Questions of Amit Shah to Opposition parties on EVM dispute – Amit Shah: ईवीएम पर विश्वास नहीं तो विपक्षी पार्टियों ने चुनाव जीतने पर सत्ता क्यों संभाली-अमित शाह

नई दिल्ली। चुनाव परिणाम से पहले ईवीएम को लेकर पूरा विपक्ष एक साथ आरोप लगा रहा है। विपक्ष परिणामों से पहले ही ईवीएम को लेकर दोष मढ़ रहा है। विपक्ष के इस तरह के रवैये पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि हार से बौखलाई यह 22 पार्टियां देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवालिया निशान उठा कर विश्व में देश और अपने लोकतंत्र की छवि को धूमिल कर रही है। मैं इन सभी पार्टियों से कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूं।
1-ईवीएम की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाने वाली इन अधिकांश विपक्षी पार्टियों ने कभी न कभी ईवीएम द्वारा हुए चुनावों में विजय प्राप्त की है। यदि उन्हें ईवीएम पर विश्वास नहीं है तो इन दलों ने चुनाव जीतने पर सत्ता के सूत्र को क्यों सम्भाला?

2- देश की सर्वोच्च अदालत ने तीन से ज्यादा पीआईएल का संज्ञान लेने के बाद चुनावी प्रक्रिया को अंतिम स्वरूप दिया है, जिसमें की हर विधानसभा क्षेत्र में पांच वीवीपैट को गिनने का आदेश दिया है. तो क्या आप लोग सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं?

3- मतगणना के सिर्फ दो दिन पूर्व 22 विपक्षी दलों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में परिवर्तन की मांग पूर्णत: असंवैधानिक है क्योंकि इस तरह का कोई भी निर्णय सभी दलों की सर्वसम्मति के बिना सम्भव नहीं है।
4- विपक्ष ने ईवीएम के विषय पर हंगामा छ: चरणों का मतदान समाप्त होने के बाद शुरू किया। एक्जिट पोल के बाद यह और तीव्र हो गया। एक्जिट पोल ईवीएम के आधार पर नहीं बल्कि मतदाता से प्रश्न पूछ कर किया जाता है। अत: एक्जिट पोल के आधार पर आप ईवीएम की विश्वसनीयता पर कैसे प्रश्न उठा सकते है? इसके बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम को वीवीपैेट से जोड़ कर चुनावी प्रक्रिया को और पारदर्शी किया। वीवीपैट प्रक्रिया के आने के बाद मतदाता मत देने के बाद देख सकता है कि उसका मत किस पार्टी को रजिस्टर हुआ. प्रक्रिया के इतने पारदर्शी होने के बाद इस पर प्रश्न उठाना कितना उचित है।

5-ईवीएम में गड़बड़ी के विषय पर प्रोएक्टिव कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से चुनौती देकर इसके प्रदर्शन का आमंत्रण दिया था। परन्तु उस चुनौती को किसी भी विपक्षी दल ने स्वीकार नहीं किया।

6-कुछ विपक्षी दल चुनाव परिणाम अनुकूल न आने पर हथियार उठाने और खून की नदिया बहाने जैसे आपत्तिजनक बयान दे रहे है। विपक्ष बताये कि ऐसे हिंसात्मक और अलोकतांत्रिक बयान के द्वारा वह किसे चुनौती दे रहा है? ईवीएम पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे प्रश्न सिर्फ भ्रान्ति फैलाने का प्रयास है, जिससे प्रभावित हुए बिना हम सबको हमारे प्रजातांत्रिक संस्थानों को और मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए।