Fourth Bada Mangal: चौथे बड़े मंगल पर एकादशी से बना दुर्लभ संयोग

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Fourth Bada Mangal: चौथे बड़े मंगल पर एकादशी से बना दुर्लभ संयोग
Fourth Bada Mangal: चौथे बड़े मंगल पर एकादशी से बना दुर्लभ संयोग

सुबह 8 बजे से करें शुभ मुहूर्त में पूजा
Fourth Bada Mangal, (आज समाज), नई दिल्ली: ज्येष्ठ माह के मंगलवार बड़े विशेष और महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस साल ज्येष्ठ में कुल आठ बड़े मंगल पड़ने वाले हैं, जिसमें तीन पड़ चुके हैं और चौथा बड़ा मंगल 26 मई को पड़ रहा है। ये अधिकमास का दूसरा बड़ा मंगल है। बड़े मंगल को बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है। बड़े मंगल के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व धर्म शास्त्रों में बताया है।

इस दिन विधि-विधान से बजरंगबली की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि बड़े मंगल के दिन सच्चे मन से पूजा-पाठ करने पर हनुमान जी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। जीवन के सारे कष्ट और संकट दूर करते हैं। ज्येष्ठ माह का चौथा बड़ा मंगल अति विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन एक दुर्लभ संयोग बन रहा है और वो संयोग है एकादशी का। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से श्रीहरि का व्रत पूजन किया जाता है।

चौथे बड़े मंगल पर एकादशी का शुभ संयोग

चौथे बड़े मंगल यानी 26 मई को ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 26 मई को सुबह 05 बजकर 10 मिनट पर हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 27 मई को सुबह 06 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई को रखा जाएगा, लेकिन एकादशी तिथि का संयोग 26 मई यानी चौथे बड़े मंगल पर मिलेगा। चौथे बड़े मंगल के दिन एकादशी पूर्ण रात्रि तक रहेगी। इस तरह से इस दिन पूजा-पाठ करने से हनुमान जी के साथ-साथ श्री हरि की कृपा भी प्राप्त होगी।

चौथा बड़ा मंगल 2026 पूजा मुहूर्त

चौथे बड़े मंगल पर हनुमान जी की पूजा के लिए शुभ का मुहूर्त 08 बजकर 52 मिनट से दोपहर के 02 बजकर 02 मिनट तक बन रहा है। चौथे बड़े मंगल पर सिद्धि और रवि योग का संयोग भी बन रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस अत्यंत शुभ योग में जो भी काम शुरू किया जाता है उसमें कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती और कार्य अनुकूल परिणाम प्राप्त होता है। मनोकामनाएं जल्द सिद्ध होती है।

बड़े मंगल की पूजा विधि

बड़े मंगल के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर साफ वस्त्र धारण करें। इस दिन लाल या नारंगी रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और हनुमान जी के समक्ष दीपक जलाएं। फिर बजरंगबली को लड्डू, गुड़-चना, केला या नारियल का भोग लगाएं। पूजा के समय हनुमान चालीसा का पाठ करें। बजरंग बाण और हनुमान अष्टक का भी पाठ करें। पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरण करें।