Home संपादकीय Now Online shopping will be changed:आॅनलाइन शॉपिंग में अब बदल जाएगा बहुत कुछ

Now Online shopping will be changed:आॅनलाइन शॉपिंग में अब बदल जाएगा बहुत कुछ

10 second read
0
0
439

हर तरफ बजट की चर्चा है। पर इस बीच भारत में ई कॉमर्स की दुनिया में इतना बड़ा उलेट फेर हो चुका है कि आप अगर गंभीरता से मंथन करेंगे तो आपको हैरानी भी होगी और सिर भी पकड़ कर बैठ जाएंगे। सुई धागे से लेकर बच्चों के डायपर तक मंगाने के लिए आप जिन आॅनलाइन साइट के भरोसे रहते थे हो सकता है कि वहां आपको वो प्रोडक्ट न मिले। जिन सस्ते चीजों के लिए आप देर रात तक आॅनलाइन सेल का इंतजार करते थे हो सकता है अब वो लगे ही नहीं। भारत सरकार द्वारा ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई नियम एक फरवरी से लागू कर दिए गए हैं। आज के आॅनलाइन युग में यह आपके बजट पर इतना गहरा प्रभाव छोड़ेगा कि आप हैरान रह जाएंगे। आइए जरा मंथन करते हैं।
दरअसल भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने पिछले दिनों ई-कॉमर्स कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियम लागू किए थे। इन नियमों पर ई-कॉमर्स कंपनियों ने आपत्ती जताई थी जिसे संशोधित कर एक फरवरी से लागू कर दिया गया है। इस नए नियम के आने के बाद से भारत में काफी लोकप्रिय हो चुकी अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी आॅनलाइन रिटेल कंपनियां उन फर्म के प्रोडक्ट्स को अपने प्लेटफॉर्म पर नहीं बेच सकेंगी, जिसमें उनकी किसी भी तरह से हिस्सेदारी होगी। सीधे शब्दों में कहें तो ये आॅनलाइन कंपनी वो प्रोडक्ट ही बेच सकेंगी जिसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है।
नई पॉलिसी में कंपनियों को एक्सक्लूसिव रेंज बेचने पर भी रोक होगी। इसे ऐसे समझें कि अभी हाल ही में नोकिया ने अपने सबसे पॉवरफुल एनरॉयड फोन 8.1 लॉन्च किया। पर यह फोन आप सिर्फ और सिर्फ अमेजन से ही खरीद सकते थे। किसी दूसरी साइट पर यह आपको उपलब्ध नहीं था। अब नई पॉलिसी आने से यह एक्सक्लूसिव का मार्केट भी खत्म हो गया है। यानी अब आपको एक्सक्लूसिव सेल का फायदा भी नहीं मिल सकेगा। ई-कॉमर्स कंपनिज अपने मूल वेबसाइट्स के अलावा कई अन्य सब टाइटल्स के जरिए वैसे प्रोडक्ट बेचती थीं जिनमें उनकी खुद की भागीदारी होती थी। इसमें अधिकतर विदेशी प्रोडक्ट होते थे, जो भारतीय कंपनियों से काफी सस्ते दाम में अपना प्रोडक्ट उपलब्ध करवाते थे। अमेजन की बात करें तो ऐसे कुछ प्रोडक्ट्स वो अमेजन बेसिक प्रोडक्ट लाइन-अप और सॉलिमो रेंज के तहत बेचती है। इन प्रोडक्ट की रेटिंग दुनिया भर में काफी बेहतर रहती है। जिससे ग्राहक भी इसे अधिक से अधिक खरीदने में विश्वास रखते हैं। ये प्रोडक्ट सस्ते होने के अलावा बेहतर क्वालिटी के भी होते थे। पर नए नियमों के लागू होेते ही इस तरह प्रोडक्ट वेबसाइट्स और एप से हटा दिए गए हैं। एक अनुमान के मुताबिक अमेजन और फ्लिपकार्ड से ही करीब चार लाख प्रोडक्ट हटा दिए गए हैं।
एक और एग्जांपल के जरिए आप मंथन कर सकते हैं कि आपकी जेब कहां ढीली होगी। मान लें आपके पास एप्पल का लेटेस्ट मोबाइल फोन है और किन्हीं कारणों से उसका चार्जिंग एडॉप्टर वायर खराब हो गया है। अब या तो आप एप्पल स्टोर से जाकर इसे खरीदेंगे, जिसके लिए आपको तकरीबन तीन से चार हजार रुपए तक खर्च करने होंगे। या आप अमेजन की साइट पर जाएंगे और उसके बेसिक केबल का अ‍ॅप्शन चूज करेंगे। इसकी कीमत आपको पांच से छह सौ रुपए के बीच होगी। यह ठीक वैसा ही काम करेगी जैसा एप्पल स्टोर से लिया गया वायर। पर यह बातें अब पुरानी हो चुकी हैं। अब आपको एप्पल स्टोर से ही वायर खरीदना होगा क्योंकि नए नियमों के बाद आपको अमेजन बेसिक का आॅप्शन नहीं मिलेगा। क्योंकि बेसिक केबल जैसे प्रोडक्ट विदेशी कंपनियों के थे। जिसमें ई-कॉमर्स कंपनियों की हिस्सेदारी होती थी। अब ये कंपनियां इस तरह के प्रोडक्ट नहीं बेच सकती हैं, जिसमें उनकी भागीदारी या हिस्सेदारी हो। भारत में ग्राहकों के पास यूरोप और अमेरिका जैसे देशों के मुकाबले वैसे भी प्रोडक्ट्स को लेकर कम ही विकल्प मौजूद रहते हैं। ऐसे में अमेजन पैंट्री प्रोडक्ट्स, अमेजन बेसिक प्रोडक्ट्स और सॉलिमो रेंज के प्रोडक्ट्स के तहत अमेजन इंडिया भारतीय ग्राहकों को क्वालिटी प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराती थी। इन प्रोडक्ट की रेंज सबसे अधिक बिकती थी। कंपनियों को भी इससे काफी फायदा पहुंचता था साथ ही भारतीय मध्यमवर्ग भी इससे खुश रहता था। इन्हें कम दाम में बेहतर चीज मिल जाती थी।
