Home लोकसभा चुनाव राजनीति Only seven women MPs elected from Delhi in 70 years: 70 सालों में दिल्ली से चुनी गर्इं सिर्फ 7 महिला सांसद

Only seven women MPs elected from Delhi in 70 years: 70 सालों में दिल्ली से चुनी गर्इं सिर्फ 7 महिला सांसद

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अंबाला। लोकसभा चुनाव के इतिहास में कई ऐसे प्रसंग हैं जिनकी चर्चा हमेशा होती है। ऐसा ही एक प्रसंग है संसद में महिला सांसदों की उपस्थिति का। राष्टÑीय राजधानी दिल्ली पर सभी की नजर इसलिए रहती है क्योंकि यहीं से हमारे नीति नियंता अपनी बातों को पूरे देश तक बताते हैं। इस वक्त महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण पर चर्चा चल रही है। विभिन्न राजनीतिक दल निश्चित तौर पर टिकटों का बंटवारा करने में इस प्रतिशत का ध्यान रख रहे होंगे। पर इसी चर्चा के बीच जब हम राजधानी दिल्ली से महिला सांसदों की प्रतिनिधित्व की बात करते हैं तो कुछ रोचक तथ्य भी सामने आते हैं।
पिछले सात दशक में दिल्ली में सिर्फ सात महिला सांसद चुनी गई हैं जबकि देश की राजधानी से 60 पुरुष प्रतिनिधि निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे हैं। देश को आजादी मिलने के बाद से करीब आधे से अधिक बार लोकसभा चुनाव में दिल्ली से कोई महिला प्रतिनिधि संसद नहीं पहुंची। देश के पहले लोकसभा चुनाव में दिल्ली से सुचेता कृपलानी चुनकर संसद पहुंची थीं। वह स्वतंत्रता सेनानी और महात्मा गांधी की सहयोगी थीं। कृपलानी नई दिल्ली सीट से किसान मजदूर प्रजा पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी थीं।
किसान मजदूर प्रजा पार्टी के संस्थापक सुचेता कृपलानी के पति आचार्य कृपलानी थे। सुचेता कृपलानी ने कांग्रेस उम्मीदवार और नेहरू गांधी परिवार की सदस्य मनमोहिनी सहगल को शिकस्त दी थी। सुचेता कृपलानी 1957 में कांग्रेस में आ गर्इं और दोबारा निर्वाचित हुर्इं।
सुचेता कृपलानी के बाद करीब एक दशक तक दिल्ली से कोई महिला सांसद लोकसभा की दहलीज तक नहीं पहुंच सकी। काफी समय बाद 1972 में फिर एक महिला सांसद दिल्ली से चुनी गर्इं। वह सुभद्रा जोशी थीं। सुभद्रा जोशी ने चांदनी चौक से भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार राम गोपाल शालवाले को 45,000 मतों से पराजित किया। वह पंजाब से पहली महिला सांसद भी थीं। देश में 1975-77 के दौरान आपातकाल लागू होने पर उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के उन कदमों का विरोध किया जिसके तहत शहर के सौंदर्यीकरण को लेकर उनके संसदीय क्षेत्र में तोड़-फोड़ की गई थी। उन्होंने इससे पहले 1962 में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था।
जोशी के बाद दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से सुषमा स्वराज और करोलबाग से मीरा कुमार चुनी गर्इं। दोनों 1996 में और 1998 में निर्वाचित हुर्इं। सुषमा स्वराज ने कांग्रेस के कपिल सिब्बल को 1.14 लाख मतों से और अजय माकन को 1.16 लाख मतों से हराया। मीरा कुमार ने 1996 में भाजपा के कालका दास को 41,000 मतों से और 1998 में भाजपा के सुरेंद्र पाल रठावल को 4,826 मतों से पराजित किया था.
करोल बाग से 1999 में अनिता आर्य ने बतौर भाजपा उम्मीदवार मीरा कुमार को शिकस्त दी। इसके बाद कांग्रेस की कृष्णा तीरथ 2004 में करोल बाग से और 2009 में उत्तर पश्चिम दिल्ली से सांसद बनीं। मोदी लहर में मीनाक्षी लेखी ने नई दिल्ली सीट से 2014 में जीत दर्ज की। उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आशीष खेतान को 1.6 लाख मतों से शिकस्त दी।

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