Home संपादकीय Modi government Part 2, full of expectations, dreams and nationality: उम्मीदों, सपनों और राष्ट्रीयता से भरपूर मोदी सरकार पार्ट 2

Modi government Part 2, full of expectations, dreams and nationality: उम्मीदों, सपनों और राष्ट्रीयता से भरपूर मोदी सरकार पार्ट 2

4 second read
0
0
144

प्रचंड जनादेश के बाद शपथ ग्रहण के साथ ही मोदी सरकार पार्ट-2 शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 57 सहयोगियों के साथ टीम का गठन भी कर लिया है। यह टीम उम्मीदों, सपनों और राष्टÑीयता का भाव लिए है। पूरे देश की जनआकांक्षाओं के अनुरूप सरकार पार्ट 2 पर काम करने की जिम्मेदारी है। पीएम मोदी ने अपने मंत्रीमंडल के गठन में जिस बारीकी से सभी को जिम्मेदारी दी है वह वाकई काबिले तारीफ है। निश्चित तौर पर इस टीम के गठन में गहन मंथन का दौर चला होगा। तमाम राजनीतिक समीकरणों को देखा गया होगा। पर इस टीम के गठन से पीएम मोदी ने साफ संदेश दे दिया है कि जो परफॉर्म करेगा वही मंत्रीपद के काबिल रहेगा। इस मंत्रीमंडल के पास तमाम ऐसी चुनौतियां हैं जिस पर गंभीरता से मंथन जरूरी है।
चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले भाषण में कहा था कि चुनाव सियासी अंकगणित से नहीं, बल्कि केमिस्ट्री के साथ जीता जाता है। यह सही भी है। जिस राष्टÑवाद की केमिस्ट्री के साथ मोदी सरकार सत्ता में आई है, वही राष्टÑवाद इस सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने होगी। जिस तरह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के अंत में जम्मू कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 35 ए के मुद्दे ने तुल पकड़ा था, यह मुद्दा भी आने वाले दिनों में सुर्खियों में रहेगा। भारतीय जनता पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में भी स्पष्ट कर रखा है कि हर हाल में इस अनुच्छेद को खत्म किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में मोदी सरकार का रवैया इस मुद्दे पर क्या होगा इस पर भी सभी की नजर होगी।
गृह मंत्री के रूप में अमित शाह का चयन कोई अस्वभाविक नहीं है। गुजरात के गृहमंत्री रहते अमित शाह ने जिस तरह से गुजरात को सुरक्षित और ताकतवर बनाया वह साधारण बात नहीं है। उन्हें एक राज्य के गृहमंत्री के रूप में अच्छा अनुभव है। ऐसे में किसी देश के गृहमंत्री के रूप में उनके पास करने को बहुत कुछ होगा। अर्बन नक्सलवाद से लेकर कश्मीर की आंतरिक समस्याओं के प्रति उनकी गंभीरता चुनावी मंच में जिस रूप में दिखी थी क्या अब भी उसी रूप में परिलक्षित होगी, यह देखना दिलचस्प रहेगा। अमित शाह के गृहमंत्री बनने की घोषणा के साथ ही कश्मीर में आंतरिक हलचल काफी तेज है। सबसे अधिक खुश देश के विभिन्न राज्यों में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे कश्मीरी पंडित हैं। अमित शाह के रूप में उन्हें दूसरा सरदार पटेल नजर आ रहा है। उनमें उम्मीद जगी है कि जिस तरह के कठोर फैसले लेने के लिए अमित शाह जाने जाते हैं उससे उनकी कश्मीर घाटी में वापसी की राह आसान होगी।
देशद्रोह के खिलाफ कड़े और कठोर कदम उठाने की वकालत बीजेपी शुरू से ही करती आ रही है। पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी कई चुनावी मंच से एलान किया था कि मोदी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो देशद्रोहियों के खिलाफ ऐसे कानून बनाए जाएंगे, जिससे देश के खिलाफ जहर उगलने वालों की खैर नहीं होगी। अमित शाह भी इसी तरह की बातों को दोहरा चुके हैं। हाल के वर्षों में जिस तरह देश के खिलाफ गतिविधियां बढ़ी हैं उनमें निश्चित तौर पर कठोर कदम उठाने की जरूरत है। आतंरिक सुरक्षा के मामलों में भी अमित शाह के पास बड़ी चुनौतियां होंगी। महाराष्टÑ, झारखंड, छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की गतिविधियों ने चुनाव के वक्त सरकार के समाने अच्छी खासी चुनौती पेश की थी। ऐसे में इस मोर्चे पर कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है। उम्मीद की जा रही है कि मोदी सरकार इस मामले में दीर्घकालिक योजनाएं बनाएगी, जिससे एक तरफ नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ा जाए। और जो मुख्यधारा में आने से इनकार करते हैं उनकी जड़ों तक को समाप्त कर दिया जाए।
