US-Iran War Update : खाड़ी देशों पर हमला करना हमारी मजबूरी : इलाही

0
208
US-Iran War Update : खाड़ी देशों पर हमला करना हमारी मजबूरी : इलाही
US-Iran War Update : खाड़ी देशों पर हमला करना हमारी मजबूरी : इलाही

कहा, ईरान ने आत्मरक्षा के लिए उठाया कदम, अमेरिका समर्थित ठिकानों से हमलों को रोकना प्राथमिकता

US-Iran War Update (आज समाज), नई दिल्ली : ईरान द्वारा खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए जा रहे हमलों पर बड़ा बयान दिया है। ईरान ने इन हमलों को अपनी मजबूरी बताया है और इसे आत्मरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों में से एक बताया है। इस बारे में बात करते हुए भारत में ईरानी सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, ईरान ने आत्मरक्षा के उपायों के तहत यह कदम उठाया, ताकि अमेरिका समर्थित ठिकानों से हमलों को रोका जा सके।

इलाही ने ट्रंप के इस दावे को पूरी तरह नकार दिया कि संघर्ष बढ़ने के बीच ईरान ने वाशिंगटन के साथ वार्ता करने को तैयार होने की बात कही हैं। खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने को ईरान की मजबूरी बताते हुए कहा कि ईरान ने भले ही युद्ध शुरू नहीं किया, पर अपनी गरिमा और भूमि के लिए सबकुछ कुर्बान कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने का सवाल ही नहीं है। जरूरत पड़ी तो ईरान पांच साल तक जंग लड़ने को भी तैयार है।

अमेरिका ने करीब 45 सैन्य अड्डे बना रखे

इलाही ने कहा कि खाड़ी देशों में अमेरिका समर्थित ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल तेहरान के खिलाफ किया जा रहा था। अमेरिका ने ईरान के आसपास 33 से 45 सैन्य अड्डे बना रखे हैं। तेहरान ने पड़ोसियों से अनुरोध किया था कि वे अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमले के लिए इनका इस्तेमाल न होने दें, लेकिन हमले जारी रहे।

ऊर्जा संकट से लोगों को हो रही दिक्कत से हम खुश नहीं

इलाही ने कहा कि पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के कारण ऊर्जा संकट उत्पन्न होने से लोगों को गैस, पेट्रोल, तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि लोगों को पीड़ा हो रही है और इस स्थिति से कोई खुशी नहीं हो रही। लेकिन हमें अपनी रक्षा करनी होगी। हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। उन्होंने वैश्विक नेताओं से अमेरिका पर युद्ध रोकने के लिए दबाव डालने का आग्रह किया।

हम खून बहाने के लिए तैयार लेकिन जमीन देने के लिए नहीं

उन्होंने दो टूक कहा, इसका सवाल ही नहीं उठता। हम अपना खून बहाने को तैयार हैं लेकिन उन्हें अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। ईरान इस समय अमेरिका से बातचीत नहीं करना चाहता क्योंकि उसने ही यह युद्ध शुरू किया है। और हमें उनके साथ अनुभव है। दो बार हम उनके साथ बातचीत कर रहे थे, और उन्होंने हम पर हमला किया। उन्होंने हमें निशाना बनाया।

ये भी पढ़ें : West Asia Crisis : फारस की खाड़ी में तैनात हुई भारतीय नौसेना