Home दुनिया Leaving the path of radicalism, trying to live a normal life is nine years old: कट्टरपंथ की राह छोड़कर सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रही है नौ साल की मीला

Leaving the path of radicalism, trying to live a normal life is nine years old: कट्टरपंथ की राह छोड़कर सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रही है नौ साल की मीला

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 जकार्ता।  गुलाबी रंग का हिजाब पहने हुए चुलबुली-सी दिखने वाली नौ साल की मीला को कट्टरपंथ की राह से जुदा करके अब पूरी तरह से नयी जिंदगी जीने के लिए तैयार किया जा रहा है जहां दुनिया के प्रति सिर्फ और सिर्फ प्रेम की भावना होगी। मीला के माता-पिता ने खुद को बम से उड़ाने से पहले उसे मोटरसाइकिल से फेंक दिया था। वह आत्मघाती हमले करने वाले परिवार में जीवित बची अकेली लड़की है। इंडोनेशिया बच्चों समेत परिवार द्वारा आत्मघाती धमाकों से दहल गया है। अनाथ और कट्टर बना दी गई मीला के भविष्य को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थी लेकिन पुनर्वास के प्रयासों से मीला और उसके जैसे अन्य बच्चों को सामान्य जिंदगी जीने का मौका दिया गया है। बच्ची को मीला नाम एएफपी ने दिया है। वह उस छोटे-से दिखने वाले समूह की सदस्य है जिनका जकार्ता में एक अनोखी योजना के तहत इलाज चल रहा है जहां उसकी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक देखरेख की जा रहा है।

यह आतंकवादी साजिशों में शामिल आत्मघाती हमलावरों या बच्चों को सही राह पर लाने की योजना है। दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश ह्यपरिवार हमलोंह्ण के बढ़ते वैश्विक हमलों से जूझ रहा है और इस समस्या से जूझ रहा है कि आईएस से लौटे जिहादियों को फिर से कैसे मुख्यधारा में शामिल किया जाए। पुनर्वास केंद्र की प्रमुख नेनेंग हेयार्नी ने कहा, ह्यह्यबच्चों से निपटना आसान नहीं रहा क्योंकि वे चरमपंथ में विश्वास रखते हैं और मानते हैं कि धमाके करना अच्छी चीज है।ह्णह्ण उन्होंने बताया, ह्यह्यउन्हें सिखाया गया कि जन्नत जाने के लिए जिहाद जरुरी है और तुम्हें चरमपंथ में भरोसा ना रखने वालों को मारना होगा। उनकी मानसिकता बदलना बहुत मुश्किल है।ह्णह्ण सामाजिक कार्यकर्ता और मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग के जरिए उन्हें फिर से समाज की मुख्यधारा में शामिल कर रहे हैं और दिन-प्रतिदिन के कामों में उन्हें शामिल कर रहे हैं जिनमें मस्जिद में जाना और रोज खेलना शामिल है।

पिछले साल सुराबाया में आत्मघाती हमलों से जुड़े आतंकवादी संदिग्धों के अन्य बच्चों का भी यहां उपचार चल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता मुस्फिया हांडयानी ने कहा, ह्यह्यहम अब भी उन्हें पढ़ाते हैं कि कुरान हर चीज की नींव है और उन्हें इसमें भरोसा करना होगा। लेकिन अगर आप दूसरे लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करेंगे तो यह ठीक नहीं है।ह्णह्ण आॅस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (एएनयू) के चरमपंथी परिवारों की विशेषज्ञ हौला नूर ने कहा, ह्यह्यहमें इन बच्चों को पीड़ितों के साथ-साथ संभावित हमलावरों के तौर पर देखना चाहिए।ह्णह्ण पिछले दशक में इंडोनेशिया में बढ़े इस्लामिक हमलों से देश की धार्मिक सहिष्णुता की छवि धूमिल हुई है। मीला अपने माता-पिता के साथ मोटरसाइकिल पर बैठी थी जब उन्होंने गत मई में सुराबाया पुलिस चौकी पर खुद को उड़ाया। हांडयानी ने बताया कि मीला में अच्छा-खासा बदलाव देखा गया। अब वह लोगों से बातचीत कर सकती है।

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