ये तो हुई आपके पॉकेट के बजट की बात, जिसमें आपको अब क्वालिटी प्रोडक्ट खरीदने के लिए अधिक रुपए ही खर्च करने होंगे। कम रेंज की बात आप आॅनलाइन शॉपिंग के लिए नहीं करें। पर इस पॉलिसी के दूसरे पहलू को भी जानना बेहतर होगा, ताकि आप और अधिक मंथन कर सकें कि क्या सही है और क्या गलत। दरअसल नए नियमों को लाने के पीछे छोटे व्यापरियों का त्राहिमाम था, जो आॅफलाइन कारोबार कर रहे थे। एक सामान्य ग्राहक कोई मोबाइल लेने मार्केट में जाता था तो उससे पहले वह आॅनलाइन साइट्स पर उसका रेट देख लेता था। फिर दुकान में जाकर दुकानदार से बहस करता था कि वहां तो यह इतने में मिल रहा था। दुकानदार भी परेशान। करे तो क्या करे। अगर ग्राहक का मूड हुआ तो उसने दुकान से मोबाइल खरीदा, नहीं तो वहीं दुकानदार के सामने ही मोबाइल एप खोला और धड़ से प्रोडक्ट बुक कर देता। एक दिन बाद मोबाइल उसके हाथ में वह भी दुकान से सस्ते दामों पर। देश में खुदरा बाजार बहुत बड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक देश में लगभग चार करोड़ खुदरा की दुकानें हैं। इनके माध्यम से लगभग चौदह करोड़ लोगों का रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। जीएसटी के कारण पहले ही सरकार से नाराज चल रहे व्यापारी आॅनलाइन कंपनियों पर कोई लगाम न लगाए जाने से भी नाराज चल रहे थे। उनके व्यापार को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा था। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने भी छोटे दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिये सरकार से मजबूत और बेहतर ई-कॉमर्स नीति बनाने की मांग की थी। स्वदेशी जागरण मंच ने मदुरै में अपने राष्ट्रीय सम्मेलन में इस सबंध में प्रस्ताव भी पास किया था। कहा गया था कि भारत में एक मजबूत ई-कॉमर्स नीति होनी चाहिए जो खुदरा कारोबार और छोटे उद्योगों से जुड़े 14 करोड़ लोगों के हितों की रक्षा करे।
अब एक और पहलू पर मंथन करें।
हाल ही में जब ब्राइब्रेंट गुजरात समिट हो रहा था तब मुकेश अंबानी की एक घोषणा ने ई-कॉमर्स कंपनी की दुनिया में हलचल मचा दी थी। अंबानी ने यह एलान किया कि वो जल्द ही ई-कॉमर्स बिजनेस में आने वाले हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि रिलांयस कितना बड़ा एसेट है जिसके अपने प्रोडक्ट की इतनी बड़ी रेंज है कि विदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट को इसमें आने की जरूरत ही नहीं। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी साल अप्रैल-मई में इसकी धमाकेदार शुरुआत हो जाएगी।
हालांकि यह कहना अतिश्योक्ति ही होगी कि रिलांयस के फायदे के लिए सरकार ने नई एफडीआई पॉलिसी लागू कर दी है। पर सवाल तो उठ ही रहे हैं। रिलायंस इस बिजनेस में कितना सफल हो पाता है ये तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसका असर अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी वेबसाइट्स पर जरूर पड़ेगा यह भी तय है। जब किसी प्रोडक्ट का प्रतिद्वंदी ही बाजार में नहीं होगा तो क्या स्थिति होगी इसे बताने की जरूरत नहीं। सबसे बड़ा फायदा जो रिलायंस को होगा वो ये कि उसपर एफडीआई के नियम लागू ही नहीं होंगे। फ्लिपकार्ट सिंगापुर स्थित कंपनी थी जिसे अब वॉलमार्ट ने खरीद लिया है। अमेजन भी पूर्ण रूप से विदेशी कंपनी ही है। अब आप तीनों पहलूओं को समझने के बाद मंथन करें कि किसे फायदा पहुंचेगा और कौन घाटे में रहेगा। मंथन करना जरूरी है कि कोई पॉलिसी आम लोगों के फायदे के लिए बनाई जाए, छोटे व्यापारियों को बचाने के लिए या फिर कॉरपोरेट घरानों को और समृद्ध करने के लिए। मंथन करिए और हमें भी बताइए।
Kunal@aajsamaaj.com
(लेखक आज समाज के संपादक हैं )

Load More Related Articles
Load More By Kunal Verma
Load More In संपादकीय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

Do talk On this ‘Planned Murder’: इस ‘प्लांड मर्डर’ पर भी करें मन की बात

एक बार फिर मजदूरों और सफाईकर्मियों को सीवरेज टैंक में भेज कर उनका प्लांड मर्डर हुआ है। वह …