Home संपादकीय Manohar Lal-Captain Amarinder’s Budget Bets: मनोहर लाल-कैप्टन अमरिंदर का बजटिया दांव

Manohar Lal-Captain Amarinder’s Budget Bets: मनोहर लाल-कैप्टन अमरिंदर का बजटिया दांव

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हरियाणा और पंजाब में दो अलग-अलग विचारधाराओं की सरकारें हैं, लेकिन दोनों का मकसद एक ही है लोकसभा चुनाव जीतना। वहां अपनी पार्टी की अधिककतम सीटें लाना और इसके लिए मनोहर लाल खट्टर और कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों ही पुरजोर कोशिश करते नजर आ रहे हैं। अपने बजट में दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सभी वर्गों को लुभाने की कोशिश की है। पंजाब सरकार ने जहां सूबे की जनता पर कोई अतिरिक्त कराधान नहीं किया है, वहीं पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर एक रुपए का वैट घटाकर आम जन को खुश करने की जुगत अपनाई है। पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने 2019-20 के बजट में गांव, गरीब किसान और मजदूर सबका ध्यान रखा है। यह और बात है कि मनप्रीत बादल का यह बजट किसानों को बहुत प्रीतिकर नहीं लगा है।
पंजाब सरकार के बजट में किसानों और खेत मजदूरों की कर्ज माफी के लिए तीन हजार करोड़ की व्यवस्था की गई है। यह एक अच्छी और सार्थक पहल है। चुनाव में भी और इसके बाद भी अमरिंदर सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। मौजूदा बजट में अपने इस दावे को पूरा करती सरकार नजर आ रही है। शिरोमणि अकाली दल ने हालांकि मौजूदा बजट को कांग्रेस के घोषणापत्र की तरह ही जनता जनार्दन के साथ धोखा बताया है लेकिन विपक्षी कभी संतुष्ट तो होते नहीं । राजनीति के अन्य जानकारों की मानें तो चुनावी मौसम में जनता को नाराज करने का सिद्धांत नहीं है। कुल मिलाकर अमरिंदर सरकार का बजट गरीब हितैषी भी है और विकासोन्मुखी भी। अनुसूचित जातियों, पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यक वर्ग पर बजट में विशेष फोकस है। उपरोक्त वर्गों के लिए विशेष रूप से वर्ष 2019-20 के बजट में 1,228 करोड़ की राशि की व्यवस्था बड़ी बात है।
सरकार ने विधवाओं की लड़कियों के विवाह के मौके पर आशीर्वाद स्कीम के अंतर्गत दी जाने वाली शगुन की राशि के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में करके अपनी जनहितकारी सोच का परिचय दिया है। पूंजी व्यय 22,842 करोड़ है, लेकिन रेवेन्यू डेफिसिट को देखकर इसके पूरा होने में थोड़ा संशय जरूर पैदा होता है लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति तो दिखती है। विकास के लिए इतना ही काफी है। यह सच है कि सरकार ने पिछले साल वेज एंड मीन्स के लिए 32 हजार करोड़ कर्ज लिया था। यह रकम बजट से कट सकती है लेकिन सरकार के दिमाग में इसकी कोई न कोई काट जरूर होगी, ऐसा विश्वास किया जा सकता है। पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने से जनता को तो राहत मिलेगी लेकिन राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी करना भी सरकार की बड़ी चुुनौती होगी। सरकार के रणनीतिकारों का ध्यान इस पर भी है। कृषि का बजट पूर्वापेक्षा बढ़ा है। इंडस्ट्री को सरकार ने पांच रुपए प्रति यूनिट बिजली देने के लिए प्रावधान किया है। सरकार ने अपने पंजाब के लोगों को खुश करने के जो प्रयास किए हैं, उसे नकारा नहीं जा सकता।
