Bathing Rules: कितने बजे के बाद नहाना माना जाता है राक्षसी स्नान? जान लें नहाने से जुड़े नियम

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Bathing Rules: कितने बजे के बाद नहाना माना जाता है राक्षसी स्नान? जान लें नहाने से जुड़े नियम
Bathing Rules: कितने बजे के बाद नहाना माना जाता है राक्षसी स्नान? जान लें नहाने से जुड़े नियम

सनातन धर्म शास्त्रों में बताए गए हैं इंसान की दिनचर्या संबंधी नियम
Bathing Rules, (आज समाज), नई दिल्ली: हमारे सनातन धर्म शास्त्रों में इंसान के दिन की सारी दिनचर्या और नियम बताए गए हैं। शास्त्रों में सुबह उठने से लेकर नहाने तक के सभी नियम बताए गए हैं। इन नियमों के पालन से जीवन खुशहाल बन जाता है। पहले के समय लोग सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लिया करते थे। वहीं आज का समय देखें तो अब स्नान का कोई निश्चित समय नहीं रह गया है।

जिसका जब नहाने का मन करता है, तब वो नहा लेता है, लेकिन क्या जानते हैं शास्त्रों में स्नान के नियम बताए जाने के साथ-साथ ये भी बताया गया है कि सही समय पर न किया स्नान इंसान के जीवन में परेशानियों का कारण बन सकता है। इसके विपरीत शुभ समय पर किए गए स्नान से जीवन कई प्रकार से बदल जाता है। स्नान का एक समय तो राक्षसी भी माना जाता है। आइए जानते हैं वो समय कौन सा है? साथ ही जानते हैं स्नान के नियम।

स्नान के प्रकार

  • मुनि स्नान: शास्त्रों में मुनि स्नान को सर्वोत्तम माना गया है। सुबह 4 से 5 बजे के बीच का स्नान मुनि स्नान कहा जाता है। ये ब्रह्म मुहूर्त का समय होता है। इस समय में किया गया स्नान स्नान बुद्धि, आरोग्य और मानसिक शांति देता है। साथ ही जीवन में सुख-शांति आती है।
  • देव स्नान: सुबह 5 से 6 बजे के बीच किया गया स्नान देव स्नान माना जाता है। ये उत्तम स्नान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय नहाने से यश, धन और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इस दौरान पावन नदियों को याद करते हुए स्नान करने से विशेष लाभ मिलता है।
  • मानव स्नान: ये औसत स्नान माना जाता है. ये स्नान गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए होता है। जो स्नान सुबह 6 से 8 बजे के बीच किया जाता है उसको मानव स्नान कहा जाता है।
  • राक्षसी स्नान: सुबह 8 बजे के बाद किया गया स्नान राक्षसी स्नान माना गया है। ये स्नान अशुभ होता है। मान्यता है कि इस दौरान नहाने से दरिद्रता घेर लेती है। राक्षसी स्नान करने वालों के जीवन में सदैव तनाव रहता है। ऐसे में इस समय स्नान करने से बचना चाहिए। भोजन करके किया गया स्नान भी राक्षसी स्नान कहा गया है।

स्नान के नियम

कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति के स्नान करने बाद बचे हुए पानी से नहीं नहाएं। कुएं या हैंडपंप पर नहाने जाएं तो पानी स्वयं निकालें। पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें तो नहाने के बाद भूलकर भी अपने कपड़े न धोएं। नहाते समय जल में मूल-मूत्र का त्याग न करें। कभी भी निर्वस्तत्र होकर नहीं नहाएं। कभी भूलकर भी खाना खाने के बाद स्नान नहीं करें।