मिस्र में सिसी ने राष्ट्रपति के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली

काहिरा। मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सिसी ने राष्ट्रपति के रूप में चार साल के अपने दूसरे कार्यकाल के लिए आज शपथ ली। सिसी ने गत मार्च में हुए राष्ट्रपति चुनाव में वैध वोटों में से 97 प्रतिशत वोट हासिल किये थे। उन्होंने सदन में अपनी सरकार के सदस्यों के सामने शपथ ली। शपथग्रहण को देखते हुए पूरे काहिरा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गए थे। शपथग्रहण के बाद 21 तोपों की सलामी दी गई। अल सिसी ने अपने संबोधन में स्थिरता बहाली, अर्थव्यवस्था में सुधार करने और उत्तरी सिनाई प्रायद्वीप में आतंकवाद से मुकाले पर काम करने की प्रतिबद्धता जतायी।

उन्होंने कहा कि वह अपने दूसरे कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करेंगे।वर्ष 2013 में सड़कों पर प्रदर्शन के बाद सेना प्रमुख रहे सिसी ने मिस्र के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटाया था। सिसी ने 2014 में भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी। सिसी के सामने चुनाव में कोई गंभीर चुनौती नहीं थी। उनके एकमात्र प्रतिद्वंद्वी मूसा मुस्तफा मूसा अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय थे। मूसा स्वयं भी सिसी समर्थक रहे हैं।

पाकिस्तान में 25 जुलाई को होंगे आम चुनाव, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

इस्लामाबाद। अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम को लेकर सत्तारूढ़ पीएमएल – एन और विपक्ष के बीच बने गतिरोध के बीच राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव होंगे। पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) ने 21 मई को राष्ट्रपति को भेजे पत्र में नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय असेंबली के लिए 25 जुलाई से 27 जुलाई के बीच चुनाव करवाने का प्रस्ताव दिया था। राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने आम चुनाव और प्रांतीय चुनाव के लिए 25 जुलाई की तारीख को कल मंजूरी दी थी। आम चुनाव में इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ सत्तारूढ़ दल की मुख्य प्रतिद्वंद्वी होगी।

वर्तमान सरकार का कार्यकाल 31 मई को पूरा होगा और कार्यवाहक सरकार एक जून से और नई सरकार के गठन तक कामकाज संभालेगी। प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी और विपक्ष के नेता खुर्शीद शाह के बीच कार्यवाहक प्रधानमंत्री के नाम पर अब तक सहमति नहीं बन पाई है।

राष्‍ट्रपति ने 65वें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार प्रदान किए

नई दिल्‍ली। इस अवसर पर बोलते हुए राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारी फिल्‍में उस विविधता का प्रतिनिधित्‍व करती हैं और उसमें योगदान भी देती हैं, जो भारत की सबसे बड़ी ताकत है। अपनी कहानियों में हमारी फिल्‍में हमारी सभ्‍यता और हमारे साझा समुदाय के आदर्शों के प्रति सच्‍चा बने रहने के लिए हमें प्रेरित करती हैं। वे हमें शिक्षित करती हैं और हमारा मनोरंजन भी करती हैं। वे हमारे सामने सामाजिक चुनौतियों का एक प्रतिबिंब पेश करती हैं, जिनका हमें अभी भी सामना करना है। और वे ऐसा उस भाषा में करती हैं, जो सार्वभौमिक है।
राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत में फिल्‍में भोजपुरी से लेकर तमिल, मराठी से लेकर मलयालम तथा अन्‍य कई विविध भाषाओं में बनाई जाती हैं। फिर भी, सिनेमा अपने आप में एक भाषा है। हिंदी सिनेमा ने संभवत: किसी भी अन्‍य संस्‍थान की अपेक्षा देश भर में एक भाषा के रूप में हिंदी को लोकप्रिय बनाने में सबसे अधिक योगदान दिया है। मानवता की सराहना करने एवं सत्‍यजीत रॉय या ऋतविक घटक की सूक्ष्‍म भावनाओं को समझने के लिए आपका बंगाली होना जरूरी नहीं है। ‘बाहुबली’ के महाकाव्‍य से सम्‍मोहित होने के लिए हमें तेलुगु जानने की आवश्‍यकता नहीं है। और हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ए.आर.रहमान-जिन्‍होंने एक बार फिर राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार जीता है-ने उनके दिलों में भी अपनी आरंभिक छाप छोड़ी थी, जो उनके गाने के तमिल शब्‍दों को नहीं समझते। फिर भी, वे उनके संगीत से मंत्रमुग्‍ध हो गए थे।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि सिनेमा संस्‍कृति है और इसके साथ ही सिनेमा वाणिज्‍य भी है। प्रत्‍येक वर्ष लगभग 1500 फिल्‍में बनाए जाने की बदौलत भारतीय फिल्‍म उद्योग की भी गिनती दुनिया के सबसे बड़े फिल्‍म उद्योगों में की जाती है। यह भारतीय सॉफ्ट पावर की एक अभिव्यक्ति है और इसने अनेक महाद्वीपों में अपनी विशिष्‍ट छवि बनाई है। हमारी फिल्‍में जापान, मिस्र, चीन, अमेरिका, रूस और ऑस्‍ट्रेलिया के साथ-साथ कई अन्‍य सुदूरवर्ती देशों में भी देखी एवं सराही जाती हैं। फिल्में हमारे सबसे प्रमुख सांस्कृतिक निर्यातों में से एक हैं और इसके साथ ही फिल्‍में वैश्विक भारतीय समुदाय को हमारे देश में अंतर्निहित जीवन की लय के साथ जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्‍यम हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम सिनेमा और व्यापक मनोरंजन अर्थव्यवस्था के रोमांचक और परिवर्तनकारी समय में जी रहे हैं। प्रौद्योगिकी ने फिल्म निर्माण की प्रक्रिया तथा इनको देखेजाने के तरीकों को बदल दिया है। कम लागत वाले डेटा, स्मार्ट फोन और टेबलेट के आगमन से लोगों द्वारा फिल्मों को देखे जाने के पैटर्न में स्पष्ट बदलाव हुआ है। भारतीय फिल्म उद्योग इन बदलावों के अनुसार बदल रहा है। उन्होंने आश्वस्त होकर कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग ऐसी रणनीतियां अपनाएगा जो चुनौतियों को अवसरों में बदल देंगी। फिल्म निर्माता भी यह अनुभव करेंगे कि विशिष्ट सामग्री निर्माण (नीश प्रोडक्शन) की लागत कम होती जा रही है। उम्मीद है कि यह उन्हें स्तर को ऊंचा करने में प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

