Home संपादकीय Mahendra Singh Dhoni’s sacrifice and honor of the country: महेंद्र सिंह धोनी का बलिदान और देश का सम्मान

Mahendra Singh Dhoni’s sacrifice and honor of the country: महेंद्र सिंह धोनी का बलिदान और देश का सम्मान

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जिस देश में क्रिकेट एक धर्म हो और क्रिकेटर भगवान, उस देश के क्रिकेटर के सम्मान की जब बात आती है तो पूरा देश एकजुट हो जाता है। कुछ ऐसा ही इस वक्त हुआ है। भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित प्लेयर महेंद्र सिंह धोनी के ग्लव्स पर हुए विवाद ने पूरे देश को एकजुट कर दिया। बात यहां तक पहुंच गई कि कई दिग्गज क्रिकेटर्स ने इंडियन टीम को वापस बुला लेने की मांग कर डाली। पर धोनी ऐसे ही धोनी नहीं बन गए हैं। उन्होंने न केवल आईसीसी के नियमों का सम्मान किया है, बल्कि अगले मैच से अपने ग्लव्स पर बलिदान का निशान लगाने का निर्णय वापस ले लिया है। पर इस पूरे प्रकरण ने मंथन करने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर क्यों कोई खिलाड़ी अपनी राष्टÑीयता या देश प्रेम दिखाने के लिए इस तरह के कदम उठाता है।
दरअसल यह पहला मौका नहीं है कि किसी भारतीय खिलाड़ी के साथ इस तरह का विवाद जुड़ा हो। इससे पहले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के साथ भी ऐसा वाकया पेश आ चुका है। सचिन तेंदुलकर एक ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जो निर्विवाद रूप से भारत के सर्वकालिक क्रिकेटर्स में से सबसे अधिक सम्मानित प्लेयर रहे हैं। खेल का मैदान हो या फिर मैदान से बाहर उनका व्यक्तिव। हर जगह उन्होंने राष्ट्रप्रेम को सबसे ऊपर रखा है। इंडियन एयर फोर्स के भी वो आॅर्डिनरी कैप्टन रहे हैं। पर उनके साथ विवाद तब जुड़ गया था, जब उन्होंने अपने हेलमेट के ऊपर तिरंगा लगाना शुरू किया था। काफी सारे मैचों में उन्होंने उस हेलमेट को पहन कर खेला जिस पर सामने की ओर तिरंगा लगा होता था। जब भी उन्होंने शतक लगाया हर बार सचिन तेंदुलकर को तिरंगे को चूमते हुए देखा गया। तिरंगा का यह चुंबन हर एक भारतीय के दिलों में जोश भर देता था। स्टेडियम में हर तरफ सचिन सचिन का आवाज गूंजने लगती थी।
पर एक समय सचिन को अपने इस देशप्रेम के इजहार को विराम देना पड़ गया था। सचिन को देखते हुए कई अन्य क्रिकेटर्स ने भी ऐसा ही किया था। हेलमेट पर बीसीसीआई के लोगो के ठीक ऊपर तिरंगा लगाकर खेलने का फैशन चल पड़ा था। तब गृहमंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा था। गृहमंत्रालय ने तिरंगा संविधान का हवाला देते हुए इस तरह के प्रयोग पर रोक लगा दी थी। कहा गया कि हेलमेट को फिल्ड में भी रखना पड़ता है जहां खेल के दौरान खिलाड़ी थूकते भी हैं। उसी किटबैग में हेलमेट को रखा जाता है जहां खिलाड़ियों के जूते भी होते हैं और गंदे कपड़े भी। ऐसे में हेलमेट में लगे राष्टÑीय ध्वज के चिह्न का अनादर होता है। उस वक्त उतना बवाल नहीं हुआ था क्योंकि सोशल मीडिया का जमाना नहीं था। सचिन तेंदुलकर ने भी इस विवाद को बेवजह हवा देने की कोशिश नहीं की। उन्होंने अपना देशप्रेम तो नहीं छोड़ा, लेकिन उसके सार्वजनिक प्रदर्शन से चुपचाप खुद को अलग कर लिया। गृहमंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इस तरह का प्रयोग बंद हो गया। पर एक बार फिर 2019 के वर्ल्ड कप में देश भक्ति के प्रदर्शन पर विवाद हो गया है। इस बार चुंकि जमाना सोशल मीडिया का है। इसलिए पलक झपकते ही धोनी के ग्लव्स का मुद्दा राष्टÑीय मुद्दा बन गया। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में महेंद्र सिंह धोनी ने अपने विकेटकीपिंग ग्लव्स पर बलिदान बैज का लोगो लगाया था। टीवी कैमरों ने इस लोगो को बार-बार फोकस किया। इसके बाद आईसीसी ने बीसीसीआई से अपील की, धोनी अपने ग्लव्स पर से बलिदान बैज का लोगो हटाकर अगले मैच में उतरे, जिसके बाद से पूरे देश में हंगामा मच गया।
