SAMANA SAWALO KA BY AJAY SHUKLA WITH KALRAJ MISHRA: मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर संगठन शास्त्र के ज्ञाता हैं : कलराज मिश्र

अंबाला। आज स्थिति यह है भारतीय जनता पार्टी केवल देश की ही नहीं, दुनिया की भी सबसे बड़ी पार्टी है। देश के कई प्रदेशों में भी आज भाजपा की सरकार है। मेरी आयु के कारण शारीरिक रूप में जरूर अंतर आया होगा, लेकिन सोच, चिंता और दृढ़ता, सैद्धांतिकता, समर्पण में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं आया। मैं मार्गदर्शक मंडल में नहीं हूं, मार्गदर्शक मंडल में हमारे आडवानी जी व डॉक्टर जोशी जी हैं। यह लोग हमारे प्रेरणास्रोत हैं। पार्टी जो भी जिम्मेदारी दे रही है, मैं उस पर काम कर रहा हूं। सामाजिक समरसता का यदि कोई निर्माण कर सकता है तो वह भारतीय जनता पार्टी है। इंडिया न्यूज हरियाणा के सामना सवालों का में भाजपा के कद्दावर नेता और हरियाणा लोकसभा चुनाव प्रभारी कलराज मिश्र आईटीवी नेटवर्क (मल्टी मीडिया) के प्रधान संपादक अजय शुक्ल के सवालों का मझे हुए राजनीतिज्ञ की तरह बखूबी जवाब दे रहे थे। प्रस्तुत हैं सवाल और जवाब के प्रमुख अंश।

सवाल: जनसंघ से लेकर भाजपा में आप प्रचारक के रूम में शामिल हुए। उस जनसंघ और आज के भाजपा में क्या अंतर है?
जवाब: भारतीय जनसंघ के समय हमारी पार्टी बहुत सीमित थी। उस समय जनसंघ के बारे में यही कहा जाता था कि किसी को सहयोग देकर सरकार बनाने में सहयोगी तो हो सकती है, लेकिन सरकार नहीं बना सकती। आज भिन्न स्थिति का निर्माण हो गया है। आज स्थिति यह है भारतीय जनता पार्टी केवल देश की ही नहीं, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और केवल केंद्र में ही नहीं राज कर रही, बल्कि देश के कई प्रदेशों में भी भाजपा की सरकार है।

सवाल: उत्तराखंड बनाने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। जब उत्तराखंड का गठन किया गया तो आप उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष और लोक निर्माण के मंत्री और महामंत्री भी थे, उस दौरान उत्तर प्रदेश से अलग तोड़कर उत्तराखंड राज्य बनना था, एक आंदोलन चल रहा था, उसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इस पर आप क्या कहेंगे?
जवाब: उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश एक होते थे, जिसे उत्तर प्रदेश कहा जाता था। महामंत्री के रूप में मैने पूरे उत्तराखंड का शायद ही कोई ब्लॉक होगा, जिस ब्लॉक में मेरा जाना न हुआ हो। मुझे तो लोग कहते थे कि मैं उत्तर प्रदेश में बनारस या गाजीपुर का रहने वाला नहीं हूं, यह तो कुमायु अथवा गढ़वाल के रहने वाले हैं। इसलिए उस भ्रमण का यह परिणाम था कि आज जो नेतागण दिख रहे हैं वह सब हमारे संबंधों के आधार पर आए हुए लोग हैं। उस समय यह बात चलती थी कि उत्तराखंड अलग होना चाहिए। इसके लिए बार-बार आंदोलन चलाया गया। बाद का जो आंदोलन चला उसके संयोजक के रूप में मैं रहा, जब हमारी सरकार बनी तो उत्तरखंड अलग बने इसके लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराया गया। मायावती के साथ में जब सरकार बनी थी तो उस समय भी उत्तराखंड को अलग बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया था, लेकिन उस समय नहीं हो पाया। बाद में जब केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो प्रस्ताव पास कर दिया गया और उत्तराखंड को अलग राज्य बनाया गया। उत्तराखंड राज्य बनाने में उत्तरप्रदेश में कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे और मैं मंत्री था, उस समय मुझे संयोजक बनाया गया था, पूरे उत्तराखंड में कौन-कौन से क्षेत्र हैं, कैसे-कैसे क्या होना चाहिए उस करके उत्तराखंड बना।