कांग्रेस प्रदेश अध्‍यक्ष कमलनाथ ने किए महाकाल दर्शन

उज्जैन। कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने बुधवार को उज्जैन आकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। लंबे समय बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में प्रदेश अध्यक्ष के आने का जोश दिखाई दिया।

हालात यह थे कि महाकाल मंदिर में दर्शन करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जमकर धक्का-मुक्की हुई। स्थिति यह रही कि कमलनाथ को भी मंदिर में प्रवेश कराने के लिए पुलिस को मशक्कत करना पड़ी। मीडिया से चर्चा में कमल नाथ ने कहा कि अगली सरकार कांग्रेस की बनेगी, हालांकि वे कांग्रेस में गुटबाजी और नेताओं की अलग-अलग किलेबंदी के प्रश्न को सहजता से टाल गए।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, श्रमिकों और पिछड़ों के कल्याण के बिना देश प्रगति नहीं कर सकेगा-

भोपाल । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि यह एक सच्चाई है कि गरीबों, श्रमिकों और पिछड़ों के कल्याण के बिना कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता है, उनके कार्य में भी कौशल की जरूरत होती है। इसी प्रकार से तेंदूपत्ता संग्रहण करने का काम भी कुशलता का काम है। तेंदूपत्ता संग्रहक और उनके परिवार इस कार्य को अपने पारंपरिक ज्ञान से ही अच्छी तरह पूरा कर पाते है। इस कार्य से उनकी आजीविका चलने के साथ वनों का विनाश भी रुका है। राष्ट्रपति श्री कोविंद आज गुना जिले के सुदूर अंचल बमोरी में असंगठित मजदूर एवं तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति ने ग्राम बमोरी में 127 करोड़ रुपये की लागत के विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकापर्ण किया। राष्ट्रपति ने 10 हजार तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस के रूप में एक करोड़ रुपये की राशि प्रदाय की। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वनों का संरक्षण और वनों से प्राप्त होने वाली उपज का सदुपयोग करके ही हम आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रख सकते हैं। वनों को आदिवासी एवं वनवासी से बेहतर कोई नहीं जान सकता है, जंगल ही उनका रक्षक और पालक है। वे दोनों एक-दूसरे की रक्षा करते है, ऐसे में तेदूपत्ता संग्राहकों के कल्याण की जिम्मेदारी समाज और राज्य सरकार की है।

बाँस से बनने वाले उत्पादों के लिए मिशन मोड योजना
राष्ट्रपति ने कहा कि यह खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश में लघु वनोपज संघ द्वारा मुख्यमंत्री तेंदूपत्ता संग्राहक कल्याण सहायता योजना शुरू की गई है। संघ के माध्यम से संग्राहकों के बच्चों की शिक्षा के लिए एकलव्य छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जा रही है। श्री कोविंद ने कहा कि वनोपज का उचित मूल्य प्राप्त हो, आजीविका के लिए वनों पर आश्रित लोगों के जीवन में सुधार हो, इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा 24 लघु वनोपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना लागू की गई है। योजना से वनवासी भाई-बहनों को वनोपज का उचित मूल्य प्राप्त होगा, वहीं बाँस और उससे बनने वाले उत्पादों के संबंध में भी भारत सरकार ने मिशन मोड योजना शुरू की है। लघु वनोपज संघ द्वारा भी लघु वनोपज पर आधारित प्र-संस्करण केन्द्र संचालित किए जा रहे है।

राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा कि भारत में श्रम क्षेत्र में असंगठित क्षेत्रों का हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है, जिसमें मुख्य रूप से ज्यादातर श्रमिक कृषि एवं निर्माण क्षेत्रों से जुड़े़ हुए है। असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की भारी जरूरत है। इनके बीमार होने, अपंग हो जाने पर या वृद्धावस्था में किसी प्रकार की परेशानी खड़ी न हो, इसके लिए केन्द्र सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता बनाई जा रही है। उन्होंने इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पहले से ही इस दिशा में कार्य कर रही है। प्रदेश में लघु एवं कुटीर उद्योगों पर राज्य सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। इसी का परिणाम है कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश में लघु उद्योग इकाईयों के माध्यम से लगभग 6 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में श्रमिकों के कल्याण के लिए शुरू की गई योजनाओं से श्रमिकों के जीवन-स्तर में आए सुधार का उल्लेख भी किया।

मध्यप्रदेश एकमात्र राज्य जहाँ गरीब बच्चों की फीस राज्य सरकार भरेगी

राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने गरीबों के कल्याण एवं उत्थान के लिए ऐसी कई योजनाएँ संचालित की है, जिसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुँच रहा है। उन्होंने सभी वर्गों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और उनके मंत्रि-मण्डल को बधाई दी। उन्होंने इस अवसर पर ग्रामीणों से आग्रह करते हुए कहा कि गरीबी से मुक्त होने का एक ही मंत्र है, शिक्षा। इसके लिए वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिये अवश्य भेजें।

राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में जो लोग ऊँचे स्थानों पर पहुँचे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में ऊँचाईयां प्राप्त की है, वे सभी लोग गरीब एवं मजदूर परिवार से है। वे सब अपनी मेहनत के कारण ही इस मुकाम तक पहुँचे है। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीब बच्चों की उच्च शिक्षा के लिये फीस भरने की जवाबदारी मध्यप्रदेश सरकार ने ली है, इस प्रकार की योजना देश के किसी अन्य राज्य में संचालित नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा असंगठित क्षेत्र की श्रमिक प्रसूता महिलाओं को प्रसव उपरांत 12 हजार की राशि उनके खातों में जमा कराई जा रही है। इसी प्रकार की योजना की तर्ज पर केन्द्र सरकार द्वारा प्रसूताओं के खाते में 6 हजार रूपए की राशि दी जा रही है।

