India AI Impact Summit-2026, (आज समाज), नई दिल्ली: दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026’ का आज पांचवां और आखिरी दिन है और आज भी वर्ल्ड लीडर कार्यक्रम में मौजूद लोगों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल के तरीके व इसके फायदों पर बातचीत कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए इंटरनेशनल ( international) एआई गवर्नेंस (AI governance) में साइंस की भूमिका पर अपने विचार रखे।
आज इंटरनेशनल कोआपरेशन मुश्किल
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने दुनिया की भलाई के लिए एआई का इस्तेमाल व इंसानियत के सामने आने वाली चुनौतियों को कम करने की अपील की है। यूएन महासचिवच ने कहा, आज इंटरनेशनल कोआपरेशन मुश्किल है, भरोसा कम हो गया है और टेक्नोलॉजिकल मुकाबला बढ़ रहा है, इसलिए देशों को एक साथ आकर लोगों को तैयार करने, उनकी सुरक्षा करने और उनमें इन्वेस्ट करने की अपील की।
इनोवेशन रोशनी की स्पीड से आगे बढ़ रहा एआई
गुटेरेस ने कहा, हम अनजान में जा रहे हैं। एआई इनोवेशन रोशनी की स्पीड से आगे बढ़ रहा है। अगर हम चाहते हैं कि एआई इंसानियत की सेवा करे, तो पॉलिसी अंदाजे पर नहीं बन सकती। यह हाइप या गलत जानकारी पर नहीं बन सकती। उन्होंने कहा, हमें ऐसे फैक्ट्स चाहिए जिन पर हम भरोसा कर सकें और जिन्हें हम देशों और सेक्टरों में शेयर कर सकें। शोर कम और जानकारी ज्यादा होनी चाहिए।
एआई के बारे में UN के कदमों पर दिया जोर
गुटेरेस ने हाल ही में बने एआई पैनल का जिक्र करते हुए एआई के बारे में UN के उठाए गए कदमों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, यूनाइटेड नेशंस एक प्रैक्टिकल आर्किटेक्चर बना रहा है जो साइंस को एआई पर इंटरनेशनल कोआॅपरेशन के सेंटर में रखता है और इसकी शुरुआत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल साइंटिफिक पैनल से होती है। यह पैनल एआई नॉलेज गैप को कम करने और इकोनॉमी और सोसाइटी में एआई के असली असर का पता लगाने में मदद करने के लिए बनाया गया है ताकि एआई कैपेसिटी के हर लेवल पर देश एक ही क्लैरिटी के साथ काम कर सकें। यह पूरी तरह से इंडिपेंडेंट है, यह ग्लोबली डायवर्स है और यह मल्टीडिसिप्लिनरी है क्योंकि एआईहर सोसाइटी के हर एरिया को छूता है।
एआई गवर्नेंस पर असली काम जुलाई में
यूएन महासचिव ने कहा, मुझे खुशी है कि संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली ने उन 40 विशेषज्ञों को कन्फर्म किया जिन्हें मैंने मेंबर स्टेट्स को प्रपोज किया था। अब असली काम जुलाई में एआई गवर्नेंस पर ग्लोबल डायलॉग से पहले पहली रिपोर्ट देने के लिए फास्ट ट्रैक पर शुरू होता है। पैनल एनालिसिस का एक शेयर्ड बेसलाइन देगा, जिससे मेंबर स्टेट्स को फिलॉसॉफिकल डिबेट से टेक्निकल कोआॅर्डिनेशन की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी और सबूतों में चॉइस को एंकर करने में मदद मिलेगी।
साइंस-लेड गवर्नेंस, सॉल्यूशन, एक्सेलरेटर
गुटेरेस ने साइंस-लेड गवर्नेंस को सॉल्यूशन के लिए एक एक्सेलरेटर और प्रोग्रेस को सुरक्षित, फेयर और ज्यादा शेयर्ड बनाने का एक तरीका बताया। इससे हमें यह पहचानने में मदद मिलती है कि अक सबसे तेजी से कहाँ सबसे ज्यादा फायदा कर सकता है। और यह हमें बच्चों के लिए रिस्क से लेकर लेबर मार्केट और बड़े पैमाने पर मैनिपुलेशन तक के असर का पहले से अंदाजा लगाने में मदद करता है। ताकि देश लोगों के लिए तैयारी कर सकें, उनकी सुरक्षा कर सकें और उनमें इन्वेस्ट कर सकें।
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