ज्यादात्तर स्थानों पर 400 से ऊपर पहुंचा एक्यूआई, अभी नहीं है राहत की उम्मीद

Delhi Pollution News (आज समाज), नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली इस समय वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। पिछले लगभग डेढ़ माह से राजधानी में प्रदूषण की समस्या जस की तस बनी हुई है बल्कि यह दिन प्रतिदिन और भी ज्यादा गहराती जा रही है। दिल्ली सरकार के लाख प्रयास के बावजूद भी इस समस्या का हल नहीं मिल पा रहा है। हालात यह हैं कि दिल्ली में लगभग एक दर्ज जगह पर एक्यूआई 400 से ऊपर या फिर इसके आसपास बना हुआ है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि निकट भविष्य में ऐसी कोई प्राकृतिक गतिविधियों की संभावना नहीं है जिससे यह उम्मीद की जा सके कि प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी।

रिपोर्ट ने लोगों को चिंता में डाला

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है कि दिल्ली- एनसीआर और सिंधु-गंगा के मैदानी इलाके में छाया भीषण वायु प्रदूषण अब सिर्फ धुंध या धुएं का मामला नहीं है, बल्कि यह वायुमंडल में तेजी से चल रही रासायनिक प्रतिक्रियाओं का परिणाम है, जो हवा को सामान्य प्रदूषण से कहीं अधिक जानलेवा बना रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद सल्फर, अमोनिया, नाइट्रोजन आॅक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) आपस में मिलकर ओजोन, अमोनियम सल्फेट और अमोनियम नाइट्रेट जैसे अत्यंत विषैले यौगिक बनाते हैं, जो बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा रोगियों और हृदय रोगियों पर सीधे प्रहार करते हैं।

प्रो. कैथरीन की रिपोर्ट चर्चा का विषय

हार्वर्ड स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ के एयर-केमिस्ट्री और अर्बन पॉल्यूशन रिसर्च प्रोग्राम में लीड साइंटिस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहीं प्रो. कैथरीन हेलेन का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा सिर्फ प्रदूषित ही नहीं रासायनिक रूप से भी सक्रिय है। यह ऐसी प्रतिक्रियाएं चला रही है जो साइलेंट केमिकल टॉक्सिन्स पैदा करती हैं और सबसे खतरनाक बात यह है कि ये खुली आंखों से दिखाई नहीं देतीं। प्रो. कैथरीन दुनिया के उन वैज्ञानिकों में मानी जाती हैं जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनने वाले प्रदूषण (केमिकली एक्टिव एयर पॉल्यूशन) और उसके फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क पर प्रभाव पर दीर्घकालिक अध्ययन कर रही हैं।

इस तरह से मानव शरीर के लिए घातक

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के एयर क्वालिटी साइंस डिवीजन में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एंड्रयू पार्क के अनुसार ग्राउंड-लेवल ओजोन, उत्तर भारत की सबसे कम चर्चा की गई लेकिन सबसे घातक समस्या है। यह फेफड़ों की कोशिकाओं को जला देती है और इसका नुकसान शरीर वापस ठीक नहीं कर पाता। वैज्ञानिक कहते हैं, दिल्ली- एनसीआर और सिंधु-गंगा के मैदान में हवा सिर्फ प्रदूषित नहीं, तेज रासायनिक परिवर्तन की अवस्था में है।

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