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Political parties not giving details of electoral expenditure within the stipulated time frame: चुनावी खर्च का ब्यौरा निर्धारिय समय-सीमा में नहीं दे रही राजनैतिक पार्टियां

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चंडीगढ़ चुनाव लड़ रही  किसी भी राजनैतिक पार्टियों के लिए बेहद जरुरी है कि वो चुनावी खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग के समक्ष चुनाव की अंतिम तिथि के बाद 75 दिनों के अंदर हाल में जमा करें और ऐसा नहीं करने वाले दलों पर कार्रवाई तय है । लेकिन बावजूद इसके भी राजनैतिक दलों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसका खुलासा हुआ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर) संस्था की साल 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनावों को लेकर दी गई रिपोर्ट में ।इसमें साफ साफ बताया गया है कि कांग्रेस व बीजेपी जैसी मुख्य पार्टियों ने भी खर्च संबंधी ब्यौरा देने में करीब 6 महीने ज्यादा लिए। सबसे अहम  बात ये है कि बीजेपी ने तो पिछली बार महाराष्ट्र व हरियाणा दोनों ही राज्यों में सरकार बनाई थी। ऐसा में सवाल खड़ा होता है कि क्या चुनाव आय़ोग के नियमों को कोई महत्व नहीं है।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई दलों के चुनावी खर्च के बारे में चुनाव की आयोग की वेबसाइट पर जानकारी नहीं डाली गई है जो कि होनी चाहिए। चुनावी खर्च में प्रचार, यात्रा खर्च, उम्मीदवारों पर होने वाले खर्च समेत कई तरह के खर्च शामिल हैं। इन कमियों को देखते हुए एडीआर की रिपोर्ट की रिकमेंड किया गया है कि समय पर खर्च राशि नहीं देने पर सजा का प्रावधान, पार्टी फंड में चंदा देने वाली की जानकारी सार्वजनिक, राजनैतिक दलों के खर्च के लिए समीक्षक की तैनाती का प्रावधान होना चाहिए।

लंबी फेहरिस्त है देर से ब्यौरा देने वाली  पार्टियों

अगर हरियाणा के परिपेक्ष में  बात करें तो पता चलता है कि बीजेपी व कांग्रेस के अलावा भी ऐसी पार्टियों की लंबी फेहरिस्त है जिन्होंने चुनावी खर्च का ब्यौरा समय पर नहीं दिया। आपको बता दें कि इनेलो ने  तय समय सीमा को दरकिनार करते हुए इनेलो ने 42 दिन बाद चुनावी खर्च का ब्यौरा दिया तो वहीं हरियाणा जनहित कांग्रेस ने 77 दिन व सीपीआई ने 196 दिन लेट चुनावी खर्च की जानकारी दी। हालांकि बीजेपी ने 197 दिन बाद और कांग्रेस ने 181 दिन बाद चुनावी खर्च का ब्यौरा आयोग के सामने रखा।

विज्ञापनों पर 13.43 करोड़ खर्च हुआ

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कुल चुनावी बजट का एक बड़ा हिस्सा पार्टियों द्वारा मीडिया में दिए जाने वाले विज्ञापनों पर खर्च हो जाता है। अगर हरियाणा की बात करें दो  अकेले प्रिंट, इलैक्ट्रोनिक पर दिए जाने वाले विज्ञापनों पर 13.43 करोड़ खर्च हुए। इनके अलावा इसमें केबल व एसएमएस पर आने वाला खर्च भी शामिल है। साथ में पब्लिसिटी मटिरियल, जिसमें पोस्टर , बैनर, बैज, स्टिकर्स , कट आउट व होर्डिंग्स शामिल हैं, पर भी 0.64 करोड़ की राशि खर्च हुई।

स्टार प्रचारकों पर भी जमकर बहाया गया पैसा

चुनाव जीतने के लिए हर पार्टियां स्टार प्रचारकों पर जमकर पैसा बहाती हैं। हरियाणा में इनके इस्तेमाल पर 1.65 करोड़ का राशि खर्च हुई जो इनकी ट्रैवलिंग पर पार्टियों द्वारा खर्च किए गए हैं। वहीं पार्टी के लीडर्स की यात्रा पर महज 0.146 करोड़ की राशि खर्च हुई। इस तरह 1.80 करोड़ रुपए का राशि स्टार प्रचारकों व लीडर्स की ट्रैवलिंग पर खर्च हुए हैं। यह भी सामने आया कि कुल खर्च का करीब 77 फीसद प्रचार में खर्च हुआ है ।

हरियाणा से 16.42 करोड़ की खर्च की गई

रिपोर्ट में कहा कहा गया है कि प्रत्येक पार्टी चुनाव के दौरान कुछ राशि जेनरेट भी करती है तो इसके अलावा खर्च भी की जाती है । इसी कड़ी में हरियाणा में गत विधानसभा चुनावों में 16.42 करोड़ की राशि खर्च पार्टियों द्वारा खर्च की गई । इसके अलावा पार्टी फंड में 12.46 करोड़ की राशि जमा की गई।

जिन पार्टियों ने खर्च जमा नहीं किया है उनको नोटिस भेजे जाते हैं। उनको इसके लिए बाकायदा कारण बताना होगा। इसके आधार पर ही कार्रवाई होगी। नियमों का पालना बेहद जरुरी है।

सुनील अरोड़ा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ,  भारत निवार्चन आयोग

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