Home संपादकीय Political tension in Punjab Congress on Pulwama blast: पुलवामा विस्फोट पर पंजाब कांग्रेस में सियासी तनाव

Political tension in Punjab Congress on Pulwama blast: पुलवामा विस्फोट पर पंजाब कांग्रेस में सियासी तनाव

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पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों पर हुआ आत्मघाती हमला पंजाब कांग्रेस पर भारी पड़ रहा है। पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो या उससे फिर वार्ता शुरू की जाए, इसे लेकर मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। रही बात अमरिंदर सिंह और सिद्धू के संबंधों की तो वे हमेशा से ही तल्ख रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू जब भाजपा के अंग थे तब भी और जब कांग्रेस का हाथ उनके सिर पर है तब भी, वे अमरिंदर सिंह के आंखों की किरकिरी बने हुए हैं। पुलवामा में आत्मघाती आतंकी हमले के बाद पंजाब और कांग्रेस की राजनीति एक बार फिर सरगर्म हो गई है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के मतभेद फिर सतह पर आ गए हैं। पाकिस्तान को लेकर दोनों ही नेताओं के रुख परस्पर भिन्न हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह चाहते हैं कि अब पाकिस्तान से बात न की जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्कता है जबकि नवजात सिंह सिद्धू का मानना है कि दोनों देशों को मिल-बैठकर बातचीत करनी चाहिए और आतंकवाद की समस्या का स्थायी समाधान तलाशना चाहिए। कुछ लोगोें की हरकत के लिए किसी राष्ट्र को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। सिद्धू का यह बयान कैप्टन अमरिंदर सिंह ही नहीं, किसी भी भारतवासी को पसंद नहीं आया है। अपने इस बयान के लिए सिद्धू सोशल मीडिया पर खूब आलोचित भी हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर तो उनसे यहां तक कहा जा रहा है कि वे कपिल शर्मा का शो देखना बंद करें। सिद्धू का पाकिस्तान और इमरान प्रेम एक बार फिर उनके गले की हड्डी बन गया है। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब सिद्धू में पाकिस्तान के प्रति साफ्ट कॉर्नर झलका हो। जब उनके विचारों और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के सुर अलग-अलग नजर आए हों।
इससे पहले जब नवजोत सिंह के पाकिस्तान गए थे और वहां जाकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से गले मिले थे तब भी कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उनकी मुखर आलोचना की थी। कैप्टन ने उस समय कहा था कि पाकिस्तान सीमा पर और देश में हमारे लोगों की हत्याएं कर रहा है। ऐसे में वहां के सेना प्रमुख को गले लगाना शहीद सैनिकों का अपमान है। सिद्धू करतारपुर कॉरिडोर के पाकिस्तान में शिलान्यास के मौके पर भी वहां चले गए थे। उन पर उस समय भी आरोप लगे थे कि वे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की राय को महत्व नहीं दे रहे हैं और सर्वथा मनमाना-घरजाना व्यवहार कर रहे हैं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह द्बारा मना करने के बावजूद पाकिस्तान जाने पर दोनों नेताओं के बीच जमकर विवाद हुआ था। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान तेलंगाना में सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के बारे में सवाल पूछे जाने पर जो विवादित बयान दिया था, उससे भी दोनों नेताओं के बीच विचारधारा की तलवार खिंच गई थी। गौरतलब है कि तब सिद्धू ने एक पत्रकार के पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि कौन कैप्टन, अच्छा कैप्टन अमरिंदर सिंह। अरे वह तो सेना के कैप्टन हैं। मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं। मेरे और अमरिंदर सिंह दोनों के कैप्टन राहुल गांधी हैं। यह बात मुख्यमंत्री को बेहद नागवार गुजरी थी। सिद्धू उनके निशाने पर आ गए थे। यह और बात है कि सिद्धू ने समय रहते अमरिंदर से माफी मांगकर बात संभाल ली थी। लुधियाना में आयोजित दशहरा मेले में ज्यादातर