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किसानों को मिले लाभकारी मूल्य, दलहन निर्यात पर प्रतिबंध हटा

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नयी दिल्ली। सरकार ने सभी तरह की दालों के निर्यात पर लगा प्रतिबंध उठा लिया है। देश में दालों की रिकार्ड पैदावार और इनके दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चले जाने के बीच किसानों को दलहन के लाभकारी दाम दिलाने के ध्येय से यह कदम उठाया गया है। देश में फसल वर्ष 2016-17 (जुलाई से जून) में दालों का रिकॉर्ड दो करोड़ 29 लाख टन उत्पादन हुआ। इसके अलावा सरकार ने पिछले साल 50 लाख टन दालों का आयात भी किया जिससे घरेलू बाजार में इनके दाम तेजी से नीचे आ गये। भारत दालों का सबसे बड़ा आयातक होने के साथ साथ उत्पादक भी है।

सरकार को इस साल भी अच्छी फसल की उम्मीद है जबकि देश में पहले ही दालों का 18 लाख टन बफर स्टॉक मौजूद है। एक सरकारी बयान में कहा गया है, ‘‘आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने सभी प्रकार के दलहन निर्यात पर जारी प्रतिबंध को हटाने को मंजूरी दे दी है। किसानों को अपने उत्पाद को बेचने के लिये बेहतर विकल्प उपलब्ध हो और उन्हें उनके उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिले यह सुनिश्चित करने के लिये यह निर्णय किया गया।’’ इस वर्ष सितंबर में सरकार ने तुअर, उड़द और मूंग दाल के निर्यात पर लगी रोक को हटाया था। हालांकि, दलहन की इन किस्मों का निर्यात करने की तभी अनुमति थी जब इसके लिए कृषि निर्यात संवर्धन निकाय एपीडा से अनुमति ली गई हो। जैविक दलहनों और काबुली चना का निर्यात सीमित मात्रा में करने की अनुमति दी गई।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में  हुई केन्द्रीय मंत्रिंमंडल की बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘सभी प्रकार के दलहनों का निर्यात खोले जाने से किसानों को अपने उत्पाद को लाभकारी मूल्यों पर बेचने में मदद मिलेगी तथा उन्हें बुवाई रकबा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण सचिव की अगुवाई वाली समिति को दलहन निर्यात एवं आयात नीति की समीक्षा करने के लिए अधिकृत किया। उन्हें मात्रात्मक प्रतिबंध, पूर्व पंजीकरण तथा घरेलू उत्पादन एवं मांग के आधार पर आयात शुल्क में बदलाव, स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय कीमतें तथा वैश्विक व्यापार के आकार जैसे उपायों पर विचार करने को कहा गया।

उन्होंने कहा कि दलहनों का निर्यात, दलहनों के अतिरिक्त उत्पादन के लिए एक वैकल्पिक बाजार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इससे देश और निर्यातकों को उनका निर्यात बाजार फिर से हासिल करने में मदद मिलेगी। भारतीय दलहन और अनाज संघ ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया। संघ के अध्यक्ष प्रवीण डोंगरे ने कहा इस फैसले के बाद दाम में आई गड़बड़ी दूर होगी। दलहन जो कि न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे बिक रहे हैं उन्हें समर्थन मिलेगा और दाल उद्योग में फिर से जान आयेगी।

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