Home विचार मंच The beautiful picture of Indian democracy is Sarangi: भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर हैं सारंगी

The beautiful picture of Indian democracy is Sarangi: भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर हैं सारंगी

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विडम्बना देखिए, नरेन्द्र मोदी दूसरी बार जब प्रधानमंत्री बनते हैं तो दूसरी तरफ ओडिशा का मोदी। नाम से विख्यात प्रतापचंद्र सारंगी को केन्द्र में राज्यमंत्री बनाया जाता है। दोनों मोदी पर दाग है, वैसे ही जैसे चांद पर भी दाग है।
नरेन्द्र मोदी की बात करें तो 2002 में घटित गोधरा कांड मामले में उनका नाम सामने आया जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। कोर्ट भले ही मोदी को दोषी साबित करने में सफल नहीं रहा हो लेकिन आज भी तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नसीहत भरे शब्द राजधर्म का पालन की बात, लोग नहीं भूल पाएं हैं। आज कुछ इसी तरह के कई आरोप-प्रत्यारोपों से घिर गए हैं ओडिशा का मोदी मतलब प्रताप चन्द्र सारंगी। अपनी सादगी और पारदर्शी राजनीतिक जीवन जीने के लिए मशहूर प्रताप चन्द्र सारंगी का जन्म 04 जनवरी 1955 को नीलगिरी जिले के गोपीनाथ कस्बे में हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई प्रताप चन्द्र ने नीलगिरी में ही पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वो कर्इं चक्कर रामकृष्ण मठ के लगाए और दिल की इच्छा थी योगी बनने की। लेकिन जब मठ के योगियों को यह पता चला कि प्रताप की मां विधवा हैं और प्रताप उनका इकलौता सहारा है तो उन्हें यह सलाह दी गई कि वो विधवा मां की सेवा करे, यही सबसे बड़ा अध्याम और पूजा है। एक संस्कारी शिष्य की तरह प्रताप उनकी बातों को मानकर लौट आया और मां की सेवा में जुट गया।
सामाजिक कार्यों में नि:स्वार्थ भाव से जुटे रहने के कारण इलाके में प्रताप की एक पहचान बनने लगी। नतीजा हुआ कि भाजपा ने इन्हें नीलगिरी से 2004 में विधायक का टिकट दिया। प्रताप को सफलता मिली और वो विधायक चुन लिए गए। प्रताप ने अपनी इस राजनीतिक सफलता को 2009 में भी दोहराई, लेकिन बारी जब संसदीय चुनाव की आई तो 2014 में वो बालासोर से लोकसभा का चुनाव हार गए। लेकिन पार्टी का प्रताप पर अटूट भरोसा बना रहा और प्रताप भी लगातार जनकल्याण के कार्यों में जुटे रहे। नतीजा हुआ कि धनबल से संपन्न बीजेडी उम्मीदवार रबिन्द्र कुमार जेना को इसबार के लोकसभा चुनाव में पटखनी देने में प्रतापचन्द्र कामयाब रहे। लोकसभा चुनाव परिणाम आने के साथ ही प्रतापचन्द्र सारंगी की सादगी से जुड़ी कई तस्वीरें मीडिया में वायरल होने लगी। बीजेपी के सर्वेसर्वा और प्रधान सेवक पद के इकलौते दावेदार नरेन्द्र मोदी के खास माने जाने वाले प्रतापचन्द्र को चाहने वाले समर्थकों को यह लगने लगा था कि इस बार इनके साथ कुछ खास होगा। वह समय भी आया जब सारंगी को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की घोषणा हुई और इनको दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी बतौर राज्यमंत्री दिया गया।
लेकिन कहानी और भी है जो प्रतापचन्द्र सारंगी के व्यक्तित्व से जुड़े दूसरे पक्षों को बताता है। देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में चर्चित हुई एक घटना घटी 22-23 जनवरी, 1999 की दरमयानी रात को। जनवरी की इस सर्द रात में एक लोमहर्षक घटना को कथित हिन्दू अतिवादियों ने अंजाम दिया था। उस रात कार में सोये आॅस्ट्रेलिया के क्रिश्चियन मिशनरी से जुड़े ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बच्चों की हत्या कर दी गई। आरोप लगा था बजरंग दल पर और प्रतापचन्द्र सारंगी उस समय इस संगठन के प्रदेश सहसंयोजक थे। इस मामले में प्रतापचन्द्र सहित 12 आरोपी बनाए गए थे। बाद के दिनों में कोर्ट ने 11 लोगों को बरी कर दिया और केवल एक आरोपी दारा सिंह को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
स्थानीय लोग बताते हैं कि ग्राहम स्टेन्स आदिवासियों-वनवासियों के बीच कल्याणकारी योजनाओं को संचालित करते थे और आरोप है कि इन जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं की आड़ में ग्राहम स्टेन्स धर्म परिवर्तन जैसे कुत्सित कार्य में संलग्न ही नहीं बल्कि उनका नेतृत्व भी करते थे। हिन्दू धर्म से जुड़े लोग इस बात से परेशान थे और हर कीमत पर ग्राहम स्टेन्स से मुक्ति दिलाना चाहते थे। बजरंगदल संगठन का नाम इस मामले में घसीटा गया, लेकिन कोर्ट ने किसी भी ऐसे आरोप से संगठन को मुक्त कर दिया। प्रतापचन्द्र सारंगी भी किसी भी ऐसी आपराधिक घटना में खुद के साथ-साथ बजरंग दल के जुड़े होने से इनकार करते हैं। दूसरी बड़ी घटना 16 मार्च 2002 की है। उस दिन ओडिशा विधानसभा में विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और दूर्गा वाहिनी जैसी उग्र हिन्दू संगठनों ने घुसकर हंगामा किया, तोड़फोड़ की और आरोप है कि बीजद के विधायकों और वहां मौजूद पत्रकारों को पीटा भी। इन प्रदर्शनकारियों में प्रतापचन्द्र सारंगी भी शामिल थे जिन पर आगजनी, दंगा-फसाद फैलाने जैसे कई संगीन आरोप लगे। सारंगी खुद स्वीकार करते हैं कि विभिन्न सात झूठे केस उनपर दर्ज हैं।Ñ
प्रतापचन्द्र सारंगी मूलरूप से समाजसेवी, सादगी पसंद जनसरोकार से मतलब रखने वाला भारतीय प्रजातांत्रिक व्यवस्था का एक खास दर्पण हैं जिसमें हर वो बन्दा खुद की नियत को सच्चे मन से देख सकता है, मूल्यांकन कर सकता है। सादगीपूर्ण जीवन जीना सारंगी का निजी मामला हो सकता है लेकिन यदि आप सामाजिक जीवन जीते हैं तो उसका मूल्यांकन निजता से बाहर आकर सार्वभौमिक हो जाता है, प्रतापचन्द्र सारंगी संभवत: इसके इकलौते उदाहरण हैं।
सुनील पांडेय
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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