पल्स

parliament

Statesman builds the nation! स्टेट्समैन राष्ट्र बनाता है!

राष्ट्रीय सांख्यकी मंत्रालय के मुताबिक 2020-21 के वित्तीय वर्ष में जीडीपी 135 लाख करोड़ रही, जो पिछले साल 145 लाख करोड़ थी। इस वक्त हमारे देश की जीडीपी -7.3 फीसदी....

nehru ji

Nehru’s ideology is the need of the hour! समय की जरूरत है नेहरू की विचारधारा!  

“आज एक सपना खत्म हो गया है। एक गीत खामोश हो गया है। एक लौ हमेशा के लिए बुझ गई है। यह एक ऐसा सपना था, जिसमें भुखमरी, भय-डर नहीं था। यह....

modi corona

My murderer is my judge..! मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है..!

हमारे एक सहयोगी का रात फोन आया कि उसकी हालत बिगड़ रही है। वक्त रहते आक्सीजन बेड नहीं मिला, तो मर जाएगा। हमने दिल्ली के मुख्यमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ मंत्री को....

corona death

We cry, shame or curse! But whom? हम रोएं, शर्म करें या लानत दें! मगर किसे?

भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे पूर्व राजदूत अशोक अमरोही गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल की पार्किंग में पांच घंटे इलाज का इंतजार करते दम तोड़ गये। पिछले दो सप्ताह में कुछ इसी तरह हमने भी अपने 40 प्रियजनों को खो दिया। कुछ रिश्तेदार थे, कुछ मित्र और सहकर्मी। पत्रकारिता के शुरुआती दिनों में मददगार रहे आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक त्रिवेदी का कोरोना से निधन, उस वक्त हुआ, जब हम उन्हें सफल और बेदाग सेवा पूरी करने की बधाई देने के लिए फोन मिला रहे थे। यूपी में जिला जज के पद पर तैनात एक मित्र का लखनऊ के अस्पताल में कोरोना से लड़ रहे एक अन्य जज की मदद के लिए फोन आया। आक्सीजन के संकट से परिवार परेशान था। उन्हें बड़े अस्पताल में आक्सीजन वाला बेड चाहिए था, काफी कोशिशों के बाद जब अस्पताल के निदेशक से बात हुई और सरकारी प्रक्रिया पूरी कराई, तब तक देर हो चुकी थी। उनकी सांसें थम गई थीं। इतना बेवश तो हम कभी नहीं रहे। हमें याद है कि साल के शुरुआती दिनों में भाजपा ने प्रस्ताव पास करके कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण देश करोना से जीत गया। इस जश्न में हम सब भूल गये। हमने वह सब किया, जो नहीं करना था। यूपी में पंचायत चुनाव की ड्यूटी करते 700 से अधिक शिक्षक-कर्मचारी मौत के मुंह में चले गये हैं। नतीजतन, कोरोना की दूसरी लहर यूं चली, कि सिर्फ अप्रैल महीने में 45 हजार लोग मौत के मुंह में समा गये। आजकल, रोज सुबह से ही हम सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड, आक्सीजन और दवायें उपलब्ध कराने में उलझ जाते हैं। इस दौरान तमाम लोग दम तोड़ देते हैं। कई बार, हमारे पास अफसोस करने के सिवाय कुछ नहीं होता। शब्दों में बात करना आसान है मगर जिस परिवार का कोई सदस्य जाता है, उसकी पीड़ा वही समझ सकता है। जो सत्ता और उनके नायकों का गुणगान करते नहीं थकते थे, आज वो भी बेवश, उन्हें कोस रहे हैं। यूपी, मध्य प्रदेश और दिल्ली के हमारे तमाम डॉक्टर मित्रों ने बताया कि उच्च स्तर से उन्हें निर्देश मिल रहे हैं कि वायरस से लड़ने वाले इंजेक्शन रेमडीसीवर को न लिखें। आक्सीजन और वेंटीलेटर पर मरीज को तब रखें, जब कोई साधन न बचे। इसका नतीजा यह है कि आखिरी वक्त में यह सब उपलब्ध कराने तक कई मरीज