
जरूरत पड़ी तो सेना के दम पर ताइवान को अपने साथ मिला लेगा चीन
China Taiwan Dispute, (आज समाज), नई दिल्ली: चीन ने एक बार फिर से ताइवान पर अपना हक जताया है। चीन का कहना है कि ताइवान चीन का हिस्सा है और दोनों के बीच खून का रिश्ता है। नए साल के भाषण में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और ताइवान का एक होना समय की मांग है और इसे कोई रोक नहीं सकता। ताइवान की सरकार ने इसे बहुत उकसाने वाला कदम बताया और कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में अशांति फैल सकती है। चीन हमेशा से कहता आया है कि ताइवान उसका हिस्सा है और जरूरत पड़ी तो सेना के दम पर उसे अपने साथ मिला लेगा।
वहीं अमेरिका ने भी चीन की इस हरकत की आलोचना की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन की बातें बेवजह तनाव बढ़ा रही हैं। अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति को दोहराते हुए विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका ताइवान जलडमरूमध्य (ताइवान और चीन के बीच का समुद्री क्षेत्र) में मौजूदा शांति को भंग करने के किसी भी कदम का विरोध करता है।
चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा: ट्रम्प
वहीं ट्रम्प ने चीन को लेकर नरम रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि वे चीन के सैन्य अभ्यासों से परेशान नहीं है। चीन पिछले 20 साल से ऐसे अभ्यास करता रहा है। ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनके अच्छे संबंध हैं और उन्हें लगता है कि चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा।
ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास कर चुका चीन
चीन ने ताइवान के आसपास अपना सबसे बड़ा और सबसे करीबी सैन्य अभ्यास किया है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, इस अभ्यास में नौसेना, वायुसेना और रॉकेट फोर्स को एक साथ तैनात किया गया है। इसका नाम जस्टिस मिशन 2025 रखा गया। यह अभ्यास 29 और 30 दिसंबर 2025 को दो दिनों तक चला और 31 दिसंबर को खत्म हो गया। इसमें चीन की सेना ने दर्जनों रॉकेट दागे, सैकड़ों लड़ाकू विमान, नौसेना के जहाज और तटरक्षक बलों को तैनात किया।

