अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में किया गया दावा, नाराज जिनपिंग ने अफसरों को निकाला
China Missile Scandal, (आज समाज), नई दिल्ली: चीन की रॉकेट (मिसाइल) फोर्स का बड़ा घोटाला सामने आया है। ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की 2024 की रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिमी चीन में कुछ मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी भरा हुआ था।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जिन जगहों से इन मिसाइलों को जमीन के नीचे बने जिन साइलो से लॉन्च किया जाना था, वे भी ठीक नहीं थे। ये साइलो इतने भारी और खराब तरीके से बनाए गए थे कि उनके ढक्कन खुल ही नहीं पा रहे थे। इन खुलासों के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की रॉकेट फोर्स के पूरी टॉप लीडरशिप को हटा दिया।
अब तक हटाए जा चुके 5 अफसर
पिछले महीने पीएलए में भ्रष्टाचार के मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई की गई। चीन की सेना की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयरमैन झांग यूक्सिया को उनके पद से हटा दिया गया। झांग पीएलए के सबसे सीनियर अफसर थे और शी जिनपिंग को बचपन से जानते थे। इसके बावजूद उन्हें हटाया जाना दिखाता है कि इस कार्रवाई में किसी को भी बख्शा नहीं गया। सीएमसी के अब तक 5 अफसर हटाए जा चुके हैं।
चीनी फौज को अमेरिका से भी ज्यादा ताकतवर बनाना लक्ष्य
जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम नहीं है। शी जिनपिंग चाहते हैं कि सेना पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहे और एक ऐसी आधुनिक फौज बने, जो जरूरत पड़ने पर ताइवान पर हमला कर सके। उनका लक्ष्य है कि 2027 तक सेना पूरी तरह तैयार हो और 2049 तक चीन की फौज अमेरिका से भी ज्यादा ताकतवर बन जाए।
इस कारण हटाए गए जनरल झांग
चीनी सेना के अखबार पीएलए डेली के मुताबिक, जनरल झांग पर आरोप है कि उन्होंने सेना में उस व्यवस्था का पालन नहीं किया, जिसमें सभी फैसलों में सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बात मानी जाती है। अखबार ने कहा कि झांग ने इस सिस्टम को गंभीर रूप से नजरअंदाज किया। हालांकि, जनरल झांग पर लगे आरोपों की पूरी जानकारी चीन ने सार्वजनिक नहीं की है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियारों से जुड़ी जानकारियां अमेरिकी एजेंसियों तक पहुंचाईं।
यह भी कहा गया है कि उन्होंने ताइवान पर हमले की तय समय-सीमा से असहमति जताई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जनरल झांग सेना में एक व्यक्ति के आदेश की बजाय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति निष्ठा पर जोर दे रहे थे। यही सोच शी जिनपिंग को पसंद नहीं आई और यही उनके खिलाफ कार्रवाई की एक बड़ी वजह बनी।
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