अमित शाह की तरह ही पूर्व नौकरशाह एस जयशंकर का सीधे कैबिनेट मंत्री बनना भी मोदी सरकार पार्ट 2 की स्पष्ट नीतियों का प्रतिनिधित्व कर रही है। एस जयशंकर को विदेश मामलों में लंबा अनुभव है। किसी नौकरशाह को सीधे किसी बड़े मंत्रालय का कार्यभार सौंपने का सफल प्रयोग कांग्रेस ने किया था। उस वक्त विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी रहे नवटर सिंह को कांग्रेस सरकार में विदेश मंत्रालय सौंपा गया था। नटवर सिंह का विदेश सेवा का अनुभव बेहद काम आया था। अब ठीक उसी पैटर्न पर एस जयशंकर की मोदी सरकार पार्ट-2 में इंट्री हुई है। जयशंकर मनमोहन सिंह के भी गुड बुक में थे, पर किन्हीं कारणों से वो विदेश सचिव नहीं बन सके। पर मोदी सरकार के पहले कार्यकाल की शुरुआत होते ही प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें विदेश सचिव बनाया। जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी के आशा के अनुरूप चीन, जापान और अमेरिका के मुद्दों पर सफलता दिलाई। अब एक बार फिर पीएम मोदी ने उनपर भरोसा दिखाया है। एस जयशंकर के अलावा विदेश सेवा के एक और पूर्व अधिकारी हरदीप सिंह पुरी को भी पीएम मोदी ने अपनी टीम में शामिल किया है। अमृतसर से चुनाव हारने के बावजूद हरदीप पुरी को मंत्रीमंडल में शामिल किया जाना मोदी सरकार की विदेश नीति को स्पष्ट कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी आंतरिक मामलों के अलावा विदेश नीति को भी बेहद मजबूत करना चाहते हैं। इसके लिए बेहद प्रोफेशनल तरीके से उन्होंने अपनी टीम का गठन किया है। पुरी और जयशंकर की विदेश कूटनीतिक में विशेष योग्यता है। इसका लाभ निश्चित तौर पर सरकार को मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल के गठन के जरिए साफ संदेश दे दिया है कि जो परफॉर्म नहीं करेगा उसे मंत्रिमंडल में रहने का अधिकार नहीं होगा। खराब परफॉर्मेंश के आधार पर ही कृषि मंत्री रहे राधामोहन सिंह, जयंत सिन्हा, मेनका गांधी, रामकृपाल यादव जैसे नेताओंं को दोबारा जिम्मेदारी नहीं मिली है। प्रधानमंत्री मोदी का जिस तरह काम करने का तरीका है वैसे में निश्चित तौर पर अपने 57 सहयोगियों को सौ दिनों का उन्होंने एजेंडा दे दिया होगा। जो अपने एजेंडे को बेहतर तरीके से कार्याविंत करेगा उसे ही कंटिन्यू किया जाएगा। पिछली सरकार में भी सुरेश प्रभु, मनोहर पार्रिकर, स्मृति ईरानी जैसे बड़े नेताओं से परफॉर्मेंश के आधार पर उनके विभागों को जल्द ही वापस ले लिया गया था। ऐसे में किसी मंत्री को यह मुगालता नहीं पाल कर रखना चाहिए कि विभाग मिल गया अब ऐश करना है। ऐश करने वालों को खासकर पीएम मोदी किसी कीमत पर बर्दास्त नहीं करने वाले। वैसे भी संसद के सेंट्रल हॉल में उनका दिया गया भाषण सांसदों के लिए मूल मंत्र है। वीआईपी कल्चर से लेकर उन्होंने सांसदों को उनके कर्तव्यों का पाठ भी पढ़ा दिया है। मोदी सरकार पार्ट-2 का मूल मंत्र सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है। ऐसे में पूरा देश मोदी सरकार की तरफ बेहद उम्मीदों के साथ देख रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक को इस सरकार से काफी उम्मीदें है। उम्मीद है देश आगे बढ़ेगा। आर्थिक मोर्चे से लेकर आतंरिक मोर्चे तक देश मजबूती से खड़ा होगा। आमीन।

Kunal@aajsamaaj.com
(लेखक आज समाज के संपादक हैं )

Load More Related Articles
Load More By Kunal Verma
Load More In संपादकीय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also

Android phone is bomb and the internet is dynamite! एंड्रायड फोन बम है और इंटरनेट इसका बारूद!

आज मंथन से पहले एक छोटी सी घटना का जिक्र कर रहा हूं। इसे पढ़िए फिर आगे की बात करेंगे। शनिवा…