दम तोड़ देते हैं। सरकार की नाकामी का ठीकरा डॉक्टरों पर फूटता है। कई जगह लुटा-पिटा तीमारदार अपना मानसिक संतुलन खो देता है। जिससे हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। वायरस और संसाधनों के अभाव से लड़ते अब तक 791 डॉक्टरों ने दम तोड़ दिया। औसतन हर अस्पताल के 30 फीसदी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी कोरोना संक्रमित हैं। सरकार कोरोना से जंग लड़ने के बजाय आंकड़ों का प्रबंधन करने में जुटी है। जब दो लाख से अधिक लोग मर गये, तब सरकार आक्सीजन प्लांट, रेमडीसीवर और कोविड बेड-अस्पताल बनाने की बात करती है। जब तक इनकी व्यवस्था बनेगी, तब तक लाखों लोग मर जाएंगे। हम जैसे खबर लिखने वाले खुद खबर बन रहे हैं। सच लिखने पर मुकदमा और जेल सरकारी बोनस है। हमारी चिकित्सा का इतिहास पांच हजार साल पुराना है। देश में पहला अस्पताल 16वीं सदी में पुर्तगालियों ने गोवा में रॉयल हास्पिटल के नाम से बनाया था। उन्होंने बैसिन, दमन और दीव में भी अस्पताल बनाये। उनके बाद ब्रितानियों ने पहला अस्पताल मद्रास में बनाया था। यहीं से भारत में आधुनिक चिकित्सा की शुरुआत हुई। 1857 में ब्रितानी राज के सत्ता संभालने पर लोक स्वास्थ पर सोचा गया। 1897 में भारतीय स्वास्थ सेवा का शुभारंभ हुआ। स्वराज की लड़ाई जब तेज हुई, तब 1935 में ब्रितानी सरकार ने भारत के लिए हेल्थकेयर एक्ट पास किया। इसके तहत कमेटियां बनाकर स्वास्थ सेवाओं की जरूरतों पर रिपोर्ट मांगी गई। 1946 में पब्लिक हेल्थ सिस्टम बनाने के लिए सर्वे कमेटी बनी। आजादी के बाद प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सार्वजनिक स्वास्थ सेवाओं पर प्राथमिकता से काम शुरू किया। 1951 की जनगणना बताती है कि 1950 में देश में सिर्फ 50 हजार डॉक्टर और छोटे बड़े 725 अस्पताल थे। देश की कुल 18.33 फीसदी आबादी ही साक्षर थी। हमारी पिछली सरकारों के प्रयासों का नतीजा है कि 70 साल में हमारे देश की 74 फीसदी आबादी साक्षर है। 1947 में भारत की जीडीपी 2.7 लाख करोड़ रुपये थी, जो विश्व का तीन फीसदी थी। सांख्यकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2018 में भारत की जीडीपी 147.79 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुकी थी, जो विश्व का 7.74 फीसदी है। भारत में अधिकृत डॉक्टरों की संख्या करीब 12 लाख 56 हजार है। सरकारी क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ केंद्र से लेकर बड़े अस्पतालों, जिनमें सेना और रेलवे के अस्पताल भी शामिल हैं, कुल 32 हजार हैं। निजी क्षेत्र में 70 हजार अस्पताल हैं। देश की आजादी के 70 सालों में जो अस्पताल बने, आज वही हमारी जान बचा रहे हैं। कोविड-19 महामारी को हमारे देश की सरकार ने पहले न गंभीरता से लिया और न ही जरूरी इंतजाम किये। नतीजतन, आज विश्व में हम रोजाना बढ़ते मामलों में 4 लाख केसेज के साथ सबसे ऊपर हैं। हमारे अपने हर रोज बेड, आक्सीजन और दवाओं के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। उधर, वैक्सीनेशन के धंधे में कमाई का काम चल रहा है। अस्पतालों से लेकर सड़कों तक कालाबाजारी का हाल यह है कि परिजनों की जान बचाने के लिए लखनऊ में आक्सीजन सिलेंडर 35 से 50 हजार का मिल रहा है। सरकार ने आत्मनिर्भर बनाने के नाम पर हमें “राम” भरोसे छोड़ दिया है। एक वक्त था, जब हमारा देश संकट के समय तमाम देशों की मदद करता