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Positive Mandate: सकारात्मक जनादेश

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देश में 17वीं लोकसभा के गठन के लिए जनादेश आ चुका है। नागरिकों ने एक बार फिर से भाजपा की मोदी सरकार पर भरोसा जताया है। सितंबर 2013 में जब भाजपा की नाव डगमगा रही थी तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव मैदान में उतारा था। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जब उन्हें प्रस्तुत किया था तब भाजपा के कुछ वरिष्ठ रूढिवादी नेताओं ने विरोध किया था। मोदी के चेहरे पर 2014 में पहली बार किसी गैर कांग्रेसी सरकार ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी। अच्छे दिनों के वायदे के साथ आई मोदी सरकार ने तमाम उम्मीदों पर काम किया। उन्होंने जो सबसे बड़ा काम किया वह राष्ट्रवाद और सैन्य सम्मान के जरिए एक मजबूत दिखने वाली छवि बनाने पर रही। उन्होंने साफ सफाई से लेकर सुरक्षा तक की बात की। इसका नतीजा यह रहा कि 2019 के चुनाव में वह अच्छे दिनों के वादे लेकर नहीं गये बल्कि अबकी बार फिर मोदी सरकार, के नारे के साथ जनता के बीच गये।
गुरुवार को लंबे लोकतांत्रिक पर्व का जब परिणाम आया तो अबकी बार और मजबूत मोदी सरकार का नारा जनता ने दे दिया। चुनाव के दौरान मोदी पर कई तरह के आरोप भी लगे और स्तरहीन चुनाव बनाने का लांछन भी। जनता ने सभी लांछनों और आरोपों को दरकिनार करके मोदी को मजबूत किया, क्योंकि उसे एक मजबूत सरकार की दरकार थी। मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस न तो मोदी की रणनीति को समझ सकी और न ही उसके नेता खुद को उस स्तर तक ला पाये कि वो मुकाबला कर सकते। हालांकि पिछली दफा से अच्छा जनादेश लेकर आये मगर विपक्ष में ही बैठने का। पांच साल विपक्ष में रहने के दौरान भी कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपना काडर नहीं खड़ा कर पाई। वह सिर्फ नकारात्मक प्रचार में ही लगी रही। वह भूल गई कि इसी नकारात्मक प्रचार ने मोदी को देश का हीरो बनाया था। कांग्रेस के पास न तो उस स्तर का संगठन रहा और न ही चिंतक। बूथ स्तर के कार्यकतार्ओं का भी अभाव था।
बहराल, जनता ने मोदी पर भरोसा जताया है। मोदी के सामने भी चुनौती है कि वह कैसे 130 करोड़ के देश के लोगों को एक सुरक्षित जीवन देने के लिए क्या करेंगे। जरूरत युवाओं को रोजगार की भी है। व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की भी दरकार है। जनादेश इतना सकारात्मक है कि मोदी जो चाहें कर सकते हैं, बस अब उन्हें मन की बातों के बजाय लोगों की जरूरतों को पूरा करने पर काम करना होगा। करदाताओं को सामाजिक सुरक्षा का अहसास कराना होगा। राष्ट्र को वास्तव में सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।
जय हिंद।

अजय शुक्ल

(लेखक आईटीवी नेटवर्क के प्रधान संपादक हैं)

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