लोगों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। सिद्धू की पत्नी मौका देखकर वहां से भाग गई थीं। उस समय भी सिद्धू कैप्टन अमरिंदर के निशाने पर आ गए थे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह जहां पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए आत्मघाती हमले को बर्दाश्त से बाहर बता रहे हैं। पाकिस्तान पर सख्त कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं। पंजाब की बबार्दी के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं नवजोत सिंह सिद्धू द्बारा पाकिस्तान की तरफदारी उन्हें शूल सी चुभ रही है। अमरिंदर सिंह की इस बात में दम है कि पाकिस्तान ने पंजाब में भी पहले आतंकवाद फैलाया और इसका हमें भारी खामियाजा भुगतना पड़ा। पाकिस्तान प्रायोजित आंतकी हमले का पिछले कुछ सालों में पंजाब कई बार शिकार हुआ। अब एक बार फिर से वह पंजाब में रह गए कुछ कट्टरवादियों के साथ मिलकर माहौल बिगाड़ने में लगा है। कैप्टन ने कहा कि एक ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान गुरु नानक देव जी की 55वीं जयंती मनाने की बात कर रहे हैं और उनके नाम पर यूनिवर्सिटी खोल रहे हैं और दूसरी ओर इस तरह की आतंकी कार्रवाई करवाकर गुरु नानक के नामलेवा लोगों की हत्या कर रहे हैं। यह विरोधाभास तो किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। इमरान आतंकवादियों का भी समर्थन करते हैं और सिखों के प्रति अपने दोहरे रवैये का भी परिचय दे रहे हैं, यह स्थिति बहुत मुफीद नहीं कही जा सकती। दूसरी ओर, नवजोत सिह सिद्धू पुलवामा में हुए आतंकी हमले की निंदा तो करते हैं। इसके लिए दोषी लोगों को सजा देने की भी मांग करते हैं लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को कसूरवार नहीं मानते। वे इस समस्या का हल शांति को ही मानते हैं। अब सिद्धू को कौन समझाएं कि शांति की भाषा सज्जन और सहृदय लोगों के लिए होती है। दुर्जन तो दुष्टता की ही भाषा समझता है। फूल से आज तक इस धरती पर एक भी कांटा नहीं निकला। निकला होता तो कांटे से कांटा निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती। दुष्ट को पहले काबू में करना पड़ता है। फिर उसे शांति का ज्ञान देना पड़ता है। यह कविताई वाली तुकबंदी का क्षेत्र नहीं है। अराजक तत्वों पर काबू पाने के लिए बड़ी नाकेबंदी करनी पड़ती है। सिद्धू की यह बात सौ प्रतिशत सही है कि आतंकवाद का कोई देश, जाति या मजहब नहीं होता लेकिन यह बात पाकिस्तान समझता कहां है? वह तो आतंकवाद को बाकायदा संरक्षण दे रहा है। भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के लिए उसकी सेना बाकायदा कवर फायर करती है। उन्हें अपने सीमावर्ती बेस कैंप में सारी सुविधाएं देती है, ठहराती है। वह तो पहले से ही आग से खेल रही है। पाकिस्तान अगर शांति की भाषा समझ रहा होता तो फिर कहना ही क्या था? जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हाल ही में हुए फिदायीन हमले में 40 जवान शहीद हो गए हैं। इनमें चार पंजाब के भी हैं। इस घटना से पंजाब सहित पूरे देश में आक्रोश है। लोग पाकिस्तान और इमरान खान के पुतले जला रहे हैं। भारत सरकार पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने का दबाव डाल रहे हैं। यह सामान्य घटना नहीं है। लातों के भूत बात से नहीं मानते। कामेडी शो में बैठकर हंसना और जिंदगी की तल्ख सच्चाइयों का सामना करते हुए उस पर हंसना दो अलग-अलग बाते हैं। कैप्टन अमरिंदर सेना में रहे हैं। वे सैनिकों का, उनके परिवारों का दर्द जानते हैं। सैनिक का केवल देश होता है। नवजोत इतना भी समझ लेते तो भी वैचारिक विवाद की स्थिति न बन पाती। शांति की नवजोत अगर जलानी ही है तो वे अपने विचारों में जलाएं। पाकिस्तान के बारे में क्या करना है, इस पर देश के रणनीतिकार सोच रहे हैं। बेहतर होगा कि सिद्धू अपनी अनावश्यक राय देकर उनके मंथन में व्यतिक्रम की अपनी मथानी न डालें।

शिव कुमार शर्मा

(लेखक इंडिया न्यूज के डिप्टी एडिटर हैं)

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