मध्यप्रदेश सरकार गरीब, किसान, मजदूर को केन्द्र में रखकर कार्य कर रही है

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गुना जिले के सुदूर अंचल में पहली बार देश के राष्ट्रपति श्री कोविंद ने आकर इतिहास रचा है। साथ ही देश की प्रथम महिला श्रीमती सविता कोविंद भी साथ है। उन्होंने कहा कि आज का दिन गुना जिले के लिए एक अदभुत दिवस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में सभी वर्गों के साथ किसानों एवं मजदूरों के लिए भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय की सोच थी, कि जो व्यक्ति समाज की अंतिम पंक्ति पर खड़ा है उसका कल्याण सबसे पहले हो। इसी दिशा में राज्य सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रहने वाले प्रत्येक गरीब आवासहीन परिवार को भूखण्ड दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में कानून बनाया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना में आने वाले 4 वर्षों के अंदर सभी आवासहीन परिवारों को पक्के आवास दिए जायेंगे।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रही जन-कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार का मकसद गरीबों की जिन्दगी को बदलना है। इस दिशा में राज्य सरकार ने गरीबों के कल्याण एवं भलाई के लिए संचालित योजनाओं में प्रदेश में नया इतिहास रचा है। गरीबों के कल्याण के लिए सर्वाधिक योजनाएँ संचालित करने वाला मध्यप्रदेश देश का ही नहीं, बल्कि दुनिया का एकमात्र राज्य है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते-चप्पल, महिलाओं को साड़ी, ठण्डा पानी पीने के लिए कुप्पी प्रदाय की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी वर्गों के गरीब छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल, आई.आई.टी आदि पाठ्यक्रमों में लगने वाली फीस की राशि राज्य सरकार भरेगी। मुख्यमंत्री ने कहा की श्रमिक परिवार की ऐसी गर्भवती महिलाओं को 6 माह से 9 माह तक चार हजार रूपये एवं प्रसव के बाद पौष्टिक आहार के लिये 12 हजार रूपये की राशि महिलाओं के खाते में जमा कराई जा रही है। प्रदेश में इस वर्ष लगभग 17 करोड़ की राशि महिलाओं के खाते में जमा कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मजदूर जिसकी आयु साठ वर्ष से कम है उसकी मृत्यु होने पर दो लाख रूपये रुपये और दुर्घटना से मृत्यु होने पर चार लाख रूपये की राशि मजदूर के परिवार को देने की व्यवस्था की है।

सम्मेलन में राष्ट्रपति की धर्मपत्नि श्रीमती सविता कोविंद, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, मध्यप्रदेश लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री महेश कोरी, म.प्र. असंगठित कर्मकार मण्डल के अध्यक्ष श्री सुलतान सिंह शेखावत, विधायक श्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया भी मौजूद थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचे भोपाल, दो दिन रहेंगे मध्यप्रदेश में

भोपाल । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज सुबह 10.30 बजे भोपाल के राजाभोज विमानतल पहुंचे, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनका स्वागत करते हुए अगवानी की। कुछ देर एयरपोर्ट पर रुकने के बाद वे सागर के लिए रवाना हुए। वे मध्यप्रदेश के दो दिवसीय प्रवास पर आए हैं। इस दौरान वे विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

राष्ट्रपति कोविंद भोपाल एयरपोर्ट से सीधे सागर के लिए रवाना हुए, जहां वे दोपहर 12 बजे डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के 27वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। राष्ट्रपति कोविंद दोपहर 03 बजे डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती हाल में आयोजित 620वें संत कबीर प्रकटोत्सव महोत्सव में शामिल होंगे। राष्ट्रपति सागर में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद शाम 5.30 बजे भोपाल पहुंचेंगे। राष्ट्रपति रात्रि विश्राम राजभवन, भोपाल में करेंगे।
राष्ट्रपति कोविंद रविवार, 29 अप्रैल को प्रात: 10.25 पर भोपाल से गुना जिले के बामोरी के लिये रवाना होंगे। वे इस दिन दोपहर 12 बजे गुना जिले के बामोरी में असंगठित श्रमिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। राष्ट्रपति दोपहर एक बजे बामोरी से गुना के लिये रवाना होंगे। कोविंद दोपहर 02 बजे गुना में मिनी स्मार्ट सिटी के शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

राष्ट्रपति शाम 04 बजे से 4.50 मिनिट तक अपने बड़े भाई रामस्वरूप भारती के गुना स्थित आवास में रहेंगे। शाम 05 बजे गुना से भोपाल के लिये रवाना होंगे। इसके बाद कोविंद भोपाल एयरपोर्ट से शाम 6.20 मिनिट पर नई दिल्ली के लिये रवाना हो जायेंगे।

पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास साथ – साथ चलना चाहिए : उप राष्‍ट्रपति

