Vaishakh Purnima: वैशाख पूर्णिमा पर बनेगा खास संयोग

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Vaishakh Purnima: वैशाख पूर्णिमा पर बनेगा खास संयोग
Vaishakh Purnima: वैशाख पूर्णिमा पर बनेगा खास संयोग

इस शुभ समय करें स्नान-दान, खुलेंगे भाग्य के द्वार
Vaishakh Purnima, (आज समाज), नई दिल्ली: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन वैशाख मास की पूर्णिमा का स्थान बहुत ही खास होता है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा का व्रत 1 मई 2026 को रखा जाएगा। इस बार यह तिथि और भी अधिक शुभ मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो साधना, दान और पूजा-पाठ के लिए बहुत ही फलदायी माना जाता है।

सिद्धि योग में बढ़ जाएगा पुण्य फल

पंचांग के अनुसार, इस साल वैशाख पूर्णिमा पर सिद्धि योग सुबह से लेकर रात 9:13 बजे तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सिद्धि योग में किए गए हर शुभ कार्य का फल कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि इस दिन व्रत, जप, तप, ध्यान और दान का महत्व और भी अधिक हो जाता है।

स्वाति नक्षत्र का भी रहेगा प्रभाव

इस दिन स्वाति नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा, जो 2 मई की सुबह 4:35 बजे तक रहेगा। यह नक्षत्र आध्यात्मिक उन्नति, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। ऐसे में साधक और श्रद्धालु इस समय का लाभ उठाकर विशेष पूजा और साधना कर सकते हैं।

किन देवताओं की करें पूजा?

इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन और समृद्धि बढ़ती है। चंद्र देव की आराधना से मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त होता है।

कैसे करें पूजा?

इस दिन सुबह सबसे पहले भगवान का स्मरण करते हुए गंगाजल मिले पानी से स्नान करें। स्नान के दौरान ओम नमो नारायणाय जैसे मंत्रों का जप करने से शरीर के साथ मन भी शुद्ध होता है। इसके बाद साफ और हल्के रंग के, विशेष रूप से पीले या सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

स्नान के बाद पूजा स्थान पर बैठकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। फिर भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करें। तुलसी का विशेष महत्व होता है, इसलिए इसे अवश्य चढ़ाएं।

अगर आपके पास शंख है तो उससे जल अर्पित करना और भी शुभ माना जाता है। शाम के समय इस व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ होता है। जब चंद्रमा उदित हो जाए, तो किसी साफ स्थान पर खड़े होकर तांबे के लोटे में जल, थोड़ा दूध, चावल और फूल डालकर चंद्रदेव को अर्पित करें।

अर्घ्य देते समय अपनी मनोकामना को याद करते हुए सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना करें। इसके बाद व्रत खोलें और फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।

स्नान-दान का विशेष महत्व

  • वैशाख पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र सरोवर में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
  • इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
  • पूर्णिमा की रात को चंद्र देव को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
  • इस दिन सत्तू, जल से भरा घड़ा, फल और वस्त्रों का दान करना अक्षय पुण्य प्रदान करता है।