स्वस्थ्य मंत्रालय ने बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर लिया फैसला, पिछले माह देश के कई राज्यों में जहरीली कफ सिरप से हुई थी बच्चों की मौत
New Guidelines on Cough Syrup (आज समाज), नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए आदेश जारी किए हैं कि कोई भी दवा विके्रता चिकित्सक की पर्ची के बिना अब कफ सिरप नहीं बेच पाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक शीर्ष अफसर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इससे गलत दवा सेवन, दुष्प्रभाव रोका जा सकेगा। हाल में यह तथ्य सामने आया है कि कुछ लोग कफ सिरप का नशे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, कई माता-पिता बिना डॉक्टर से पूछे बच्चों को सिरप दे रहे हैं। जोकि बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
सबसे बड़ा कारण पिछले माह हुई बच्चों की मौत
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लिए गए इस फैसले के पीछे बड़ी वजह पिछले दिनों देश के कई राज्यों में कफ सिरप के कारण हुई बच्चों की मौत थी। हालांकि उस समय जांच में यह भी सामने आया था कि जिस कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत हुई थी उसे चिकित्सकों ने ही रिकमंड किया था। जांच में यह भी पाया गया था उस दवा के निर्माण में ही खामी रह गई थी जिसके बाद दवा में पड़ने वाले रसायन की अधिकता के चलते वह जहरीली हो गई थी।
मेडिकल स्टोर संचालकों को रखना होगा रिकॉर्ड
कफ सिरप से कई बच्चों की मौतों और दुष्प्रभावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी मनमानी बिक्री पर लगाम लगाने के लिए कड़ा कदम उठाया है। अब अधिकांश कफ सिरप डॉक्टर की पर्ची के बिना मेिडकल दुकानों पर नहीं बेचे जा सकेंगे। उन्हें हर प्रिस्क्रिप्शन का रिकॉर्ड रखना होगा। साथ ही, कफ सिरप व गुणवत्ता जांच के कड़े नियमों का पालन करना होगा। सरकार की शीर्ष नियामक औषध परामर्श समिति ने कफ सिरप को उस शेड्यूल से हटाने की मंजूरी दे दी है, जिसके प्रावधान कफ सिरप को लाइसेंसिंग व खास निगरानी नियमों से छूट देते थे। यानी इसे खरीदने के लिए डॉक्टर की सलाह और पर्चा अनिवार्य होगा।
विदेशों में बैन हो चुकी हैं भारत की कई कफ सिरप
समिति के एक सदस्य ने कहा कि प्रस्ताव इसलिए लाया गया, क्योंकि तीन वर्षों में भारत से निर्यात कई कफ सिरपों में डाई-एथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) और ईथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) जैसे घातक रसायन पाए गए। इसके चलते गाम्बिया, उज्बेकिस्तान व कैमरून में कई बच्चों की मौतें हुईं। हाल में मध्य प्रदेश में भी कई बच्चों की इससे मौत हो गई। समिति के मुताबिक, सरकार की कोशिश है कि खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारी में भी खुद दवा लेने के बजाय लोग डॉक्टर से परामर्श लें।


