Home संपादकीय Now the turn of government to meet the expectations of the public: अब बारी जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की

Now the turn of government to meet the expectations of the public: अब बारी जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की

3 second read
0
0
178

केंद्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार बन गई है। पूर्ण बहुमत की सरकार है। कैबिनेट का गठन भी हो गया है। भाजपा खेमे में जश्न का माहौल है। बहुत जोश देखने को मिल रहा है। अब सवाल यह है कि इस जोश में होश न खो बैठा जाए। अब बारी जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की है। जनता सरकार के तरफ मुंह ताक रही है। राहत की बरसात कब से होगी, इसका हर किसी को इंतजार है। महंगाई चरम पर है। पब्लिक त्राहि-त्राहि कर रही है, पर सरकार है कि सियासत से बाज नहीं आ रही है। कैबिनेट के गठन में भी खूब सियासत की गई है। मोदी की नई कैबिनेट को आप बीजेपी और पीएम का एक और मास्टर स्ट्रोक कह सकते हैं। इसे बहुत बारिकी से गढ़ा गया है। मंत्रियों के चुनाव से लेकर मंत्रालयों के बंटवारे तक में इस बात का ख्याल रखा गया है कि सबकुछ बीजेपी के बड़े एजेंडे के मुताबिक ही हो। दो-तीन बातें एकदम साफ समझ आती हैं। कैबिनेट बनाने में बीजेपी के विजय रथ के लिए रास्ता बनाया गया है। अपने वोट बैंक को संदेश देने की कोशिश की गई है। मेहनत करने वाले काडर को इनाम दिया गया है और टैलेंट की भी कद्र की गई है। मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा गया तो सत्ता का केंद्र भी वहीं रखने की कोशिश लगती है। मोदी सरकार ने कैबिनेट में बर्थ और विभागों के बंटवारे में इस बात का ख्याल रखा है कि चुनाव कहां होने वाले हैं। साथ ही अपने मिशन इंडिया यानी देश में जहां बीजेपी के पैर नहीं फैले हैं। वहां पर भी नजर रखी है।
80 सीटों वाले यूपी को 9 मंत्री मिले हैं लेकिन 48 सीटों वाले महाराष्ट्र को 8 मंत्री मिले हैं। ये अहम है क्योंकि महाराष्ट्र में इसी साल चुनाव हैं। चुनावी राज्यों झारखंड को 2 और हरियाणा को भी 3 मंत्री दिए गए हैं। राजनाथ सिंह ने दूसरे नंबर पर शपथ जरूर लिया लेकिन गृह मंत्रालय का अहम मंत्रालय उनसे लेकर अमित शाह को दिया गया है। ये जरूर है कि पार्टी में राजनाथ के कद को देखते हुए उनके जिम्मे डिफेंस का काम दिया गया है। अब तक डिफेंस देख रहीं निर्मला सीतारमण अब वित्त विभाग देखेंगी। जेटली के बाद ये मंत्रालय वो किस तरह संभालती हैं। देश के सामने खड़ी आर्थिक चुनौतियों का किस तरह सामना करती हैं, ये देखना होगा। नितिन गडकरी के काम को पिछले पांच साल सराहा गया, वो अपनी जगह पर बने हुए हैं, लेकिन तरक्की नहीं मिली। पीयूष गोयल को फिर रेल चलाने का जिम्मा मिला है। ये भी उन मंत्रियों में से हैं जिनके काम की तारीफ होती रही है।
जेटली और सुषमा स्वराज के जाने के बाद शायद उन्हें प्रमोशन की आस होगी, जो पूरी न हुई। चर्चा भी थी की जेटली के जाने के बाद उन्हें वित्त मंत्रालय का काम दिया जा सकता है। अमेठी में राहुल गांधी को हराकर बीजेपी का सीना चौड़ा करने वाली स्मृति ईरानी पिछली सरकार में मानव संसाधन, सूचना प्रसारण जैसे अहम विभाग संभाल चुकी हैं, लेकिन इस बार उन्हें महिला और बाल विकास के साथ ही टेक्सटाइल विभाग का काम दिया गया है। संतोष गंगवार को सीनियर मोस्ट होने के बावजूद श्रम और रोजगार का राज्यमंत्री बनाया गया है। महाराष्ट्र में एनडीए को 18 सीटें देने वाली शिवसेना से सिर्फ अरविंद सावंत को कैबिनेट में जगह देना कल बीजेपी, शिवसेना के बीच कलह की वजह हो सकती है। याद कीजिए पिछले पांच साल में शिवसेना लगातार एनडीए सरकार की आलोचना करती रही। लेकिन बीजेपी को इसकी चिंता नहीं। अकेले 303 सीटें जीतने से इतना कॉन्फिडेंस तो आता ही है। बिहार में 16 सीटें जीतने वाली जेडीयू की भी एक न चली। उसे सरकार से बाहर रहना पड़ा है। यूपी के अपना दल को पिछली बार की तरह अपनापन न मिला। अनुप्रिया पटेल कैबिनेट से बाहर हैं। कुल मिलाकर गठबंधन को मैसेज यही दिया गया है कि आपका स्वागत है लेकिन जरूरत नहीं है।
