Home देश Supreme Court, in favor of resolving the matter with the arbitration on Ram temple case:राम मंदिर मामले पर मध्यस्तता से मामला सुलझाने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट,

Supreme Court, in favor of resolving the matter with the arbitration on Ram temple case:राम मंदिर मामले पर मध्यस्तता से मामला सुलझाने के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट,

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अयोध्या भूमि विवाद मे पक्षकार हिन्दू महासभा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में यह कहा कि वह विवाद सुलझाने के लिए किसी भी तरह की मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है। महासभा ने पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ से दशकों पुराने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद केस में फैसला सुनाने की मांग करते हुए कहा- हमारे लिए यह भावनात्मक मुद्दा है। महासभा ने कहा कि पक्षकारों की तरफ से फैसले के लिए 1950 से इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा- यह देवता की संपत्ति है और इसमें मध्यस्थता के लिए किसी को अधिकार नहीं है।
हिन्दू महासभा की तरफ से रखी गई इन बातों पर जस्टिस एस.ए. बोबडे ने कहा- क्या आप इस पूरे मुद्दे पर पहले ही फैसला नहीं कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट जज ने कहा- आप यह कह रह हैं कि बिना प्रयास के ही यह विफल है। हम यह मानते है कि ऐसा उचित नहीं है। अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह विवाद की गंभीरता और देश की राजनीति पर इस मध्यस्थता के नतीजे के असर से वाकिफ है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि मामला सिर्फ संपत्ति का नहीं है बल्कि यह भावनाओं और आस्था से भी जुड़ा है।
संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। संविधान पीठ ने कहा, यह सिर्फ संपत्ति का विवाद नहीं है। यह सोच , भावना और अगर संभव हुआ तो निदान से जुड़ा मामला है।
पीठ ने कहा, ”मुगल शासक बाबर ने क्या किया और उसके बाद क्या हुआ हमें इससे मतलब नहीं है। मौजूदा समय में क्या हो रहा है, हम बस इसी पर विचार कर सकते हैं। शीर्ष अदालत विचार कर रही है कि क्या इस विवाद को मध्यस्थता के जरिये सुलझाया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने सभी पक्षकारों को दशकों पुराने इस विवाद को मैत्रीपूर्ण तरीके से मध्यस्थता के जरिये निपटाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया था। न्यायालय ने कहा था कि इससे ”संबंधों को बेहतरबनाने में मदद मिल सकती है। शीर्ष अदालत में अयोध्या प्रकरण में चार दिवानी मुकदमों में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ 14 अपील लंबित हैं। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि तीनों पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निमोर्ही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बांट दी जाये।

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