आईसीसी का मानना है कि इस तरह किसी लोगो का लगाना नियमों के विरुद्ध है। नियमों में है कि किसी देश को जिन लोगो का अप्रूवल मिला है उसके अलावा कोई लोगो प्रदर्शित नहीं किया जा सकता है। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के लोगो और ड्रेस कोड के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी तय ड्रेस या किट से छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। यहां तक कि उस पर किसी प्रकार का दूसरा रंग भी नहीं इस्तेमाल किया जा सकता। किसी खिलाड़ी के क्रिकेटिंग किट पर सिर्फ मैन्युफैक्चरर का ही लोगो हो सकता है। खिलाड़ी और टीम के अधिकारियों को आर्म बैंड या ड्रेस के जरिए कोई भी निजी मैसेज देने की अनुमति नहीं है। हालांकि आईसीसी के क्रिकेट आॅपरेशंस डिपार्टमेंट से अनुमति लेने के बाद ऐसा किया जा सकता है।
निश्चित तौर पर धोनी ने आईसीसी के उन तमाम नियमों का ध्यान नहीं रखा। ग्लव्स बनाने वाली कंपनी एसजी ने भी साफ कर दिया है कि उन्होंने इस तरह के चार जोड़ी ग्लव्स धोनी को दिए हैं, लेकिन उसमें सिर्फ उनकी कंपनी का लोगो ही है। बलिदान लोगो उनका नहीं है। पर जब तक सभी तथ्य सामने आते पूरे देश में राष्टÑभक्ति की ऐसी लहर दौड़ गई जिसमें धोनी के ग्लव्स को देश के सम्मान से जोड़ दिया गया। हंगामा इतना अधिक बढ़ चुका है कि हर तरफ धोनी के ग्लव्स की ही चर्चा है। टीवी पर स्पेशल डिबेट कराए गए। तथ्यों को बिना समझे बगैर इंडियन टीम को वापस बुलाने जैसे मुर्खतापूर्ण बातें की जाने लगी। हर तस्वीर के दो पहलू होते हैं। दोनों पहलुओं को समझे बगैर सोशल मीडिया में ज्ञान बांटने वालों की भरमार है। ऐसे में धोनी बेहद समझदार निकले। उन्हें तुरंत अपनी गलती का अहसास हुआ है और उन्होंने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगले मैच से वो बलिदान का लोगो नहीं लगाएंगे। धोनी ने हमें तमाम ऐेसे मौके दिए हैं जब हम खुद को भारतीय होने पर गर्व करें। तमाम ऐसे मौके आए जब हम भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा हुआ।
इसमें दो राय नहीं कि जब धोनी के ग्लव्स पर बलिदान का चिह्न देखा गया तो देशप्रेम की लहर दौड़ गई हर एक भारतीय सीने में। पर समझने और मंथन करने की जरूरत है कि खेल के मैदान के अपने नियम कायदे हैं। हर एक खिलाड़ी को उसका सम्मान करना चाहिए। धोनी ने खेल के नियमों का सम्मान देकर एक बार फिर अपने चाहने वालों का दिल जीत लिया है। पर इस बलिदान को इस तरह भुलाया नहीं जा सकता है। भले ही बीसीसीआई अभी चुप हो गई है, लेकिन उसे भविष्य के लिए तैयार होना चाहिए। उसे धोनी के ग्लव्स पर लगाने वाले बलिदान के लोगो के लिए आईसीसी से स्पेशल परमिशन की दरख्वास्त करनी चाहिए।
जब नियम हैं कि इस तरह के चिह्न लगाए जा सकते हें, लेकिन उसके लिए पहले परमिशन लेना जरूरी है, तो क्यों नहीं परमिशन लेकर ही इसे लगाया जाए। और खिलाड़ियों को भी मंथन जरूर करना चाहिए कि राष्टÑभक्ति का प्रदर्शन बुरा नहीं है, लेकिन बिना सोचे समझे यह प्रदर्शन कई बार विवाद भी पैदा कर देता है इसका भी ख्याल रखना चाहिए।
Kunal@aajsamaaj.com
(लेखक आज समाज के संपादक हैं )

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