Home खेल क्रिकेट विश्व कप London Diary – History of Ball Tempering is old but not possible now: लंदन डायरी- बॉल टेंपरिंग का इतिहास पुराना है पर अब संभव नहीं

London Diary – History of Ball Tempering is old but not possible now: लंदन डायरी- बॉल टेंपरिंग का इतिहास पुराना है पर अब संभव नहीं

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लंदन। भारत-आॅस्टेÑलिया के मैच के दौरान रविवार को एक बार फिर स्टीव स्मिथ को चीटर संबोधन सुनने को मिला। विराट कोहली बल्लेबाजी कर रहे थे। उन्हें यह अच्छा नहीं लगा। भारतीय कप्तान ने दर्शकों से ऐसा न करने की अपील की। एक साल तक प्रतिबंधित रहने के बावजूद लोग उन्हें बॉल टेंपरिंग के आरोपों से उबरने नहीं दे रहे। स्मिथ के साथ साथ वार्नर को विश्व कप में भी हूटिंग का सामना करना पड़ रहा है। 28 मार्च 2018 को कैमरून बेंकक्राफ्ट रेगमाल से गेंद को घिसते देखे गए थे। स्मिथ और वार्नर ने इस योजना की जिम्मेदारी ली थी, जिसके लिए उन पर एक साल का प्रतिबंध लगा। इतनी कड़ी सजा के बाद कोई खिलाड़ी ऐसा करेगा, सोचा नहीं जा सकता। लेकिन रविवार को भारत-आॅस्टेÑलिया मैच में ही एक बार फिर बॉल टेंंपरिंग का मामला उठा है। एडम जम्पा गेंद को जेब में डाल कर उससे छेड़छाड़ करते पाए गए हैं। हालांकि आॅस्टेÑलियाई कप्तान ने इस आरोप को नकारा है। कहा कि जम्पा अपने हाथों को जेब में डाल कर गर्म कर रहे थे। आज के जमाने में मैदान पर इतने कैमरे होते हैं कि कोई भी इनकी नजर से बच नहीं सकता। फिर ऐसी हिमाकत कोई कैसे कर सकता है। लेकिन क्रिकेट मैच जीतने के लिए खिलाड़ी अपना सब कुछ झोंक देते हैं तो कुछ कहा नहीं जा सकता। मेरे जहन में बॉल टेंपरिंग की पहली घटना 1977 की है। उस दौरान वैसलीन प्रकरण जबरदस्त रूप से उछला था। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जॉन लीवर ने चेन्नई की गर्मी से बचने के लिए माथे पर वैसलीन जैली लगाई थी। जिसे वह गेंद पर भी लगा रहे थे। कप्तान बिशन बेदी ने शिकायत की और बात सही पाई गई। लीवर को कोई सजा नहीं मिली। उसके बाद अनेक प्रकरण हुए। 1994 में माइक अथर्टन पिच से मिट्टी उठाकर हाथों का गीलापन दूर करने के साथ गेंद को भी घिस रहे थे। उनपर 3700 डालर का जुर्माना लगा। 2010 में पर्थ में शाहिद अफरीदी गेंद को चबाते पाए गए। उन पर दो टी20 मैचों का प्रतिबंध लगा। उसी साल जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड को गेंद को अपने जूतों के स्पाइक से रोककर खराब करते पाया गया। 2013 में दक्षिण अफ्रीका के फाफ डू प्लेसिस पैंट की जिप पर गेंद को घिसते पाए गए जबकि 2016 में फिर फाफ डू प्लेसिस मिंट लगाकर गेंद को चमकाते पाए गए। हैरत है कि इतनी पारदर्शिता के बावजूद खिलाड़ी ऐसा करने का प्रयास कर रहे हैं।

विपिन कुमार बहुगुणा

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