चमक उठेगा भाग्य और दूर होंगी सभी बाधाएं
Shani Trayodashi, (आज समाज), नई दिल्ली: शास्त्रों में शनि त्रयोदशी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन शनिदेव और भगवान शिव की एक साथ पूजा करने से जीवन में आ रही परेशानियां, बाधाएं और शनि दोष से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं।
पंचांग के अनुसार, इस बार 14 फरवरी 2026 (शनिवार) को शनि त्रयोदशी और शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह संयोग बेहद शुभ माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि शनि त्रयोदशी के दिन कौन-सी पूजा करनी चाहिए, जिससे शनिदेव और भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त हो।
शनि त्रयोदशी और शनि प्रदोष का शुभ मुहूर्त
इस बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी को पड़ रही है। शनिवार का दिन होने के कारण इसे शनि प्रदोष भी कहा जाएगा।
- पूजा का समय (प्रदोष काल): सूर्यास्त के बाद का समय शिव और शनि पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और काले या गहरे नीले रंग के साफ वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लें। सबसे पहले मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल और काले तिल अर्पित करें। भोलेनाथ के नाम का का जाप करते हुए बेलपत्र चढ़ाएं।
शाम के समय शनि मंदिर जाएं। शनि देव की शिला पर सरसों का तेल चढ़ाएं। याद रखें, उनकी आंखों में सीधे न देखें, बल्कि चरणों के दर्शन करें। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसमें थोड़े काले तिल जरूर डालें। पीपल की सात बार परिक्रमा करना बहुत ही शुभ होता है।
शनि त्रयोदशी के दिन करें ये खास उपाय
- शनि चालीसा का पाठ: पूजा के दौरान शनि चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।
- दान का महत्व: इस दिन काले तिल, काली उड़द, छाता, जूते या काले कपड़े का दान किसी जरूरतमंद को करें।
- मंत्र जाप: शांति और मानसिक सुकून के लिए इस शनि देव के मंत्रों का 108 बार जाप करें।
क्यों खास है यह संयोग?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव भगवान शिव को अपना गुरु मानते हैं। शनि त्रयोदशी के दिन जब कोई व्यक्ति महादेव की भक्ति करता है, तो शनि देव उस पर अपनी टेढ़ी नजर नहीं डालते।
यह दिन पितृ दोष और कर्मों के बंधनों से मुक्ति पाने के लिए भी उत्तम माना गया है। इस दिन पूजा करने से जीवन में चल रही रुकावटें दूर होती हैं, धन, स्वास्थ्य और नौकरी से जुड़ी परेशानियां घटती हैं।