वहीं, हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार का आखिरी बजट 1,32,165.99 करोड़ का राज्य के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने पेश किया। इसमें किसान पेंशन योजना का एलान भी किया गया है। चुनावी साल है तो बजट का धमाल तो बनता ही था। सरकार ने किसान पेंशन योजना का एलान किया है। इसके लिए बजट में 1500 करोड़ रुपए आवंटित किया गया है।
कैप्टन अभिमन्यु ने अर्थशास्त्र और राजनीति के आचार्य कौटिल्य के एक नीतिक के जरिये यह बताने की भी कोशिश की है कि प्रजा के सुख में ही सरकार का सुख है, प्रजा के हित में ही सरकार का हित है, प्रजा को जो प्रिय है, वही सरकार को प्रिय है। देखा जाए तो यह बहुत बड़ा दर्शन है लेकिन इस पर अमल कौन करता है? वैसे खट्टर सरकार ने कृषि विभाग के लिए 3834.33 करोड़ रुपए का प्रस्ताव किया गया है जिसमें कृषि क्षेत्र के लिए 2210.51 करोड़, पशुपालन के लिए 1026.68 करोड़, बागवानी के लिए 523.88 करोड़ और मत्स्य पालन के लिए 73.26 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है। इस बजट के जरिये सरकार ने यह बताने और जताने की कोशिश की है कि उसके लिए गांव, गरीब और किसान का उत्थान सर्वोपरि है। बजट में सहकारिता के लिए 1396.21 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। 2020-21 तक 750 करोड़ की लागत से शाहबाद चीनी मिल में 60 केएलपीडी का एथनोल प्लांट लगाने का संकल्प जताया गया है तो इससे चीनी मिल की पूंजी में इजाफा तो होगा ही, किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। इसे कहते हैं आम के आम, गुठलियों के दाम।
किसान पेंशन और अन्य योजनाओं के लिए 1500 करोड़ रुप की व्यवस्था के तहत खट्टर सरकार 15 हजार मासिक से कम आय वाले और पांच एकड़ तक की भूमि वाले किसानों को लाभ पहुंचाने का इरादा जाहिर कर चुकी है। खेल और युवा मामले में 401.17 करोड़ रुपए की राशि आवंटित कर, मौलिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए 12,307.46 करोड़ रुपए के प्रावधान कर, उच्च शिक्षा के लिए 2,076.68 करोड़ रुपए और तकनीकी शिक्षा के लिए 512.72 करोड़ रुपए का प्रावधान कर सरकार ने युवाओं के हितों का विशेष ध्यान रखा है। हरियाणा की राजनीति में नंबरदारों का रोल किसी से छिपा नहीं है। नंबरदारों का मानदेय 1500 से बढ़ाकर 3 हजार रुपए प्रतिमाह कर, उन्हें एक मोबाइल फोन देने का फैसला कर सरकार ने पहले चरण का चुनाव तो मानसिक तौर पर जीत लिया है। हालांकि लोकतंत्र में भावनात्कता ज्यादा मायने रखती है। चुनाव के दौर की तात्कालिक परिस्थितियां और कुछ अतीत की स्मृतियां भी मतदाताओं को आकर्षित करती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के लिए 5,040.65 करोड़ रुपए, रोजगार के लिए 365.20 करोड़, श्रम के लिए 58.57 करोड़ रुपए का प्रावधान कर खट्टर सरकार ने दूर की कौड़ी खेली है। शहरी स्थानीय निकायों के लिए 3994.95 करोड़ का आवंटन और नगर एवं ग्राम आयोजन विभाग के लिए 1873.79 करोड़ का बजट देकर सरकार ने गांव और नगर के बीच आर्थिक और वैचारिक संतुलन बनाने का जो काम किया है, उसका असर लोकसभा और राज्य के विधानसभा चुनाव पर पड़ना लाजिमी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह और मनोहरलाल खट्टर ने अपने-अपने अंदाज में अपनी बजटीय पारी खेल तो दी है लेकिन इसका आउटपुट क्या निकलेगा, राजनीतिक पंडितों की तो बस इस पर नजर है। कुल मिलाकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही अच्छे बजट दिए हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में मतदाता इसे किस रूप में लेंगे, यह देखने वाली बात होगी।

शिवकुमार शर्मा
(लेखक इंडिया न्यूज हरियाणा के डिप्टी एडिटर हैं)

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