कुंती के मुंह से यह बात सुनकर द्रौपदी को बहुत क्रोध आया, लेकिन श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को उनके पूर्वजन्म का रहस्य बताया। उन्होंने द्रौपदी से कहा कि ये तुम्हारे पिछले जन्म के मांगे हुए वरदान का परिणाम है, जो महादेव ने तुमको दिया था। इसके बाद द्रौपदी का विवाह पांचों पांडवों युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल और सहदेव से करा दिया गया। इस तरह द्रौपदी की पिछले जन्म की भूल ने उनको पांच पतियों की पत्नी बनाया।

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