Home ज्योतिष् धर्म What is the ‘right way’ to do ‘namaskar’: क्या है ‘नमस्कार’ करने का सही तरीका

What is the ‘right way’ to do ‘namaskar’: क्या है ‘नमस्कार’ करने का सही तरीका

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‘हैलो’, ‘हाय’ के इस जमाने में कहीं ना कहीं हाथ जोड़कर एक-दूसरे का सत्कार करना जैसे आउट आॅफ फैशन सा हो गया है। आज की युवा पीढ़ी या तो ‘हग’ या फिर हैंडशेक के जरिए अपने दोस्तों या परिचितों से मिलने की खुशी जाहिर करते है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार किसी से मिलने का यह तरीका सही नहीं है। हिन्दू धर्म में बड़ों के पैर छूकर उनके आशीर्वाद लेने और दोनों हाथ जोड़कर उनका सत्कार करने का विधान है। जो भले ही आज के मॉडर्न युग में आउटडेटेड से लगते हों लेकिन शास्त्रों लारा इन्हें व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान देने के पीछे बहुत से कारण छिपे हुए हैं।
मंदिर में ईश्वर
आमतौर पर अपनी उम्र से बड़े व्यक्ति से मिलने या फिर मंदिर में भगवान के दर्शन करते समय हमें सबसे पहले अपने दोनों हाथ जोड़कर उनका सत्कार करना चाहिए। चलिए जानते हैं नमस्कार करने के पीछे का कारण और इसे करने का सही तरीका क्या है।
नमस्कार करने के गुण
नमस्कार करने के गुण नमस्कार करने के पीछे व्यक्ति को आध्यात्मिक के साथ-साथ व्यवहारिक लाभ की प्राप्ति भी होती है। देवताओं और अपनी उम्र से बड़े सज्जनों को नमस्कार करने से हमारे आंतरिक गुणों और आदर्शों में वृद्धि होती है। ऐसा करने से हम खुद को सुधारने का प्रयत्न करने लगते हैं। कहीं ना कहीं यह हमें व्यवहारिक लाभ प्रदान करता है।
अहम की भावना
किसी को नमस्कार करने से मानव मस्तिष्क में संचारित ‘अहम’ की भावना में कमी आती है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्तिके भीतर नम्रता का भाव जागृत होता है। दोनों हाथ जोड़कर व्यक्ति अगर किसी के सामने झुकता है तो इससे उसके भीतर कृतज्ञता का एहसास उत्पन्न होता है। इससे व्यक्ति के अंदर आध्यात्मिक विकास होता है और साथ ही साथ लोगों के प्रति उसके व्यवहार में कुशलता आती है।
वृद्धों को नमस्कार करने का अर्थ
घर के बुजुर्गों और अपने से बड़े लोगों को झुककर नमस्कार करना उनके प्रति आपके आदर को दर्शाता है। शास्त्रों के अनुसार वृद्धों के भीतर देवताओं की छवि विद्यमान है, इसलिए उनका सत्कार करना सीधे देवताओं का सत्कार करने के बराबर है। बुजुर्गों के माध्यम से व्यक्ति को देवताओं की शरण प्राप्त होती है।
हाथ मिलाने से बेहतर हाथ जोड़ना
प्राय: हर कोई हाथ मिलाकर एक-दूसरे को ग्रीट करता है लेकिन हाथ मिलाने से अधिक बेहतर है कि हम संबंधित व्यक्ति को नमस्कार करें। माना जाता है कि जब दो लोग आपस में हाथ मिलाते हैं तो उनके शरीर की राजसी-तामसी तरंगें एक- दूसरे की अंगुलियों में स्थानांतरित हो जाती हैं। यदि दोनों व्यक्तियों में से किसी एक के शरीर में भी अनिष्टकारी तरंगें मौजूद हैं तो वह दूसरे के शरीर में भी प्रवेश कर जाती हैं।
मृत को नमस्कार करने का लाभ
कलियुग में पाप का बोलबाला है इसलिए मृत आत्मा की शांति के लिए परिजनों को हाथ जोड़कर प्रार्थना करनी पड़ती है ताकि मृत व्यक्ति की आत्मा बिना किसी कष्ट के अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच जाए। पहले ऐसा नहीं था, सतयुग, त्रेता और लापर तीनों ही युग में व्यक्ति अधिक सात्विक जीवन जीते थे इसलिए मरणोपरांत उनकी आत्मा स्वत: ही देवगति को प्राप्त हो जाती थी।
मंदिर की सीढ़ियों को नमस्कार
मंदिर में चढ़ते समय सीढ़ियों को सर्वप्रथम अपने दाएं हाथ की अंगुलियों से छूकर उस हाथ को सिर पर फेरना चाहिए। ऐसा करने से मंदिर के भीतर मौजूद देवताओं की तरंगें मानव के शरीर में प्रवेश करती हैं।
देवताओं को प्रणाम
मंदिर में इष्ट देव को नमन करते समय सर्वप्रथम अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर छाती के समक्ष रखें और साथ ही हाथ को जोड़ते समय अंगुलियों को ढीला छोड़ देना चाहिए। ध्यान रखें कि हाथों की अंगुलियां अपने अंगूठे से दूर ही रखें तथा हाथ जोड़ने के पश्चात अपनी पीठ को थोड़ा सा झुकाएं और हथेलियों से भौहों के मध्य भाग को छू लें।
इष्ट देव की मूर्ति
मन के भीतर अपने इष्ट देव की मूर्ति बनाने का प्रयास करें। ऐसा करने के बाद अपने हाथ सीधे नीचे लाकर ना छोड़ दें बल्कि नम्रतापूर्वक छाती के मध्य भाग तक लाएं और कुछ समय तक ऐसे ही रखें और फिर नीचे लाकर छोड़ दें।
नमन करने का तरीका
जब आप किसी से पहली बार मिलते हैं या किसी परिचित से भी मिलते हैं तो आपका उन्हें नमन करने का तरीका नम्रतापूर्ण होना चाहिए। किसी को नमन करते समय अपने हाथों की दोनों अंगुलियों को एक-दूसरे से जोड़ें और तब आपके अंगूठे छाती से कुछ ऊपर हों।
आशीर्वादयुक्त तरंगें
इस मुद्रा में झुककर नमस्कार करने से आपके भीतर उनके लिए नम्रता के भाव का संचार होता है। ऐसा करने से दोनों ही पक्षों की ओर से आशीर्वादयुक्त तरंगें प्रक्षेपित होती हैं।
नियम
शास्त्रानुसार नमस्कार करते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिनमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं, आदि समाहित हैं मसलन, किसी को भी नमस्कार करते समय अपने दोनों नेत्रों को बंद रखना चाहिए। कभी भी मात्र सिर हिलाकर या एक हाथ से नमस्कार नहीं करना चाहिए।
सिर ढंकना
नमस्कार करते समय हाथ में किसी भी प्रकार की कोई वस्तु नहीं होनी चाहिए। नमस्कार करते समय महिलाओं को अपना सिर ढंक लेना चाहिए जबकि पुरुषों को कतई ऐसा नहीं करना चाहिए।
हाथ जोड़ना
नमस्कार करने के इन्हीं गुणों की वजह से ऐसा माना जाता है कि हाथ जोड़कर मिलना, हाथ मिलाने से बेहतर है। वैसे भी हैंडशेक करना पाश्चात्य संस्कृति का हिस्सा है, बेहतर है कि हम अपनी भारतीय संस्कृति को ही अपनाएं और अपनी पीढ़ियों तक भी इसी संस्कार को पहुंचाएं।

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