प्रहलाद जोशी को संसदीय मामलों और कोयला मंत्रालय देकर हिंदुत्व एजेंडे के वोट बैंक को साफ संदेश देने की कोशिश हुई है। प्रहलाद आरएसएस में रह चुके हैं। ये कर्नाटक में पकड़ मजबूत बनाने के लिहाज से भी अहम है। इसी कड़ी में आप साध्वी निरंजन ज्योति को भी जोड़ सकते हैं। पोलराइजेशन की राजनीति के लिए मशहूर हो चुके वेस्टर्न यूपी से संजीव बालियान को पशुपाल राज्यमंत्री बनाया गया है। संजीव बालियान उसी मुजफ्फरनगर से जीतकर आए हैं जहां दंगे भड़के थे और उनपर केस भी हुआ था। एक दूसरे मंत्री नित्यानंद और वी मुरलीधरन का भी कनेक्शन एबीवीपी से रहा है। आप बिहार के गिरिराज सिंह और नॉर्थ कर्नाटक के बेलगाम से आए सुरेश अंगाड़ी और ओडिशा से आए प्रताप सारंगी को भी आप इसी कैटेगरी में रखकर देख सकते हैं। कैबिनेट का कॉम्बिनेशन देख ये तो साफ हो जाता है कि कम से कम तीन राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष बदलेंगे।
लेकिन ये भी संदेश है किन इन राज्यों में शानदार प्रदर्शन के लिए अध्यक्षों को इनाम दिया गया है। बिहार, महाराष्ट्र और यूपी बीजेपी अध्यक्षों को कैबिनेट में जगह दी गई है। चंदौली से जीत कर आए यूपी बीजेपी चीफ महेंद्र नाथ पांडे को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय को भी राज्य मंत्री बनाया गया है। पार्टी ने राज्य में 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और सारी जीती। खास बात ये है कि नित्यानंद राय ने उजियारपुर से उस उपेंद्र कुशवाला को हराया जो पिछली सरकार में एनडीए के सहयोगी थे। बीजेपी ने महाराष्ट्र में 48 में से 23 सीटी जीतीं और एनडीए के हिस्से में आईं 41 सीटें। लिहाजा महाराष्ट्र चीफ रावसाहेब पाटिल दानवे को भी राज्यमंत्री बनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नए मंत्रियों की टीम सामने आई तो कहा गया कि मोदी ही मैसेज हैं। अब जबकि सभी मंत्रियों को मंत्रालय बांट दिए गए हैं तो हम कह सकते हैं कि मोदी मैसेज ही नहींए सरप्राइज भी हैं। मंत्रिमंडल में एस जयशंकर को शामिल करना सरप्राइज था। अमित शाह को गृह मंत्रालय दिया गया। जबकि ऐसा माना जा रहा था कि उन्हें वित्त मंत्रालय मिल सकता है। वैसे ही सरप्राइज के तौर पर निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय दिया गया। राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्रालय दिया गया। विदेश सचिव रहे एस जयशंकर को विदेश मंत्रालय दिया गया है। नितिन गडकरी को रोड ट्रांसपोर्ट के अलावा एमएसएमई मंत्रालय दिया गया हैए जो बीजेपी के जनाधार को बढ़ाने के लिए अहम है। एक तरह से इसे ऐसे देखा जा सकता है कि मोदी जी कि ये प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम है। ये मंत्री मोदी जी के प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। पिछले दिनों मोदी ने कहा भी था कि सरकार एक निरंतर प्रक्रिया है।
मंत्रालयों और अधिकारियों को हमने कहा है कि वो अपना काम करते रहें। इस बीच सौ दिन का एजेंडा बना है। कैबिनेट कमेटी आॅन सिक्योरिटी का स्ट्रक्चर इससे साफ हो गया है, जिसमें राजनाथ सिंह, पीएम मोदी, अमित शाह के अलावा एस जयशंकर होंगे। सीसीईए आर्थिक मामलों की कमेटी में निर्मला सीतारमण भी होंगी। यानी एक कॉम्पैक्ट टीम जो पीएम मोदी के एजेंडे पर काम करेगी। बहरहाल चुनाव भी हो गया। पूर्ण बहुमत वाली सरकार भी बन गई। अब जरूरत काम की है। जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरने की दरकार है। देखना है कि केन्द्र की मोदी सरकार क्या कर पाती है।
राजीव रंजन तिवारी

trajeevranjan@gmail.com

(लेखक आज समाज के समाचार संपादक हैं)

Load More Related Articles
Load More By Aajsamaaj Network
Load More In संपादकीय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

Employees’ Provident Fund Organization gave gifts to pensioners: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने दिया पेंशनभोगियों को तोहफा

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने पेंशनभोगियों को तोहफा दिया है। संगठन ने कर्मचारी …