सवाल: गाजीपुर से देवरिया, बनारस और वहां से लेकर लखनऊ के पूर्वी से लेकर पश्चिमी क्षेत्र में आपने जमीनी स्तर पर काम किया था, वर्ष 1991 में अटलजी चुनाव लड़ रहे थे और आप कमान को संभाल रहे थे। वह एक दौर के और आज के कलराज मिश्र में क्या फर्क है?
जवाब: उस समय कलराज मिश्र पूरे युवा थे, आज कलराज मिश्र बुजुर्गों की श्रेणी में आ गए हैं। उस समय भी जो जिम्मेदारी दी जाती थी, उसको प्राथमिकता, ईमानदारी और परिश्रम के साथ पालन करते थे। इस समय भी मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जा रही है आयु की चिंता न करते हुए जिम्मेदारी का निर्वहन करने का प्रयास करता हूं, इसमें तो कोई अंतर नहीं आया। लेकिन आयु के कारण शारीरिक रूप में जरूर अंतर आया होगा, लेकिन सोच, चिंता और दृढ़ता, सैद्धांतिकता, समर्पण में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं आया।

सवाल: आपके तमाम शिष्य कोई मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और कोई देश का गृहमंत्री बन गया। अब आप कहीं मार्गदर्शक की श्रेणी में दिखाई देते हैं। यह क्यों हो रहा है?
जवाब: मैं मार्गदर्शक मंडल में नहीं हूं, मार्गदर्शक मंडल में हमारे आडवानी जी, डॉक्टर जोशी जी हैं। यह लोग हमारे प्रेरणास्रोत हैं। पार्टी जो भी जिम्मेदारी दे रही है मैं उस पर काम कर रहा हूं। यह बात सही है, जितने भी उत्तर प्रदेश और केंद्र के कई लीडरशिप रहे हैं जिनके यहां तक पहुंचने में मेरा अहम योगदान रहा है। मैं सहयोगी के रूप में रहा हूं, सहयोगियों के अंदर कार्य करने की प्रतिभा और क्षमता को समझकर उचित स्थान दिलाने के लिए हमने लगातार प्रयास किया है। यदि उसके लिए संघर्ष करना पड़ा है तो संघर्ष भी किया है।

सवाल: हरियाणा को दिल्ली तीन तरफ से घेरता है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। इस राज्य में आपको कमान दी गई है। भाजपा ने पिछले चुनाव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। आपके ऊपर अब यह जिम्मेदारी है कि सही प्रत्याशी का चयन करें कि भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर लोकसभा चुनाव कीर्तमान स्थापित करे।
जवाब: एक महीने पहले मुझे यह जिम्मेदारी दी गई कि लोकसभा चुनाव के प्रभारी के रूप में आप रहेंगे। यहां योग्य लोग हैं, अनिल जैन जी अखिल भारतीय के महामंत्री हैं जो वहां के प्रभारी हैं। मुख्यमंत्री मनोहरलाल जी संगठन शास्त्र के ज्ञाता और संगठन मंत्री भी रहे हैं। वहीं राम बिलास शर्मा जी बहुत पुराने और भाजप को आगे बढ़ाने में योगदान देते रहे हैं। यहां टीम और अन्य लोगों से मिलने के बाद यह तय हो गया कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने कल्याणकारी कार्य पारदर्शिता पूर्ण किया है। यह रणनीति बनाई कि हम हरियाणा की दस की दस सीटों को जीते, इसी पर हमारा काम चल रहा है।