देहरादून। उप राष्‍ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास साथ – साथ चलना चाहिए। उप राष्‍ट्रपति महोदय आज उत्‍तराखंड के देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय वन अकादमी के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उत्‍तराखंड के राज्‍यपाल डॉ. कृष्‍णकांत पाल, उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री श्री त्रिवेन्‍द्र सिंह रावत, केंद्रीय विज्ञान व तकनीकी, पृथ्‍वी विज्ञान तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन तथा अन्‍य गणमान्‍य व्‍यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।
उप राष्‍ट्रपति ने कहा कि वन प्रबंधन का मूलभूत सिद्धांत प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और इसके सतत उपयोग पर आधारित होना चाहिए। उन्‍होंने आगे कहा कि हमें पर्यावरण अनुकूल दृष्टिकोण अपनाने की आवश्‍यकता है और हमें बेहतर भविष्‍य के लिए प्रकृति के साथ जीना सीखना चाहिए। पेड लगाना और पेडों की रक्षा करना प्रत्‍येक व्‍यक्ति का पवित्र कर्तव्‍य होना चाहिए।
उप राष्‍ट्रपति महोदय ने कहा कि वन आच्‍छादन को बढ़ाने के लिए राज्‍यों को प्रोत्‍साहन दिया जाना चाहिए। उन्‍होंने आगे कहा कि नीति आयोग और केन्‍द्र सरकार के पास अच्‍छे कार्य करने वाले राज्‍यों के लिए विशेष प्रावधान होने चाहिए। वन, नदियां और प्रकृति माता को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए।
उप राष्‍ट्रपति ने कहा कि मनुष्‍य और वन के बीच सहजीवन का संबंध है और यह हमारे देशवासियों के धार्मिक तथा सामाजिक – सांस्‍कृतिक मानसिकता के साथ गहरे रूप से जुड़ा हुआ है। हाल के वर्षों में प्राकृतिक संसाधनों की बढ़ती मांग तथा प्रकृति के बारे में समझ की कमी के कारण यह संबंध अस्‍त व्‍यस्‍त हुआ है। उन्‍होंने आगे कहा कि भारतीय संस्‍कृति पारंपरिक रूप से पेडों को दिव्‍यता के प्रतीक के रूप में सम्‍मानित करती है। ‘’फिकस रैलीजियोसा’’ के नाम से जाने जाने वाले पीपल पेड़ को काटना पाप माना जाता है।
उप राष्‍ट्रपति महोदय ने कहा कि जनजातियों तथा स्‍थानीय समुदायों को संरक्षण के तरीकों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। वन्‍यकर्मियों को विकास के लिए सुविधा प्रदान करने वाला बनना चाहिए और इसके लिए राष्‍ट्रीय हित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। वन्‍य कर्मियों को आम लोगों विशेषकर जनजातियों के कल्‍याण पर ध्‍यान देना चाहिए क्‍योंकि जनजाति समुदाय अपनी आजीविका के लिए वन पर निर्भर होते हैं। वन प्रबंधन के प्रति रणनीति के बदलाव के संदर्भ में भारत ने लम्‍बी दूरी तय की है। पहले वन संरक्षण के नाम पर लोगों को वन से दूर रखा जाता था। अब संयुक्‍त वन प्रबंधन के तहत लोगों के सहयोग से वन का प्रबंधन किया जाता है।

राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा सलाहकार माइकल काटानजारो देंगे इस्तीफा

वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस के ऊर्जा और पर्यावरण नीति के शीर्ष सलाहकार माइकल काटानजारो ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। माइकल काटानजारो कानून और लॉबिंग कंपनी सीजीसीएन समूह में वापसी करेंगे, जहां वह पहले काम करते थे। व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय आर्थिक परिषद में काटानजारो घरेलू ऊर्जा मुद्दों के प्रमुख थे। उपराष्ट्रपति माइक पेंस के कार्यालय के फ्रांसिस ब्रुक उनका स्थ लेंगे।

काटानजारो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक नियामक और जीवाश्म – ईंधन समर्थक एजेंडे के बड़े नाम थे। ट्रंप प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की कई पर्यावरण संरक्षण नीतियों को वापस लिया है। ट्रंप का कहना है कि ये व्यावसायिक विकास में बाधा उत्पन्न करती हैं। काटानजारो से पहले भी कई अन्य प्रमुख सलाहकार ट्रंप प्रशासन से इस्तीफा दे चुके हैं।

राष्ट्रीय आर्थिक परिषद का नेतृत्व अब लैरी कुडलो करते हैं , जिन्होंने गैरी कोहन की जगह ली थी। स्टील और एल्यूमीनियम के आयात पर टैरिफ लगाने के फैसले की आलोचना करते हुए कोहन ने इस्तीफा दे दिया था।

दक्षिण अफ्रीका में राष्ट्रपति रामफोसा ने किया ‘गांधी वॉक’ का नेतृत्व

जोहान्सबर्ग। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने जोहान्सबर्ग के दक्षिण में भारतीयों की बसावट वाले लेनासिया में आयोजित ‘गांधी वॉक’ का नेतृत्व किया। इस आयोजन में करीब 5,000 लोगों ने हिस्सा लिया। देशवासियों के बीच सामुदायिक जागरूकता एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए इस वॉक का आयोजन किया गया था। ‘गांधी वॉक समिति’ के अध्यक्ष अमित प्रभुचरण ने कहा कि लगातार 33 वीं बार आयोजित की गई इस वॉक में यह पहला मौका था जब मौजूदा राष्ट्रप्रमुख इसमें शामिल हुए।

इस बार वॉक की थीम ‘गोइंग ग्रीन’ थी जिसका केंद्र पर्यावरणीय पहलों को बढ़ावा देना एवं सामुदायिक जागरूकता फैलाना था। रामफोसा के साथ दक्षिण अफ्रीका में भारत की उच्चायुक्त रुचिरा कंबोज भी वॉक में शामिल हुईं।

इस मौके पर रामफोसा ने हर्षवर्धन पितांबर (गांधी की तरह दिखने वाले शख्स) की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘मुझे इस बेहतरीन एवं शानदार ‘ गांधी वॉक ’ में बुलाने और इसका हिस्सा बनाने के लिए शुक्रिया… खासतौर पर खुद उस शख्स के लिए जो स्वयं मेरे साथ खड़े हैं… महात्मा गांधी।’ स्वास्थ्य कारणों के चलते रामफोसा को चलने की काफी आदत हैं और उन्होंने इससे पहले ‘ गांधी वॉक ’ में शामिल होने की इच्छा भी जाहिर की थी।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल ने कहा सीरियाई शासन के खिलाफ नहीं की है युद्ध की घोषणा

पेरिस। फ्रांसीसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने कहा कि सीरिया में फ्रांस की तरफ से किये गये हवाई हमले बशर अल-असद सरकार के खिलाफ युद्ध की घोषणा नहीं है। उन्होंने कहा कि पेरिस ने डोनाल्ड ट्रंप को वहां लंबे समय तक बने रहने के लिये तैयार कर लिया है।

अमेरिका और ब्रिटेन के साथ सीरिया में अभूतपूर्व हमले में शामिल होने के एक दिन बाद फ्रांस ने कहा कि यह हस्तक्षेप वैध था। अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से अनुरोध किया कि वह सात सालों से चली आ रही लड़ाई के कूटनीतिक समाधान के लिये दबाव बनाएं।