था। आज हम उन्हीं के आगे झोली फैलाकर मदद मांग रहे हैं। मदद देने वाले देशों में भूटान जैसे सबसे गरीब देश भी शामिल हैं। हमारी सरकार ने इस महामारी के सवा साल में न अपनी गलतियां सुधारीं और न प्राथमिकताएं तय कीं। वह आपदा में अवसर खोजते हुए ऐश ओ आराम के मेगा प्रोजेक्ट पास करती रही। सैन्य हथियार खरीदने की होड़ लग गई। सार्वजनिक स्वास्थ सेवाओं को मजबूत नहीं बनाया। किसान अपने हक के लिए पिछले छह माह से आंदोलनरत हैं मगर आपदा में अवसर देखते पूंजीपतियों के हित में कृषि कानूनों में बदलाव कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट सहित दूसरी अदालतें महामारी के डर से पिछले एक साल से न्याय को अपने घरों में कैद किये हैं। वो संविधान में मिले, नागरिक अधिकारों की संरक्षक हैं मगर उसके लिए सरकार से बोलने को तैयार नहीं। वह मेडिकल इमरजेंसी की बात करती है, लेकिन हक दिलाने में डरती हैं। सत्ता के हक में फैसले देने को तत्काल प्रकट हो जाती हैं मगर नागरिकों के लिए नहीं। दूसरी संवैधानिक संस्थायें भी अपने कर्तव्य नहीं निभातीं। वो सरकार की ढाल बनकर नागरिकों के ही सामने खड़ी हो जाती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के विपरीत हरिद्वार और मथुरा कुंभ आयोजित होता है। देश को चुनाव के नाम पर महामारी के जाल में झोंक दिया जाता है। चुनाव जीतना प्राथमिकता है, वोट देने वाला नागरिक नहीं। कोविड संक्रमण का यह बड़ा कारण बना है। देश की स्वास्थ सेवाओं और व्यवस्थाओं पर सरकार के स्तर पर कोरा झूठ बोला जा रहा है। नतीजतन, लाखों परिवारों में मातम छाया है। करोड़ों परिवार अस्पतालों के धक्के खा रहे हैं। आज करीब 40 लाख एक्टिव केसेज हैं। करीब इतने ही लोग अपनी जांच रिपोर्ट के इंतजार में हैं। हमारे देश में निजी और सरकारी अस्पतालों में सिर्फ 19 लाख बेड हैं। जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा को छोड़कर बाकी किसी राज्य में सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी अस्पताल अधिक हैं। मरते मरीजों के कारण अंतिम संस्कार के लिए भी 10 से 20 घंटे की वेटिंग है। यहां भी आपदा में अवसर तलाशते लोग 20 हजार से 50 हजार सुविधा शुल्क लेकर अंतिम संस्कार कर रहे हैं। दवाओं से लेकर जीवनरक्षक सामान तक की कालाबाजारी हो रही है। हालात और हकीकत देखने से, यही लगता है कि जिस सरकार को हमने बड़ी उम्मीदों से चुना था, उसे नागरिकों के जीवन से कोई सरोकार नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों के स्वास्थ बजट इसका प्रमाण हैं। राज्य और केंद्र का स्वास्थ बजट मिलाकर करीब ढाई लाख करोड़ का है। इसमें डेढ़ लाख करोड़ रुपये पेंशन, वेतन, भत्तों और अन्य खर्चे में खप जाता है। सेहत के लिए सिर्फ एक लाख करोड़ रुपये बचता है। यह सब देखकर भी हम मौन हैं। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के भतीजे ने प्रधानमंत्री को कड़ी चिट्ठी लिखी, तो बरेली के मृत भाजपा विधायक के पुत्र ने यूपी के सीएम को पत्र लिख हकीकत बयां की। लोग दलीय भक्ति में अपनों को मरते देख रो रहे हैं। अगर यही नया भारत है, तो निश्चित रूप से देश का भविष्य अंधकारमय है। ऐसे में हम रोएं, शर्म करें या लानत दें, मगर किसे? सरकार को, आपको या खुद को! क्योंकि यह व्यवस्था और सरकार हमने ही तो बनाई है। जय हिंद! (लेखक प्रधान संपादक हैं।) ajay.shukla@itvnetwork.com