सवाल: हरियाणा में भाजपा सरकार के साढ़े चार साल हो चुके हैं। इस दौरान हरियाणा सरकार के जो काम रहे हैं उस पर पक्ष कुछ और विपक्ष कुछ कहता है। ऐसे दावे के बीच में आप क्या समझते हैं कि जनता मनोहर लाल के दावे पर मुहर लगाएगी?
जवाब: मुझे विश्वास है कि यहां जो कार्य हुआ है संगठन के आधार पर हुआ है। इस कौशल से हुआ है कि जिसके आधार पर जनता विश्वास कर सकती है। साढ़े चार साल के मनोहर लाल की सरकार पर किसी भी प्रकार का आरोप नहीं है, यह सबसे बड़ी उपलब्धि है। सबसे बड़ा उदाहरण देना चाहूंगा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जो कार्य इतनी पारदर्शिता पूर्ण किए हैं कि पहली बार लोगों को लगा कि बिना पैसे दिए हुए भी घर बैठे गु्रप डी का नियुक्ति पत्र मिल गया। मैं मानकर चलता हूं कि सुशासन प्रदान करने में आम आदमी में जो विश्वास पैदा हुआ है इसमें हमारी सरकार की उपलब्धि काफी सहयोगी रही। इसी आधार पर हम चुनाव जीतेंगे।

सवाल: जब आप उत्तर प्रदेश की बात करते हैं तो केंद्र की सत्ता की डोरी यूपी से चलती है। यूपी में भी आपका अपना क्षेत्र बनारस है, जहां से बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेकर आप आगे बढ़ते हैं, मोदी जी ने भी बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया तो आपको लगता है कि इस बार बनारस फिर वैसे ही सहयोग देगा जैसे देता आया है?
जवाब: आज वाराणसी में कोई जाता है तो उसको लगता है कि सांस्कृतिक स्वरूप, वाराणसी की स्वच्छता, मां गंगा का सौंदर्यीकरण व निर्मल धारा इस बात को प्रगट कर रही है कि वर्तमान प्रधानमंत्री ने गंगा, वाराणसी और उस क्षेत्र का जो सांस्कृतिक स्वरूप है, को मूर्तिरूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है।

सवाल: प्रियंका गांधी गंगा में सफर करके प्रयाग से वाराणसी, काशी तक पहुंचती है और कहतीं हैं कि कुछ नहीं हुआ।
जवाब: मुझे लगता है प्रियंका जी विरोधी दल की महासचिव हैं उनका यह कहना बड़ा स्वभाविक है। लेकिन वह (प्रियंका गांधी) स्वयं अनुभव करती हैं कि गंगा की निर्मल और स्वच्छता उन्होंने (प्रियंका) कभी देखी नहीं होगी। गंगा के घाट का स्वरूप और इतना स्वच्छ कभी देखा नहीं होगा। इससे पहले उन्होंने (प्रियंका) ने कभी गंगा का भ्रमण ही नहीं किया होगा। उन्होंने प्रथम बार मां गंगा के रास्ते भ्रमण किया, इसलिए उन्हें यह कल्पना नहीं होगी कि इससे पहले गंगा कैसी थी। मुझे यह लगता है उनका (प्रियंका) गंगा का भ्रमण करना, गंगा का आकर्षण ने उनको अपनी ओर खींचा।

सवाल: उत्तर प्रदेश में लोकनिर्माण मंत्री रहते हुए आपने गड्ढा मुक्त सड़कों की शुरुआत की थी। इसे अटल जी ने एक ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में लिया। भाजपा उस प्रोजेक्ट को पूरे देश में क्यों नहीं ला सकी?
जवाब: गड्ढा मुक्त और चौड़ीकरण का अभियान हमने चलाया था, जो सफल हुआ।

सवाल: आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मुहिम को सफल नहीं कर पा रहे हैं। चंडीगढ़ से अंबाला होते हुए जैसे ही यमुनानगर क्रॉस करेंगे, वहां लिखा आएगा कि उत्तर प्रदेश आपका स्वागत करता है, वैसे की गड्ढायुक्त सड़कें देखने को मिल जाएंगी।
जवाब: इस समय भी गड्ढामुक्त अभियान लोगों ने चलाया है। उसे ठीक करने का प्रयास सरकार की ओर से किया जा रहा है।