‘बीएफएम टीवी’ को दिये एक साक्षात्कार में मैक्रों ने कहा कि ‘हमनें बशर अल-असद सरकार के खिलाफ युद्ध की घोषणा नहीं की है। उन्होंने हालांकि एक बार फिर दलील दी कि यह संकेत दिया जाना जरूरी था कि नागरिकों के खिलाफ रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल जैसी हरकत को दंड दिये बिना नहीं छोड़ा जाएगा। हाल में दूमा में हुये कथित रासायनिक हमले के विरोध में गठबंधन सेनाओं ने रासायनिक हथियारों के तीन कथित केंद्रों को निशाना बनाकर बमबारी की थी।

विहिप के नए अध्‍यक्ष का संकल्‍प, साधु, संत और समाज के सहयोग से मंदिर बन कर रहेगा

नयी दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद में संगठनात्मक चुनाव परिणाम पर वरिष्ठ प्रचारक डा. प्रवीण तोगड़िया की आलोचनाओं को ज्यादा महत्व नहीं देते हुए विहिप ने कहा है कि संगठन बड़ा होता है, व्यक्ति बड़ा नहीं होता।
विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के नए अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि ‘‘अगर कोई व्यक्ति स्वयं को संगठन से बड़ा समझ लेता है, तो वहीं से गलती शुरू हो जाती है।’’ उन्होंने कहा कि सभी लोग विभिन्न स्थानों पर संगठन की मजबूती और बेहतरी के लिये प्रयास करते हैं। लोगों को व्यवस्था संचालन के लिए जिम्मेदारी दी जाती है और सभी मिलजुलकर काम करते हैं।

विश्व हिन्दू परिषद के इतिहास में पांच दशकों में पहली बार हुए चुनाव में पूर्व राज्यपाल वी एस कोकजे विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए। अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में कोकजे ने राघव रेड्डी को पराजित किया। आलोक कुमार विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष चुने गए। इस पद पर पहले डा. प्रवीण तोगड़िया थे। तोगड़िया ने चुनाव नहीं लड़ा था।
विहिप के नए अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि तोगड़िया ने चुनाव परिणाम के बाद कुछ बातें गुस्से में कही हैं। हम सभी को यह समझने की जरूरत है कि राम मंदिर केवल विहिप का ही नहीं, बल्कि करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं का विषय है। इसमें कोई रहे या नहीं रहे….. साधु, संत और समाज के सहयोग से मंदिर बन कर रहेगा। इससे पहले तोगड़िया ने कहा था कि वह अब विहिप में नहीं हैं, अब वह लोगों के लिये काम करेंगे और राम मंदिर के मुद्दे पर अनशन करेंगे।

हिन्दू समाज की एकजुटता पर जोर देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि देश के भीतर सामाजिक समरसता का भाव पैदा करने पर जोर देने की विशेष आवश्यकता है। हिन्दू समाज में कहीं भी किसी भी स्तर पर बिखराव न दिखाई दे, इसके लिए विशेष रूप से प्रयास करने की जरूरत है और वह ऐसा करेंगे। इसके लिए सामाजिक समरसता पर विशेष रूप से काम करना होगा।उन्होंने कहा कि देश को यदि मजबूत बनाना है तो सामाजिक समरसता पर काम करना होगा।
विहिप किसी धर्म के खिलाफ नहीं है बल्कि देश के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ है। यह देश सबका है। यह भाव हर किसी के मन में होना चाहिए। राम मंदिर के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ अधिवक्ता कुमार ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं का प्रतीक है और यह कमजोर नहीं हुआ है। यह किसी संगठन का विषय नहीं है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, देश को समर नहीं समरसता की जरूरत

इंदौर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि आज देश को समर नहीं समरसता की जरूरत है। उन्होने बाबा साहब के समरसता के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का आव्हान किया। श्री कोविंद ने कहा कि बाबा साहब ने हमेशा शांति, करूणा और अहिंसा का रास्ता चुना। उन्होने नागरिकों से बाबा साहब के सपनों का भारत निर्माण करने में अपना योगदान देने का आव्हान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र की अखण्डता के संदर्भ में बाबा साहब कहते थे कि “वे पहले भारतीय हैं, बाद में भी भारतीय हैं और अंत में भी भारतीय हैं।”
राष्ट्रपति आज यहाँ बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जन्मस्थली महू में आयोजित 127वीं जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति ने भीम जन्म भूमि स्मारक जाकर भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया और अनुयायियों के बीच बैठकर भोजन ग्रहण किया।

राष्ट्रपति ने महू में हर साल अम्बेडकर महाकुंभ आयोजित करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार की सराहना की। श्री कोविंद ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर क जन्म स्थली महू नागरिकों के लिये प्रेरणस्त्रोत है। उन्होने कहा कि नई पीढ़ी को यह समझना होगा कि आधुनिक भारत के निर्माण की नींव बाबा साहब ने रखी थी। दामोदर वैली, हीराकुंड जैसे बांध और वृहद बिजली परियोजनाएं लागू करने जैसे बड़े कामों के पीछे बाबा साहब की प्रगतिशील सोच थी। उन्होने बाबा साहब का योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि डॉ. अम्बेडकर ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिलाया। मजदूरों के काम के घंटे बारह से घटाकर आठ किये। महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का अधिकार दिलाया। भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
श्री कोविंद ने कहा कि बाबा साहब ने हमेशा भगवान बुद्ध के शांति और अहिंसा का मार्ग अपनाया। वे कहते थे कि जब विरोध के संवैधानिक उपकरण उपलब्ध हैं तो हिंसात्मक तरीकों की कोई जरूरत नही है। वे महान विधिवेत्ता, विद्वान और समाज सुधारक थे। उनके बनाये संविधान की शक्ति से प्रजातंत्र जीवंत हुआ। कमजोर, वंचित और पिछड़े लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिला जिससे वे देश की प्रगति में योगदान देने में सक्षम बने हैं।