corona

Finish the question and collapse the system! सवाल खत्म और व्यवस्था ध्वस्त!

सुप्रीम कोर्ट परिसर में 7 जनवरी 2020 को वहां के वकीलों के एक समूह ने सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना पढ़कर देश की सर्वोच्च अदालत को संविधान की याद....

dharm

religion! Humanity is there, not poison! धर्म! मानवता है, जहर नहीं!

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम, वतन है हिंदोस्तां हमारा। बचपन के दिनों में स्कूल से लेकर घर तक, हम अल्लामा इकबाल का यह गीत मस्ती के साथ गुनगुनाते....

mamata modi

Breaking the limits are Sad for all of us ! मर्यादाएं टूटना हम सभी के लिए दुखद!

अयोध्या में राममंदिर के लिए भूमि की अदालती लड़ाई जीतने के बाद वहां मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हम जब राम मंदिर बनाने की बात करते हैं, तो....

media newspaper

Lies will put an end to all of us! झूठ हम सभी को खत्म कर देगा!

एडाल्फ हिटलर के प्रचार मंत्री जोसेफ़ गोयबल्स ने कहा था कि किसी झूठ को इतनी बार बोलो कि वह सच बन जाये। सभी उसी पर यक़ीन करने लगें। नाजियों के....

loktantre

Do not kill the soul of democracy! लोकतंत्र की आत्मा को मत मारिये!

चंद दिन पहले हम अपने एक संपादक मित्र से मिले। उन्होंने हमसे सत्ता के कुछ फैसलों को लेकर चर्चा करते हुए कहा कि 70 साल में इस तरह हिम्मत कोई....

hate

Our Country seeping in poison of pollution : प्रदूषण से जहरीला होता हमारा देश!

एक वक्त था हम कहते थे, “सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा”। अब हालात इतर हैं। देश की आवोहवा बेहद जहरीली हो चुकी है। जो हमें तिल तिल कर मार रही....

gandhi dandimarch

Gandhi’s Dandi March was the foundation of democracy: लोकतंत्र की नींव था गांधी का दांडी मार्च

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबरमती आश्रम से महात्मा गांधी के दांडी मार्च के 91 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव की शुरूआत की। उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई, मंगल पांडे, तात्या टोपे, महात्मा गांधी, सुभाष....

pm modi

Stop blaming, be self reliant! दोष देना बंद कीजिए, आत्मनिर्भर बनये!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि बिजनेस करना सरकार का काम नहीं है। उनकी सरकार रणनीतिक क्षेत्र में कुछ सीमित सरकारी उपक्रमों को छोड़कर बाकी सभी सरकारी कंपनियों....

pm modi

Now we too will remain silent ..! अब हम भी मौन ही रहेंगे..!

मेरी बड़ी बेटी के जन्म के समय ही पिताजी ने अदिति के नाम से संबोधित किया। नामकरण संस्कार का वक्त आया, तो कुछ अन्य नाम सामने आए मगर हमने पिछले नाम....

parliament 1-min

yah tamaashebaajee band honee chaahie! यह तमाशेबाजी बंद होनी चाहिए!   

बचपन में पिताजी हमें रामचरित मानस की कथा चौपाइयां सुनाते थे। उन्होंने हमें बताया, कि जब एक विद्वान जो महापंडित भी है, रावण, अभिमानी राजा बन जाता है, तब सभी....

