Home टॉप न्यूज़ Prime Minister inaugurated India’s longest bridge:प्रधानमंत्री ने किया भारत के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन

Prime Minister inaugurated India’s longest bridge:प्रधानमंत्री ने किया भारत के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन

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असमी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम में डिब्रूगढ़ के निकट बोगीबील में ब्रह्मपुत्र नदी पर देश के सबसे लंबे रेल-सह-सड़क पुल का उद्घाटन किया। नई दिल्ली से दोपहर में डिब्रूगढ़ पहुंचने के बाद मोदी ने एक हेलिकॉप्टर से सीधे बोगीबील के लिए उड़ान भरी और नदी के दक्षिणी किनारे से 4.94 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर पुल का उद्घाटन किया। लोगों का अभिवादन करने के बाद मोदी कार से उतरे और असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के साथ पुल पर कुछ मीटर तक चले। प्रधानमंत्री ने ब्रहमपुत्र के उत्तरी किनारे पर अपने काफिले के साथ पुल को पार किया जहां वह तिनसुकिया-नाहरलागुन इंटरसिटी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखायेंगे। यह ट्रेन एक सप्ताह में पांच दिन चलेगी। इस पुल से असम में तिनसुकिया और अरूणाचल प्रदेश के नाहरलागुन के बीच ट्रेन की यात्रा का समय 10 घंटे से अधिक तक कम हो जायेगा। मोदी के दिन में धेमाजी जिले में एक जनसभा को भी संबोधित करने का कार्यक्रम है। विशाल ब्रह्मपुत्र नदी पर बना, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण यह पुल अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए कई तरह से मददगार होगा। डिब्रूगढ़ से शुरु होकर इस पुल का समापन असम के धेमाजी जिले में होता है। यह पुल अरुणाचल प्रदेश के भागों को सड़क के साथ-साथ रेलवे से जोड़ेगाा। असम समझौते का हिस्सा रहे बोगीबील पुल को 1997-98 में मंजूरी दी गई थी। ऐसा माना जा रहा है कि यह पुल अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पास रक्षा गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। इस परियोजना की आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने 22 जनवरी,1997 को रखी थी जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में 21 अप्रैल,2002 को इसका काम शुरु हुआ था। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने 2007 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। 25 दिसंबर को वाजपेयी की जयंती है। इसके क्रियान्वयन में देरी के कारण इस परियोजना की लागत 85 प्रतिशत तक बढ़ गई। इसकी अनुमानित लागत 3,230.02 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर 5,960 करोड़ रुपये हो गई। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि इस पुल का सबसे बड़ा फ ायदा यह होगा कि इससे सैनिकों को दक्षिणी किनारे से उत्तरी किनारे जाने में आसानी होगी।

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