सवाल: आपको (कलराज मिश्र) भारतीय जनता पार्टी के एक ब्राह्मण नेता के रूप में माना जाता रहा है। आपको ऐसा चेहरा माना जाता रहा है कि जब जहां जरूरत हो तो वहां फिट कर दिया जाए।
जवाब: मैं एक ब्राह्मण परिवार में पैदा हुआ हूं। उस परिवार में पैदा होने का मुझे गर्व है। मैं समाज के हर वर्ग को अपना व्यक्ति मानता हूं। इसका परिणाम यह है कि ठीक है ब्राह्मण वर्ग और समाज के लोग हमें ऊंचा स्थान देते हैं। यह उनकी कृपा और आशीर्वाद है। मैं समाज के सभी वर्ग के साथ जुड़कर काम करता हूं, सभी को आगे बढ़ाने का प्रयास करता हूं। मैं सभी का नेता हूं।

सवाल: आज भी याद आता है कि जब कल्याण सिंह मुख्यमंत्री होते थे और राजनाथ सिंह प्रदेश अध्यक्ष, फिर ऐसा हुआ कि कलराज मिश्र को वापस प्रदेश अध्यक्ष बनाना पड़ा था। वह दौर था, जब भारतीय जनता पार्टी में शब्दों की गरिमा होती थी। भारतीय जनता पार्टी का मतलब संस्कार होते थे। आज की राजनीति में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती।
जवाब: मैंने उत्तर प्रदेश में 10 साल राजनीति की। बाद में हमें जबरदस्ती मंत्रीमंडल में रखा गया। समय-समय पर विभिन्न प्रकार की जिम्मेदारियां चाहे वह संगठन अथवा मंत्रीमंडल की ही दी गई। हमने जिम्मेदारी को पूरी निष्टा से पूरा किया। जहां तक शब्दों के मर्यादा का प्रश्न है यह व्यक्ति विशेष से संबंधित है। शब्द ब्रम्ह है, ब्रम्ह-ब्रम्ह होता है। ब्रम्ह की मर्यादा को सुनिश्चित करना हमारा नैतिक दायित्व है। शब्दों की भी पूजा अर्चना करनी चाहिए। शब्दों की यदि पूजा अर्चना करनी है तो उसकी मर्यादा को बनाए रखना होगा। किसी की आलोचना भी करनी है तो वह भी मर्यादित होनी चाहिए। शब्दों का उन्मूलन हम ब्रम्ह का उन्मूलन मानते हैं। इसलिए हम यह सदैव प्रयास करते हैं कि हमारे द्वारा शब्द रूपी द्रव्य का उन्मूलन न होने पाए।

सवाल: हरियाणा ऐसा रहा है कि यहां 36 बिरादरी है, यहां वैश्य समुदाय का बहुत बड़ा योगदान है। यह अग्रसेन महाराज का क्षेत्र है। यह वह क्षेत्र हैं जहां जाट ने ऊसर जमीन को उपजाऊ जमीन बनाया। यह वह राज्य है जहां इंडस्ट्री की लंबी इमारत खड़ी हो गई है। ऐसे में यहां आपकी सरकार पर आरोप लगता है कि यहां समाजिक विषमताएं पैदा की हैं, क्या सच है?
जवाब: यह कदापि सच नहीं है, हम जिस गीता की आराधना और उपासना करते हैं वह गीता यहीं से सृजित हुई है। भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश के माध्यम से गीता सृजन यहीं से हुआ है। हम तो गीता के उपासक हैं, यहां सब समान हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में यह उपदेश दिया है कि सभी समान और एक हैं। सामाजिक समरसता का यदि कोई निर्माण कर सकता है तो वह भारतीय जनता पार्टी है।

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