Police install iron nails as security tightens at Ghazipur Border

Nails are not on the road but on our chest! कीलें सड़क पर नहीं हमारी छाती पर ठुकीं हैं!

पॉपस्टार रिहाना ने सीएनएन के एक लेख पर टिप्पणी करते हुए किसान आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘हम किसानों के आंदोलन के बारे में बात क्यों नहीं कर....

kisan andolan

Hey Ram! हे राम!

नई दिल्ली के बिड़ला हाउस में 30 जनवरी 1948 की मनहूस शाम 5 बजकर 10 मिनट पर 79 साल के एक बुजुर्ग महात्मा की तीन गोलियां मारकर हत्या कर दी....

Indira Gandhi

Indira’s Emergency was a tonic for democracy! लोकतंत्र के लिए टॉनिक था इंदिरा का आपातकाल!

बुधवार की रात तमाम आशंकाओं के बीच विश्व की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक धरती पर जो बाइडेन ने 46वें राष्ट्रपति और कमला देवी हैरिस ने उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। लगभग....

We will sow, reap and sell crops, not brokers! : हम ही फसल बोएंगे, काटेंगे और बेचेंगे, दलाल नहीं!

We will sow, reap and sell crops, not brokers! : हम ही फसल बोएंगे, काटेंगे और बेचेंगे, दलाल नहीं!

हम न तो अदालत जाएंगे और न ही उनकी बनाई कमेटी से बात करेंगे। हमने जो सरकार चुनी है, यह उसका काम है। हम उसी से बात करेंगे और मांगें मनवाएंगे।....

america

The paths to the beautiful destination should also be pleasant! खूबसूरत मंजिल के रास्ते भी सुखद होने चाहिए!

देश, कैपिटल हिल या सेंट्रल विस्टा से खूबसूरत नहीं बनता है। देश खूबसूरत बनता है, जब वहां की आवाम सुखद और नैतिक जीवन जीती है। राजनेता वह महान होता है, जो मानवता को....

farmers

Annadata crushed in politics of hate! घृणा की राजनीति में पिसता अन्नदाता!                                

विषाक्त माहौल में नववर्ष 2021 का आगाज हुआ है। दिल्ली सीमा पर देशवासियों के लिए अपनी ही सरकार से न्याय मांगने बैठे एक और किसान ने आज आत्महत्या कर ली।....

modi amit

Leave the dogma, this movement is not a sacrifice! हठधर्मिता छोड़िये, यह आंदोलन नहीं यज्ञ है!

चंडीगढ़ में रेस्टोरेंट संचालन करने वाले एक मित्र मिले, बोले भाई साहब किसान आंदोलन में जा रहा हूं। हमें अचरज हुआ, वह तो किसान नहीं हैं। वह बोले, किसानों के लिए खाने-पीने का....

kisan

Don’t poison, find a solution! जहर मत बीजिये, समाधान निकालिये!

संत बाबा राम सिंह ने गोली मारकर खुदकुशी कर ली। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा, ''किसानों का दुख देखा नहीं जा रहा है। अपने हक के लिए सड़कों पर किसानों....

kisan

Come with farmers to save democracy: लोकतंत्र बचाने के लिए किसानों के साथ आइये

तुम से पहले वो जो इक शख्स यहां तख्त नशीं था, उस को भी अपने खुदा होने पे इतना ही यकीं था। पाकिस्तानी शायर हबीब जालिब का यह शेर आज भी....

farmer protest

Politics of character abuses is fatal for the country! चरित्र हनन की सियासत देश के लिए घातक!

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का जब पंजाब के किसानों ने विरोध शुरू किया, तो यह प्रचारित किया जाने लगा कि यह पाकिस्तान पोषित है। यह फैलाया गया कि....

Kisan (1)

Answer Annadata’s questions, not sticks! अन्नदाता के सवालों का जवाब दीजिए, लाठी नहीं! 

जो सेहत देता दूजों को, खतरे में उसकी जान है क्यों। सबकी पूरी करे जरूरत, अधूरे उसके अरमान हैं क्यों। पूरा मूल्य मिले मेहनत का, बस इतनी ही तो उसकी चाहत है। उस....

democracy indian

Democracy has become a store of politics! राजनीति की दुकान बन गया लोकतंत्र!

