Home ज्योतिष् धर्म When children made Ravana captive to the stables: जब बच्चों ने रावण को बंदी बनाकर अस्तबल में बांध दिया

When children made Ravana captive to the stables: जब बच्चों ने रावण को बंदी बनाकर अस्तबल में बांध दिया

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रावण बहुत ही ज्ञानी और महाप्रतापी था। लेकिन उसका घमंड उसके सर्वनाश का कारण बन गया। रावण केवल श्रीराम के हाथों ही नहीं हारा था बल्कि इससे पहले भी वह 4 बार हार चुका था। जी हां 4 बार जिसमें एक बार तो उसे पाताल लोक के बच्चों ने ही बंदी बना लिया था। यहां जानिए सभी घटनाएं-
बच्चों के सामने बेकार थीं रावण की शक्तियां
रावण ने अपने तप बल से इतनी शक्तियां प्राप्त कर लीं थी कि देवता भी उससे डरते थे। अपनी इन्हीं शक्तियों और तप बल पर घमंड के कारण एक बार रावण पाताल लोक पर अधिकार के विचार से वह अकेला राजा बलि से युद्ध करने चला गया। अपनी शक्तियों के मद में वह यह भूल गया था कि पाताल लोक में किसी अन्य व्यक्ति की मायावी शक्तियां काम नहीं करतीं। जब रावण वहां पहुंचा तो बाहर खेल रहे बच्चे उसे आश्चर्य से देखने लगे। क्योंकि नागलोक का न होने के कारण एक तो वह उन्हें देखने में अजीब लग रहा था, साथ ही वह राजा बलि को युद्ध के लिए ललकार रहा था। ऐसे में बच्चों ने उसे पकड़कर अस्तबल में बांध दिया। जब उसने अपनी शक्तियों का उपयोग करना चाहा तो खुद को असहाय महसूस किया क्योंकि उसकी कोई शक्ति वहां काम नहीं कर रही थी। जब राजा बलि को इस घटना का पता चला तब उन्होंने रावण को बच्चों की कैद से मुक्त कराया।
जब राजा बाली से जा भिड़ा था रावण
किष्किंधा के राजा बाली महाबली था। उसने अधर्म से अपने भाई का राज्य हड़पा और उसकी पत्नी को बंदी बनाकर भाई को राज्य से निकाल दिया। इसे वरदान प्राप्त था कि जो भी सामने से आकर इनसे युद्ध करेगा उसकी आधी शक्ति इन्हें मिल जाएगी। एक बार जब बाली संध्या पूजन कर रहा था, तब रावण अपने पुष्पक विमान से वहां पहुंचा और पीछे से वार करने के इरादे से आगे बढ़ा। लेकिन बाली ने रावण को देख लिया और उसे अपने एक हाथ में दबाकर 4 समुद्रों की परिक्रमा लगा ली। इतना बलशाली था बाली। रावण ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए बाली से क्षमा मांगी और उसकी तरफ मित्रता का हाथ बढ़ाया। बाली ने रावण की मित्रता स्वीकार कर ली।
सहस्त्रबाहु ने पानी में बहा दिया था रावण को
सहस्त्रबाहु अर्जुन का नाम कार्तवीर्य अर्जुन था। अपने तप से गुरु दात्तत्रेय को प्रसन्न कर उसने हजाए भुजाओं का वरदान प्राप्त किया था इसलिए इसका नाम सहत्रबाहु पड़ा। एक बार सहस्त्रबाहु नर्मदा नहीं में स्नान कर रहा था। रावण भी उस समय वहीं स्नान कर रहा था। कौतुहल वश उसने अपनी भुजाओं से नर्मदा का जल रोका तो नदी में प्रवाह बंद हो गया। इससे क्रोधित होकर रावण ने सहस्त्रबाहु को कटु वचन कहे। तब उसने रावण को बंदी बना लिया। पुलस्त्य ऋषि के कहने पर सहस्त्रबाहु ने रावण को मुक्त कर दिया लेकिन रावण कुछ समय बाद अपनी सेना लेकर सहस्त्रबाहु से युद्ध करने पहुंच गया। तब सहस्त्रबाहु ने नर्मदा नदी का सारा जल रोककर रावण की सेना पर छोड़ दिया और रावण अपनी सेना सहित जल के प्रवाह में बह गया।
भगवान शिव से युद्ध करने पहुंच गया था रावण
रावण भगवान शिव का अनन्य भक्त था। लेकिन जब इंसान का बुरा समय आता है तो सबसे पहले विवेक उसका साथ छोड़ देता है। ऐसा ही कुछ हुआ रावण के साथ। अपनी शक्तियों के घमंड में रावण भगवान शंकर से युद्ध करने के लिए कैलाश पर्वत पर जा पहुंचा। उसने भगवान शिव को युद्ध के लिए ललकारा। लेकिन जब शिवशंभू ने उसे कोई उत्तर नहीं दिया और ध्यान मग्न बैठे रहे तो रावण ने उन्हें कैलाश सहित उठाकर फेंकने का मन बनाया और वह पर्वत उखाड़ने लगा। इस पर भगवान शिव ने केवल अपने अंगूठे के बल से कैलाश को स्थिर कर दिया और रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया। जब बहुत प्रयास के बाद भी रावण अपना हाथ नहीं निकाल पाया तो उसने वहीं खड़े-खड़े भगवान शिव की स्तुति की और शिव तांडव स्त्रोत की रचना कर दी। इस पर भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे मुक्त कर दिया। तब रावण ने भगवान शिव को गुरु बनाकर उनकी शरण में आ गया।
रावण के जीवन का आखिरी युद्ध
इसके बाद वह भगवान राम से युद्ध में लीन हुआ। यह युद्ध उसके जीवन का अंतिम युद्ध साबित हुआ। न केवल वह खुद मृत्यु लोक पहुंच गया बल्कि उसने अपने परिवार और वंश का भी नाश किया।

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