Home खेल क्रिकेट विश्व कप London Diary- An opportunity to play Rishabh Pant: लंदन डायरी- ऋषभ पंत को खेलाने का मौका

London Diary- An opportunity to play Rishabh Pant: लंदन डायरी- ऋषभ पंत को खेलाने का मौका

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लंदन। ऋषभ पंत का इस विश्व कप में अजब संयोग है। आज भी वे कभी टीम में दिख रहे हैं तो कभी बाहर बैठे। शनिवार को उन्हें खेलाया जाना चाहिए, पर ये कुछ तय नहीं है। जब तक टीम घोषित नहीं हुई थी, तब तक यह माना जा रहा था कि ऋषभ का टीम में चुना जाना तय है। लेकिन जब टीम घोषित हुई तो ऋषभ का नाम उसमें नहीं था। क्रिकेट ज्ञानियों ने अलग अलग राय जाहिर की। कुछ ने पक्ष में तो कुछ ने विपक्ष में। क्रिकेट फैंस ने तो सोशल मीडिया में जैसे मुहिम सी छेड़ दी। चयनकर्ता पंत की जगह चुने गए दिनेश कार्तिक के पक्ष में तर्क देने लगे। अनुभव को तरजीह देने की बात कहने लगे। कार्तिक को थ्री डायमंशन खिलाड़ी बताए जाने पर अम्बाती रायडू ने तो थ्री डी चस्मा मंंगवाने का व्यंग्य भी कर डाला। पंत के पक्ष में अलबत्ता आवाजें उठती ही रहीं और हिसाब किताब लगाए जाने लगे कि किस तरह विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत टीम में जा सकते हैं। विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी का विश्व कप में खेलना तय था। उनके चोटिल हो जाने की स्थिति में बैकअप के रूप में दिनेश कार्तिक चुने गए थे। अब धोनी चोटिल नहीं होंगे तो कार्तिक नहीं खेलेंगे और जब वो खेलेंगे ही नहीं तो चोटिल भी नहीं होंगे। सो पंत का टीम में जाना असंभव था। पंत ने बहुत ही संयम से काम लिया और कहा कि आगे बहुत मौके मिलेंगे। इसी बीच प्रशंसकों की लगातार उठती आवाज के आगे आखिरकार चयनकर्ताओं ने पंत को एवजी खिलाड़ी के रूप में चुन लिया। एक खिलाड़ी चोटिल होकर मौका खोता है जबकि दूसरा खिलाड़ी भाग्यवश मौका हासिल कर लेता है। इस लिहाज से पंत के लिए छींका टूटा।

आॅस्टेÑलिया से मैच के दौरान शिखर धवन के अंगूठे पर चोट आई और ऋषभ पंत को उनके एवज में इंग्लैंड बुला लिया गया। शिखर ने अंगूठा टूटने के बावजूद शतक जमाया था। वो आगे भी खेलना चाहते थे पर अंगूठे में फ्रैक्चर था, जिससे बाहर हो गए और पंत टीम में शामिल हो गए। उन्हें खेलाया जाना तय नहीं था। चौथे नम्बर पर पाकिस्तान के खिलाफ विजय शंकर ने अच्छा हरफनमौला प्रदर्शन किया था। गुरुवार को अभ्यास के दौरान विजय शंकर के पैर पर बुमराह की गेंद लग गई। उनके भागने में थोड़ी लचक है। सो पंत के लिए मौका बन गया है। सारे हालात बन चुके हैं कि ऋषभ पंत को अफगानिस्तान के खिलाफ उतारा जाए। पंत को लप्पेबाज माना जाता है, इसलिए वे अधिक भरोसेमंद नहीं माने जाते। लेकिन ये भी हकीकत है कि यदि उनका बल्ला चलने लगा तो टीम का जीतना तय समझें। उनमें वींरेंद्र सहवाग की छवि नजर आती है। अफगानिस्तान के खिलाफ उन्हें आजमाया जाना चाहिए। शायद वे तुरुप का पत्ता साबित हों।

विपिन कुमार बहुगुणा

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