हमारे मित्र दिनेश भट्ट उन दिनों तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी थे। उन्होंने खुफिया रिपोर्ट के आधार पर श्रीमती गांधी की सुरक्षा में लगे सिख जवानों को....

congress-min(3)

Repeated mistakes will end Congress: बार-बार गलतियां खत्म कर देंगी कांग्रेस को !

बिहार का विधानसभा चुनाव बदलाव की बयार के बीच लड़ा गया। इस चुनाव में विपक्षी दलों ने कई मुद्दे खड़े किये। गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, कुपोषण, भ्रष्टाचार और बदहाल स्वास्थ एवं....

biden trump

jhooth-prapanch se badalaav chaahata lokatantr! झूठ-प्रपंच से बदलाव चाहता लोकतंत्र!

हम जब छोटे थे, तब ट्रकों के पीछे लिखे स्लोगन पढ़ने की आदत थी। कई ट्रकों पर लिखा होता था “झूठे का मुंह काला, सच्चे का बोलबाला”। इस पर हम चर्चा करते, तो हमारे....

MODI

The reason for the destruction of the country is a lie! देश की बरबादी का कारण झूठ!

वक्त सच और झूठ को पहचाने का है, क्योंकि झूठ ने हमारा इतना कुछ छीना है कि हम बरबादी के मुकाम पर आ गये हैं। ऐसे में गोपाल दास नीरज की कुछ पंक्तियां “किया....

election

If you cannot give rights, do not do injustice! हक नहीं दे सकते तो नाइंसाफी मत करिए!

अगर मुमकिन हुआ होता, बुझा कर रख लिया होता, अमीरों ने कहीं सूरज छुपा कर रख लिया होता! हमारे मित्र अशोक रावत की ये पंक्तियां मौजूं हकीकत बयां करती हैं। हमारे देश में....

Bhagat singh

The atmosphere of hate is fatal for everyone! नफरत का माहौल सभी के लिए घातक!

उन दिनों कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे और राजनाथ सिंह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष। गोविंदाचार्य संगठन मंत्री थे। भगत सिंह कोश्यारी एमएलसी थे, चुनाव नहीं जीत पाये थे, तो....

child-rape-7

Our soul is probably stoned! हमारी आत्मा पथरा गई है शायद!

कश्मीर में जब तीन निर्दोष किशोरों को खूंखार आतंकी बताकर हमारी सेना मार डालती है, तब भी हम उसके जयकारे लगाते हैं। कानपुर पुलिस विकास दुबे के भतीजे अमर को नाटकीय....

hathras police

When will you be ashamed sir! आपको लज्जा कब आएगी श्रीमान!

उत्तर प्रदेश पुलिस बड़ी शान से अपना परिचय लिखती है “करीब 243286 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले और लगभग 20 करोड़ (2011 की जनगणना के मुताबिक) से ज्यादा जनसंख्या के साथ, उत्तर प्रदेश पुलिस को न केवल....

25 amb 9

More trouble for you than farmer! किसान से अधिक आपके लिए संकट!

कोरोना का प्रकोप शुरू हुआ तो लाखों कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कुछ ने वेतन में कटौती कर दी। क्या इससे समस्या का समाधान हुआ, नहीं। यह....

china india

China’s growing dominance in Asia is a crisis for India! एशिया में चीन का बढ़ता प्रभुत्व भारत के लिए संकट!

पिछली दिवाली के दौरान हम श्रीलंका में थे। वहां के बाजार चीनी उत्पादों से पटे पड़े थे। वहां की सबसे बड़ी सड़क जो चीन के दो सिरों को जोड़ती है,....

religan unity

The future of the country in the way of darkness! अंधकार की राह में देश का भविष्य!

जो बात कहते डरते हैं सब, तू वो बात लिख, इतनी अंधेरी थी ना कभी पहले रात, लिख। जिनसे क़सीदे लिखे थे, वो फेंक दे क़लम, फिर खून-ए-दिल से सच्चे कलाम की सिफ़त लिख। मुखर....