श्री कोविंद ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में अम्बेडकर जन्मस्थली महू में यह उनकी पहली यात्रा है। उल्लेखनीय है कि अम्बेडकर जयंती पर जन्मस्थली महू में पधारने वाले वे पहले राष्ट्रपति हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि बाबा साहब ने जो संविधान दिया है वह समानता का मूल अधिकार देता है। इसके बाद सबसे बड़ा अधिकार मतदान का अधिकार है जो लोकतंत्र का आधार है। वे कहते थे शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। बाबा साहब एक असाधारण विद्यार्थी थे। उन्होंने कहा कि समझदारी के बिना शिक्षा अधूरी है। जब पहला मंत्रिमंडल बना तो डॉ. अम्बेडकर विधि मंत्री के रूप में शामिल हुये। वे उस समय मंत्री मंडल के सदस्यों में सर्वाधिक डिग्री प्राप्त मंत्री थे। उन्होंने शिक्षा पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया। उनका जीवन युवाओं के लिये अत्यंत प्रेरणास्प्रद हैं।
श्री कोविंद ने बताया कि बाबा साहब ने मात्र 27 साल की उम्र में “स्माल होल्डिंग इन इंडिया एण्ड रेमेडीज” शीर्षक से आलेख लिखकर स्वयं को उच्चकोटि का अर्थशास्त्री साबित कर दिया था। उन्होंने हमेशा अहिंसा और करूणा का मार्ग अपनाया। राष्ट्रपति ने कहा कि जय भीम बोलने का अर्थ है बाबा साहब के बनाये संविधान का सम्मान करना, उनकी वैचारिक विरासत का सम्मान करना।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर न केवल भारतीय संविधान के निर्माता थे बल्कि उनका आधुनिक भारत के निर्माण, कमजोर वर्गों और महिलाओं की उन्नति में तथा सामाजिक समरसता में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कमजोर वर्गों और महिलाओं के उत्थान के लिये निरंतर कार्य कर रही है। केन्द्र सरकार भी “सबका साथ, सबका विकास” के मार्ग पर चलते हुये सामाजिक न्याय और कौशल विकास के लिये ठोस कदम उठाये हैं।
श्रीमती पटेल ने कहा कि बाबा साहब के सपनों को पूरा करने के लिये सरकार समाज के कमजोर वर्गों अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण, शिक्षा, रोजगार के क्षेत्र में सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने सभी से समाज में एकता, समरसता बनाये रखने तथा देश के नवनिर्माण में सहभागी बनने की अपील की।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर के जीवन और उनके स्मृति से जुड़े पाँच स्थानों को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल किया जायेगा। यह तीर्थ स्थान हैं बाबा साहब की जन्मस्थली महू, लंदन स्थित वह मकान जहां उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी, दीक्षा भूमि नागपुर, परिनिर्वाण स्थल अलीपुर रोड बंगला नई दिल्ली और चैत्य भूमि मुम्बई जहां उनका अंतिम संस्कार हुआ था। उन्होंने राज्य सरकार डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों पर चल रही है। जिन लोगों ने संविधान की धज्जियां उड़ाई, बाबा साहब का असम्मान किया वे लोग आज संविधान की बचाने का स्वांग रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के संविधान को कोई खतरा नहीं है।
श्री चौहान ने कहा कि बाबा साहब उच्च कोटि के समाज सुधारक थे। वे सम्पूर्ण समाज के आदर्श थे, जो वंचितों, शोषितों और पीड़ितों के लिये जीवनभर संघर्ष करते रहे। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के सिद्धांतों पर चलते हुये असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों के लिये अभूतपूर्व निर्णय लिये हैं। अब प्रदेश में कोई भी गरीब बिना मकान और जमीन के नहीं रहेगा। बच्चों को पहली से लेकर पीएचडी तक मुफ्त शिक्षा दी जायेगी। उनका मुफ्त इलाज होगा। बिजली उन्हें फ्लेट रेट पर मिलेगी। मजदूर बहनों को गर्भावस्था के दौरान चार हजार रूपये मिलेंगे और प्रसव के बाद बारह हजार रूपये अपने स्वास्थ्य और बच्चे की देखरेख के लिये दिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कमजोर वर्गों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनैतिक उत्थान के लिये प्रतिबद्ध है।
केन्द्रीय सामाजिक न्याय मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत ने डॉ. अम्बेडकर की स्मृति को चिरस्थाई बनाने और उनके बनाये गये संविधान का सम्मान करने में पूर्व की सरकारों ने कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि डॉ अम्बेडकर की स्मृति को जीवित रखने के लिये सभी महत्वपूर्ण कार्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में सम्पन्न हुये। उन्होंने बताया कि बाबा साहब की शिक्षा स्थली लंदन का घर खरीदने से लेकर परिनिर्वाण स्थल अलीपुर रोड स्थित को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने एवं महू को भव्य स्मारक के रूप में विकसित करने जैसे कार्य हुये हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के आदर्शों पर चलते हुये केन्द्र सरकार ने कई अनूठी योजनाएं और परियोजनाएं बनाई है जिससे कमजोर और वंचित वर्गों को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है।
महू के विधायक श्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने स्वागत भाषण में डॉ. अम्बेडकर की तुलना भगवान शिव से करते हुये कहा कि जिस प्रकार शिव ने विष पिया और अमृत दिया। उसी प्रकार बाबा साहब अम्बेडकर ने समाज को संविधानरूपी अमृत दिया।
राज्यपाल ने राष्ट्रपति को इंदौर के प्रसिद्ध राजवाड़े की प्रतिकृति, मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शौर्य स्मारक भोपाल की प्रतिकृत और भंते संघशील ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा भेंट की।
इस अवसर पर वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण मंत्री श्री लाल सिंह आर्य, जेल एवं पशुपालन मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य, क्षेत्रीय सांसद श्रीमती सावित्री ठाकुर, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री भूपेन्द्र आर्य, अम्बेडकर स्मारक समिति के अध्यक्ष भंते सदानंद और भंते संघशील और विशाल संख्या में देशभर से आये बाबा साहब के अनुयायी उपस्थित थे।

तानाशाह किम जोंग से राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात मई या फिर जून में

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपवति डोनाल्ड ट्रंप ने आज कहा कि वह अगले महीने या जून के शुरू में उत्तर कोरिया के नेता किम जांग उन से मिलेंगे। उन्होंने यह बात इस रिपोर्ट के बाद कही कि शिखर वार्ता में उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण पर बात करने के लिए तैयार है। कैबिनेट बैठक से पहले ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि शिखर वार्ता ‘मई में या जून के शुरू’ में होगी।

