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Meaning of Exit Poll 2019: एक्जिट पोल 2019 के मायने

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पूरा देश 19 मई की शाम सांस रोककर बैठा था की इक्जिट पोल के अनुसार इस बार पांच साल के लिए संसद का शासन किसे मिलेगा। इतिहास की भयंकर और घमासान चुनावी रण के बाद सभी की निगाहें एक्जिट पोल पर थी। जैसे ही घड़ी ने साढ़े छ: बजाए और सभी चैनल ने अपने अपने सर्वे दिखाने शुरू किए तो सात बजे तक साफ हो गया की एक्जिट पोल के अनुसार मोदी जी ही सत्ता के सिंहासन पर विराजने होने वाले हैं।
बड़े-बड़े राजनीतिक पंडित और राजनीतिक प्रतिब्धयताओं से ग्रसित पत्रकारों ने स्पष्ट किया हुआ था की एनडीए 165 से 185 में ही सिमट जाने वाली है। ज्यादातर एक्जिट पोल इसके विपरीत एनडीए को 300 से अधिक सीट दिखा रहे है। परिणाम 10 प्रतिशत इधर या उधर हो सकते है लेकिन आएगा तो मोदी ही। इस परिस्थिति का यदि गम्भीर आंकलन किया जाए तो कई कारण नजर आते है। सबसे पहले मोदी जी अपने जन कल्याण के कार्यों से अधिकतर लोगों के हृदय सम्राट बन गए हैं और लोगों को उनके लिए किसी भी प्रकार की गाली गलौच पसंद नहीं थी। कांग्रेस और बाकी तमाम विपक्ष को इस जमीनी हकीकत का अंदाजा ही नहीं लगा और वो सब मिलकर मोदीजी को लगातार गली ही देते रहे।
कहते हैं जो आप बोलते हैं वो सकारात्मक या नकारात्मक वायु मंडल में स्थापित हो जाता है। मोदी जी अपना चुनावी भाषण प्रारम्भ करते थे, एक बार फिर मोदी सरकार अबकी बार 300 पार तब राहुल गांधी नारे लगवा रहे होते थे चौकीदार चोर है मोदी जी ने इसका तोड़ निकाला और सभी को चौकीदार बनवा दिया और राहुल के नारे की हवा निकाल दी।
विपक्षी दलों ने चुनाव से पहले जो एकता दिखाई वो चुनाव आते-आते समाप्त हो गई। अधिकतर विपक्ष अकेले चुनाव लड़ा और मोदी जी को गाली यह चुनाव सही मायनों में अद्भुत है, जिसमें सबसे बड़ा और अहम मुद्दा मोदी बनाम पूरा विपक्ष है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक व्यक्ति के खिलाफ पूरा विपक्ष इक्ट्ठा हो जाए और मिलकर गालियां दे जबकि देश की जनता को समझाने के लिए इतने सारे मुद्दे होने के बावजूद सिर्फ एक मुद्दा सामने आया है कि ये येन केन प्रकारेण मोदी जी को हटाओ। क्या हास्यापद नहीं लगता है ये कि जिन मुद्दों के लेकर विपक्ष में मोदी जी कि विदाई की सहमति बनी थी वो ‘गोधूलि बेला के धुधलके’ में लुप्त होकर रात्रि वेला में कुंभकर्णी विश्राम कर रहे हैं।
विपक्ष ये नही समझ पा रहा है कि 2019 का भारत और इसके मतदाता एक दम बदल चुके है,अब इन्हे जातपात और धर्म के नाम पर छलावा नहीं दिया जा सकता है उन्हें अपना विकास देश का विकास और देश की सुरक्षा ही लुभा सकती है। मोदी जी को चाहे कोई तानाशाह कहे या सांप्रदायिक कहे इनसे ऊपर उठकर उन्होंने अपने द्वारा निर्मित नारे सबका साथ सबका विकास को चरितार्थ किया है ।
सबसे पहले मोदी जी ने देश की गरीब निरिह और ग्रामीण जनता के जीवन में अमूलचूल परिवर्तन लाकर अपने पक्ष में किया। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना लाकर देश के 10 करोड़ परिवार और 50 करोड़ जनता को 5 लाख प्रतिवर्ष इलाज की सुविधा देकर उनका हृदय जीत लिया, उज्जवला योजना के जरिये रसोई गैस गरीबों को उपलब्ध कराई प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना,के तहत हर किसान को 6 हजार रुपए प्रतिवर्ष देकर उनकों आर्थिक सहायता प्रदान की जिसकी जो किश्ते 2000 -2000 रुपए उनके खातों में जा चुकी है। गांव-गांव में जाकर महिलाओं के लिए इज्जत घर का निर्माण कराया गरीबों को घर बनवा कर दिया,गांव गांव तक बिजली पहुंचाई, सड़कें पहुंचाई, दस प्रतिशत सवर्णों को आरक्षण दिया और ऐसे-ऐसे सैकड़ों कार्य किए जिससे गरीबों के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आया। इसके विपरीत विपक्ष राफेल, जीएसटी, नोटबंदी और मोदी चोर है के नारे लगाकर ये चुनाव जितने का सपने संजोता रहा ।
विपक्ष को पता ही नहीं लगा कि जमीनी हकीकत क्या है। जमीन पर जिसे फायदा मिल गया वो मोदी जी का भक्त बन गया वो किसी भी पार्टी का रहा हो, किसी भी जाति या धर्म का रहा हो। उसको मोदी जी में आशा की किरण दिखने लगी, वो 65 साल से चुनावी जुमलो से कितना अक्रांत था कि उसे मोदी जी द्वारा दी गई थोड़ी सी मद्द भी बहुत क्रांतिकारी कदम लगा। उसके बाद राष्ट्रवाद के मुद्दे पर मोदी ने विपक्ष को बहुत बड़ी पटखनी दी कि पूरा विपक्ष सर्जिकल स्ट्राइक-1 और सर्जिकल स्ट्राइक -2 के सबूत ही मांगता रह गया और देश की जनता को विपक्ष की नियत पर पर संदेह उत्पन्न हो गया। इस दौरान कांग्रेस का चुनाव घोषणा पत्र आ गया।
जिसमें उन्होंने राष्ट्रद्रोह की धारा 124ए को हटाने की बात कही, कश्मीर से सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून को हटाने की सिफारिश की, कश्मीर में सैनिकों की संख्या घटाने की बात की अलगाववादियों से बातचीत करने की बात कही, इन सब बातों से कांग्रेस और बाकी विपक्ष ने राष्ट्रवाद के मुद्दे को भाजपा के पक्ष में निर्धारित कर दिया। यह कुल्हाड़ी स्वयं कांग्रेस ने अपने पांव पर मारी है, उन्हें अहसास ही नहीं हुआ कि राष्ट्रवाद के मुद्दे पर देशभक्ति की कितनी बड़ी लहर देशवासियों के रगो में दौड़ जाती है। इस मुद्दे पर भी विपक्ष ने बहुत पड़ी पटखनी खाई है।
मोदी को दी गई गालियों की भरमार ने भी जनता का विपक्ष से मोह भंग किया है। 23 मई 2019 को सब साफ हो जाएगा लेकिन इक्जिट पोल में साफ दिखाई दे रहा है कि मोदी जी आ रहे हैं और अपनी वजह से कम विपक्ष की वजह से उनके आने के आसार ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। यदि नतीजे एक्जिट पोल विपरीत आए तो जाने कितने लोगों को हृदयघात लगेगा।
राकेश शर्मा
(यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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