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Modi’s power increased due to opposition’s failure: विपक्ष की नाकामी से बढ़ी मोदी की ताकत

रहनुमाओं की अदाओं पे फिदा है दुनिया, इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारों। दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां आज बहुत कुछ कहती हैं, जिसको हम समय रहते समझ सकें,....

ajay shukla ji

आज़ादी के 73 साल बाद भी असुरक्षित क्यों?

-अजय शुक्ल उम्मीद की जाती थी कि अंग्रेजी हुकूमत से आजाद होने के बाद भारत में एक नया सवेरा होगा। गंगा-जमुनी तहजीब वाले देश में हम प्यार-मोहब्बत से आगे बढ़ेंगे।....

ajay shukla ji

नायक बनिये, मुनाफाखोर नहीं!

  अजय शुक्ल महात्मा गांधी के आह्वान पर देश भर में विदेशी कपड़ों की होली जलाई जा रही थी। ब्रिटिश युवक जैसा दिखता एक शख्स आया और उसने अपने कीमती....

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The situation will be frightening due to the poor economy! बेहाल अर्थव्यवस्था से भयावह होंगे हालात!

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक की समीक्षा रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी मान लिया कि मौजूदा वित्तीय वर्ष (2020-21) में जीडीपी....

money

Aandhi se koi kahe de aukat mai rahe! आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहें!

राहत इंदौरी की यह पंक्ति दरबारी नहीं बल्कि जिंदा होने का सबूत है मगर आज इसे पसंद नहीं किया जाता है। देश की आजादी का महीना है, तो निश्चित रूप से....

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Make policies in public interest, not for agenda: एजेंडे के लिए नहीं, जनहित में बनें नीतियां 

चीन लद्दाख में हमारी सीमा में आठ किमी अंदर तक काबिज है। बैठकों के कई दौर के बाद भी वह चंद कदम पीछे हटकर जम गया है। चीन को फिंगर....

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Rajdharma or just power and then power! राजधर्म या सिर्फ सत्ता और फिर सत्ता!

हम लुटियंस जोन के एक बंगले में थे, वहां किसी ने कहा सचिन पायलट के साथ गलत हो रहा है। दूसरे ने कहा गलत क्या है, उसने दगा किया है। गद्दार को....

vikas dubey1

Constitutional guardians are becoming only murderers: संवैधानिक संरक्षक ही बन रहे कातिल!

यूपी पुलिस के आईजीपी अमिताभ ठाकुर ने 9 जुलाई को ट्वीटर पर लिखा था। विकास दुबे का सरेंडर हो गया। हो सकता है कल वह यूपी पुलिस की कस्टडी से....

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Meechahu aankh kathu kachu nahi : मीचहूं आंख कतऊं कछु नाहीं!

मेकमोहन रेखा पर चीनी हलचल तेज हो चुकी है। चीनी सैनिक लगातार सीमा पर हमारी भूमि पर घुसपैठ और विस्तारीकरण में जुटे हैं। लद्दाख की गालवान घाटी में चीनी सैनिकों....

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Necessary to manage your intellectual property: अपनी बौद्धिक संपदा को संभालना जरूरी

सनातन धर्म में स्पष्ट है कि लक्ष्मी तब फलित होती हैं, जब वह गणेश के साथ होती हैं। यही कारण है कि किसी भी अच्छी शुरुआत को “श्रीगणेश करो” कहकर संबोधित करते हैं।....

galwan ghati

At some time, keep the trust! कभी तो भरोसे को कायम रखिये!

सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस। राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास।। रामचरित मानस में तुलसीदास ने इन पंक्तियों के माध्यम से राजधर्म को समझाने....

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Ask your conscience, will feel shame on yourself! अंतरात्मा से पूछिए, खुद पर शर्म आएगी!

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाया, जो मंगलकारी बन गया। अदालत ने कहा कि सरकार 15 दिन में प्रवासी मजदूरों को उनके घरों में पहुंचाने का इंतजाम....