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने पार्टी की बैठक में अमेरिका के साथ होने वाली वार्ता का जिक्र किया। सरकारी मीडिया की एक रिपोर्ट में उक्त जानकारी दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ निर्धारित वार्ता से पहले उन्होंने पहली बार इस बात का जिक्र किया है। आधिकारिक समाचार समिति ‘केसीएनए’ की एक रिपोर्ट के अनुसार पार्टी अधिकारियों के साथ आज बैठक में किम ने कोरियाई प्रायद्वीप के हालात में हाल ही में हुए बदलावों पर एक रिपोर्ट पेश की।

उसने कहा किम ने ‘उत्तर – दक्षिण के संबंधों के मौजूदा विकास का गहन विश्लेषण तथा मूल्यांकन पेश किया और डीपीआरके और अमेरिका के बीच होने वाली वार्ता के पहलुओं का जिक्र किया।’ ‘डीपीआरके’ उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम है। कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ते तालमेल के मद्देनजर किम दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई-इन के साथ 27 अप्रैल को मुलाकात करेंगे। ट्रंप भी किम के साथ अगले माह ऐतिहासिक अमेरिका-उत्तर कोरिया शिखर वार्ता करने को तैयार हो गए हैं।
बहरहाल, प्योंगयांग ने व्हाइट हाउस के साथ वार्ता को लेकर परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए आधिकारिक तौर पर हामी नहीं भरी थी। वार्ता का संदेश अमेरिका तक दक्षिण कोरिया ने पहुंचाया था। किम के आज के बयान में ट्रंप के साथ वार्ता का विशेष रूप से जिक्र नहीं किया गया। शीत युद्ध प्रतिद्वंद्वियों के बीच गोपनीय वार्ता की कई खबरों के बीच ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि वह मई या जून की शुरुआत में किम के साथ वार्ता को तैयार हो गए हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने दी असद को चेतावनी, चुकानी पड़ेगी भारी कीमत!

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को हिंसा प्रभावित एक सीरियाई शहर में किए गए एक रसायनिक हमले को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि इसकी ‘भारी कीमत चुकानी पड़ेगी’। दरअसल, वहां दर्जनों सीरियाई मारे गए हैं। ट्रंप ने असद को एक ‘जानवर’ भी कहा और उनका समर्थन करने के लिए रूस एवं ईरान को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने रविवार को सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ‘सीरिया में रसायनिक हमले में महिलाओं और बच्चों सहित कई लोग मारे गए हैं। हमला स्थल को सीरियाई सेना ने घेर लिया और वहां बाहरी दुनिया की पहुंच पूरी तरह से रोक दी है।’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने असद शासन का समर्थन करने को लेकर अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन और ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति पुतिन, रूस और ईरान ‘जानवर असद’ का समर्थन करने के लिए जिम्मेदार हैं।’ उन्होंने कहा कि यदि (पूर्व) राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चाहा होता तो सीरियाई त्रासदी काफी समय पहले ही खत्म हो गई होती। उन्होंने ट्वीट किया, ‘जानवर असद इतिहास बन गया होता।’

ब्रिटेन आधारित निगरानी संस्था सीरियन आब्जरवेटरी फॉर ह्यूमन राइट के मुताबिक पूर्वी घोउटा के विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके में सीरियाई शासन के ताजा हवाई हमलों में कल से कम से कम 80 लोग मारे गए हैं। वहीं, सीरिया की सरकारी मीडिया और सीरियाई शासन के सहयोगी रूस ने रसायनिक हथियारों के इस्तेमाल के दावों की निंदा करते हुए इसे मनगढंत बताया। इस बीच, शीर्ष अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि सीरियाई रसायनिक हमला ट्रंप के लिए एक निर्णायक घड़ी है।

समर्पण को लेकर बातचीत कर रहे हैं पूर्व राष्ट्रपति लूला

साओ बर्नार्डो डो कैम्पो। ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति लुईज इनेसियो लूला डी सिल्वा अपने आत्मसमर्पण को लेकर बातचीत कर रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें 12 साल कैद की सजा हुई है। सजा की शुरूआत के लिए आज पहली समयसीमा से नाटकीय रूप से बच निकलने के बाद उन्होंने बातचीत का रास्ता अख्तियार किया है। लूला अपने गृहनगर साओ बर्नार्डो डो कैम्पो में धातुकर्मी यूनियन इमारत में अपने हजारों समर्थकों के साथ मौजूद रहे।

दो बार राष्ट्रपति रहे लूला और न्यायाधीश सर्जियो मोरो के बीच इस स्थिति के चलते गतिरोध बढ़ गया है। मोरो भ्रष्टाचार रोधी जांच के प्रमुख हैं और उन्होंने ही लूला को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। लूला को प्रभावी मानव ढाल से घिरे देखकर यह स्पष्ट है उन्हें जबर्दस्ती गिरफ्तार करने के किसी प्रयास से हिंसा भड़क सकती है। लेकिन अधिकारी तनाव घटाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने लूला की ओर से समयसीमा के उल्लंघन पर कोई कड़ी प्रतिक्रिया किए बिना कहा है कि लूला को भगोड़ा नहीं माना गया है।

मोरो के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘लूला ने न्यायिक आदेश का पालन नहीं किया, लेकिन हर कोई जानता है कि वह कहां हैं। वह छिप नहीं रहे हैं और न ही भाग रहे हैं।’ लूला की वर्कर्स पार्टी के नेताओं ने कहा कि वह रातभर साओ बर्नार्डो डो कैम्पो में ही रहेंगे और उनके वकील गिरफ्तारी के समय तथा स्थान के बारे में पुलिस से लगातार बात कर रहे हैं। ब्राजील के विभिन्न मीडिया संगठनों की खबरों में कहा गया है कि लूला आत्मसमर्पण पर विचार कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप मैक्सिको सीमा पर चार हजार सैनिक तैनात करना चाहते हैं

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह मैक्सिको के साथ सटी सीमा पर दो से चार हजार सैनिकों को भेजना चाहते हैं। उन्होंने अचानक होने वाली इस तैनाती में पहली बार सैनिकों की संख्या को लेकर संकेत दिये। ट्रंप ने कहा कि नेशनल गार्ड की तैनाती कहीं भी 2,000 से 4,000 तक होगी और वह सीमा पर तब तक सैनिकों को तैनात रखना चाहेंगे जब तक वहां पर दीवार नहीं बन जाती।

सीमा पर लंबे समय तक तैनाती में काफी खर्च आ सकता है जिस पर ट्रंप ने कहा कि व्हाइट हाउस इस पर विचार कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि सीमा पर शरणार्थियों की भारी संख्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है जिसे हल करने की जरुरत है। अगर 4,000 सैनिकों की तैनाती की जाती है तो यह संख्या सीरिया में अमेरिका द्वारा तैनात सैनिकों की संख्या से भी अधिक होगी और इराक में अमेरिकी सैनिकों की संख्या की आधी होगी। तनाव बढ़ने के बीच मैक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो ने आज ट्रंप पर बरसते हुए कहा कि, धमकी देना या निरादर करने वाला रवैया न्यायोचित नहीं है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, बेकार नेताओं की वजह से चीन से कई साल पहले ही हार चुके हैं व्यापार युद्ध

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चीन के साथ किसी भी तरह का व्यापार युद्ध नहीं लड़ रहा है क्योंकि उसे तो अमेरिका कई साल पहले अपने पूर्व‘ बेवकूफ औरबेकार’ नेताओं के चलते हार चुका है। हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट किया कि चीन के साथ वर्तमान व्यापार स्थिति को आगे और जारी नहीं रखा जा सकता है।

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, ‘हम चीन के साथ व्यापार युद्ध नहीं लड़ रहे हैं, उस युद्ध को तो कई साल पहले अमेरिका अपनेबेवकूफ बेकार लोगों के जरिए हार चुका है जो अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अब हमारा व्यापार घाटा500 अरब डॉलर का है। हम इसे जारी नहीं रख सकते हैं।’

राष्ट्रपति ट्रंप ने अप्रैल माह को यौन उत्पीड़न जागरूकता महीना किया घोषित

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज अप्रैल 2018 को‘ राष्ट्रीय यौन उत्पीड़नजागरूकता एवं रोकथाम माह’ घोषित किया है। राष्ट्रपति ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब अमेरिका में इसमुद्दे पर राष्ट्रीयबहस चल रही है और खुदट्रंप पर भी यौन दुराचार के आरोप लगे हैं। व्हाइट हाउस द्वारा ट्रंप की ओर से जारी घोषणा में कहा गया है, यह दुखद है कि हमारे समाज में यौन उत्पीड़नके अपराध अभी भी हो रहे है और अपराधी अक्सर जवाबदेही से बच जाते हैं। इस तरह के जघन्य अपराध लगातार अन्तरंग संबंध में, सार्वजनिक जगहों और कार्यस्थलों पर हो रहे हैं।

इसमें कहा गया है, “प्राय: उत्पीड़न के शिकार लोग खामोश रह जाते हैं। हो सकता है कि पीड़ितों को आरोपियों द्वारा प्रतिकार का डर लगता हो या फिर उनका विश्वास न्याय व्यवस्था में कम हो या इस तरह के अनुभव से उबरने में परेशानी होती हो।” विज्ञप्ति में कहा गया है कि, हमारा प्रशासन यौन उत्पीड़न के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए और पीड़ितों को सशक्त करके आरोपियों की पहचान करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि दोषियों को जिम्मेदार ठहराया जा सके।

वहीं अब तक ट्रंप पर कम से कम 20 महिलाओं ने सार्वजनिक तौर से यह आरोप लगाए हैं कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने से पहले उनका यौन उत्पीड़न किया या प्रताड़ित किया। हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा कि ये महिलाएं झूठ बोल रही हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने वापस लिया सेना में ट्रांसजेंडरों की भर्ती पर लगा बैन

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना में ट्रांसजेंडरों की भर्ती पर लगाए गएअपने व्यापक प्रतिबंध को वापस ले लिया। ट्रंप ने अब रक्षा और होमलैंड सुरक्षा विभाग के मंत्रियों को इस मुद्दे पर विचार करने का मौका दिया है। ट्रंप ने नए ज्ञापन पत्र में कहा कि, ‘मैं ट्रांसजेंडर द्वारा सेना में सेवा करने तथाइस संबंध में अन्य किसी निर्देश को लेकरदिये गये 25 अगस्त2017 के अपने ज्ञापन को वापस लेता हूं।’

इसमें कहा गया है कि, ‘अमेरिकी तटरक्षक बल के संबंध में रक्षा और होमलैंड सुरक्षा मंत्री ट्रांसजेंडर द्वारा सेना में सेवा देने से संबंधित उचित नीतियों को लागू करने में अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं।’

विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश हुए मुख्यसचिव

जयपुर। विगत विधानसभा बजट सत्र के दौरान समय पर सालाना प्रतिवेदन पेश नहीं करने पर आज मुख्यसचिव एन सी गोयल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल के समक्ष पेश हुए ।

संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड ने यह जानकारी देते हुए बताया कि विगत बजट सत्र में समय पर विभाग के सालाना प्रतिवेदन पेश नहीं करने के मामले में मुख्य सचिव एन सी गोयल, अतिरिक्त मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन, संसदीय कार्य विभाग समेत अन्य अधिकारियों ने अध्यक्ष कैलाश मेघवाल के समक्ष उपस्थित होकर भविष्य में समय पर सालाना प्रतिवेदन पेश करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने अधिकारियों को भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं होने और समय पर प्रतिवेदन पेश करने के निर्देश दिए हैं।

राठौड ने कहा कि मुख्य सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उन सभी विभागों की ओर से पेश हुए, जिन विभागों के सालाना प्रतिवेदन सत्र के दौरान पेश नहीं किये गये थे। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष ने यह मामला समाप्त कर दिया है।

गौरतलब है कि समाप्त हुए बजट सत्र में भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाडी ने विभागों के सालाना प्रतिवेदन पेश नहीं करने का मामला दो बार उठाया था। आसन ने सम्बधित विभागों के वरिष्ठतम अधिकारी को आज 22 मार्च को उनके समक्ष पेश होने के आदेश दिए थे।