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The world needs a ‘Statesman’! विश्व को ‘स्टेट्समैन’ की जरूरत है!

कोविड-19 वैश्विक संकट है, जिससे लड़ते वक्त विश्व में स्टेट्समैन लीडरशिप का अभाव दिखा। अमरीका के मिनेसोटा राज्य में पुलिसकर्मी ने निहत्थे अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ़्लॉयड की गर्दन इस तरह से घुटनों में....

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We are not sitting to talk to you! हम आपकी बात करने नही बैठे हैं!

हमारे न्यूजबाक्स में मुंबई ब्यूरो से एक खबर आई कि सीसी टीवी में रोटी चोरी करने की एक घटना कैद हुई है। चोर ताला तोड़कर अंदर जाता है। वह कोई....

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Because speaking the truth is not allowed! क्योंकि सच बोलना मना है!

वो पैदल चले जा रहे थे। पांव में छाले थे, खून भी निकल आया था। महिलाएं कभी पल्लू संभालतीं तो कभी अपने बच्चे और सिर पर लदी गठरी को। पसीना....

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Don’t play with our pain, sir! हमारे दर्द से मत खेलिये साहब!

रात के पौने तीन बजे थे। उसके सिर पर एक प्लास्टिक की बोरी लदी थी, जिसमें उसकी पूरी गृहस्थी थी। एक हाथ में झोला और दूसरे हाथ में पानी की....

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We have nothing for you! हमारे पास आपके लिए कुछ नहीं है!

“हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को, न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास,....

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Time to learn creatively from mistakes: गलतियों से सीख रचनात्मक करने का समय

हमारे बचपन का बड़ा हिस्सा कानपुर में गुजरा। हम संयुक्त परिवार में दर्शनपुरवा वाले घर में रहा करते थे। जीटी रोड के दूसरी तरफ श्रीरामकृष्ण मिशन आश्रम था, जहां बड़े....

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This way, you cannot become superior! यूं तो श्रेष्ठ नहीं बन सकते!

पवित्र रमजान माह की शुरुआत हो चुकी है। कुरान पाक कहती है कि यह दुआ का समय है। अपने दुश्मन के लिए भी बद-दुआ नहीं करनी चाहिए। सब्र और रोजा....

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Be prepared to face terrible situations! भयावह हालात से जूझने को तैयार रहें!

देर रात तक काम करते सो गया, सुबह एक मित्र की काल से नींद खुली। उसने बताया कि मीडिया उद्योग में खर्च कम करने की होड़ लग गई है। कई....

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Correct ur Mistakes Be Creative, Not Nerative! गलतियां सुधार क्रिएटिव बनें, नेरेटिव नहीं!

तेरे हिस्से का भी फर्ज निभाना पड़ता है, तू जो चुप है, तभी हमें चिल्लाना पड़ता है। किसी की यह पंक्तियां हमें आइना दिखाती हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन....

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It is shameful to make crisis an event! संकट की घड़ी को भी इवेंट बनाना शर्मनाक!

खबर आई कि इंदौर में कोरोना संक्रमितों की जांच के लिए गई डा. जाकिया सईद और डा. तृप्ति की टीम पर हमला कर दिया गया। हैदराबाद में डाक्टरों को पीटा....

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Is this the time to live only for yourself? यह वक्त क्या सिर्फ अपने लिए जीने का है?

हम टीम के साथ खबरों की प्राथमिकता पर चर्चा कर रहे थे। एक खबर थी कि कोरोना के इलाज में लगे डाक्टर को उसके मकान मालिक ने घर से निकल....

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Personalities to institutions, affected with “virus” ! व्यक्तित्व से संस्थाएं तक “वायरस” ग्रसित!

हम एक सप्ताह से दिल्ली में थे, जहां जाओ वायरस की चर्चा हो रही थी। सोमवार को अचानक न्यायपालिका में एक वायरस निकलने की खबर आई। देश के सर्वोच्च न्याय....