Home विचार मंच Leaving everything behind, Sushma merges in Panchatattva: सब कुछ पीछे छोड़, पंचतत्व में विलीन हुर्इं सुषमा

Leaving everything behind, Sushma merges in Panchatattva: सब कुछ पीछे छोड़, पंचतत्व में विलीन हुर्इं सुषमा

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सुबह का सामना एक बेहद बुरी खबर से हुआ। सोकर उठा तो पता चला सुषमा जी नहीं रहीं। वक्त के पहले दिल की बीमारी की वजह से उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। अचानक इतनी जल्दी सब कुछ हुआ कि सहसा यह विशवास हीं नहीं हुआ कि सुषमा स्वराज हमारे बीच अब नहीं हैं। अभी दिल्ली की पूर्व मुंख्यमंत्री शीला दीक्षित का खालीपन भरा नहीं था कि एक और पूर्व मुख्यमंत्री और प्रखर राजनीतिज्ञ एंव विदूषी महिला का महाप्रयाण हो गया। यह भारतीय राजनीति के लिए विशेष क्षति है, जिसकी रिक्कतता को पूर्ण करना असंभव है। सुषमा में एक राजनेता के अलावा एक महिला का नरम दिल भी था।
प्रखर व्यक्तित्व, विलक्षण प्रतिभा, भाषा शैली और विद्वता की एक मिसाल थी। देश हो या विदेश। संसद हो या फिर संयुक्तराष्टÑ महासभा में अपनी प्रतिभा का जलवा उन्होंने बिखेरा। आधुनिक राजनीति में अटल बिहारी बाजपेयी के बाद महिला राजनीति में ऐसी व्यक्तित्व और प्रभावशाली महिला नहीं हुई। सुषमा के भीतर गजब का प्रशासनिक कौशल और निर्णय लेने की क्षमता थी। विदेश मंत्रित्व काल में काफी लोगों को सिर्फ एक ट्वीट पर वीजा की सुविधा के साथ दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराई। लोगों को गंभीर बीमारी से भी निजात दिलाया।
14 फरवरी 1952 में हरियाणा के अंबाला छावनी में जन्मी इस बेटी ने 6 अगस्त 2019 को दिल्ली में अंतिम सांस लिया। भारत में इलाज करवाने की इच्छा रखने वालों को भी मदद उपलब्ध कराई। विदेश में फंसे लोगों को निकाल कर परिवारों को खुशियां लौटाई कार्डियों अरेस्ट की बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई। प्रधानमंत्री मोदी उनकी मौत पर इतने दु:खी हुए कि वह अपना गम छुपा नहीं पाए और फफक कर रो पड़े। कश्मीर में धारा-370 की समाप्ति पर वह काफी खुश थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट कर लिखा कि प्रधानमंत्री जी आपका अभिनंदन मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी। बीबीसी के अनुसार अंतरराष्टÑीय न्यायालय हेग में पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूष जावध की केस लड़ने वाले चर्चित अधिवक्ता हरीश साल्वे उनकी मौत से बेहद स्तब्ध हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा है कि कुछ घंटे पहले उन्होंने स्वराज से बात की थी। लेकिन अब वह दुनिया में नहीं हैं। साल्वे से स्वराज ने मौत से पहले कुछ घंटे हुई बातचीत में कहा था कि आओ और जावध की फीस के एक रुपए ले जाओ। क्योंकि साल्वे ने जावध की केस को एक रुपए में लड़ने का फैसला किया था।
विदेशमंत्री रहते हुए उनका कार्यकाल किसी स्वर्णिम युग से कम नहीं था। जिसने भी वीजा या दूसरी सुविधाओं के लिए ट्वीट किया विदेश विभाग की तरफ से हर संभव मदद दिलाई गई। सना और फैजान को एक ट्वीट पर वीजा मिला। अभिनव विंद्रा के कोच का वीजा विदेश दौरे के ऐन वक्त गायब होने पर विंद्रा के एक ट्वीट पर सुषमा के आदेश पर विदेश विभाग ने वीजा उपलब्ध कराया। लेकिन उन्होंने विंद्रा से एक वादा लिया कि देश के लिए गोल्ड मेडल जीत कर लाना हैं। 2001 में जोधपुर निवासी नरेश टीवानी पाकिस्तान गए और सिंधी समुदाय का रीति-रिवाज इतना भाया कि उन्होंने उसी समुदाय की प्रिया बचानी से शादी कर लिया। लेकिन वीजा की समस्या पत्नी का भारत आना संभव नहीं था लेकिन स्वराज की मदद से वीजा उपलब्ध कराया गया। 2018 में पाकिस्तान की जेल में बंद हामिद को परिजनों की गुहार पर भारत लाया गया। हालांकि मुस्लिम युवक अनस सिद्धिकी और हिंदू लड़की तन्वी से विवाह के बाद पासपोर्ट को लेकर सोशलमीडिया पर उन्हें काफी अपमानित होना पड़ा। शायद उनके जीवन का यह सबसे गलत फैसला था। लेकिन उन्होंने इस स्थिति का सामना बेहद शालीनता से किया और लोगों को उसका जबाब दिया। लेकिन उनका एक सपना अधूरा रह गया और पाकिस्तान से भारती लाई गई गीता की शादी कराए बगैर वह दुनिया से अलविदा हो गर्इं।
सुषमा स्वराज का जन्म हरियाणा में हुआ। वह कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक कुशल अधिवक्ता भी बनी। 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनैतिक जीवन की शुरूवातब की। आपातकाल में उन्होंने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में खुल कर भाग लिया। बाद में उन्होंने जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। लेकिन जब अस्सी के दशक में भाजपा का गठन हुआ तो उसमें शामिल हो गर्इं। अंबाला से दो बार विधायक चुनी गई और भाजपा-लोकदल सरकार में शिक्षामंत्री बनी। वह तीन बार विधायक रहीं और हरियाणा राज्य की भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी बनीं। 1990 में वह राज्यसभा की सदस्य बनीं। 1996 में अटल बिहारी बाजपेयी की 13 दिन वाजी सरकार में सूचना प्रसारणमंत्री बनी। 1998 में वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी। बाद राष्टÑीय राजनीति में आने के लिए राज्य विधानसभा से त्याग पत्र दिया। उसके बाद बेल्लारी से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ी लेकिन पराजित हुई। 2009 में वह मध्यप्रदेश की विदिशा लोकसभा से सांसद चुनी गई। बाद में 15वीं लोकसभा में उन्हें प्रतिपक्ष के नेता की जिम्मेदारी संभालना पड़ी। स्वराज संदीय कार्यमंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, परिवार कल्याण मंत्री बनी। 2014 में मोदी सरकार में पहली बार किसी महिला को विदेश विभाग की जिम्मेदारी दी गई, जिसे उन्होंने बेहद अच्छे ढंग से निभाया। इस दौरान विदेश विभाग का कार्य बेहद सराहनीय रहा।
सुषमा स्वराज एक प्रखर वक्ता थीं। जब संसद में विपक्ष के सवालों का जबाब देती थीं तो शांति फैल जाती थी। सत्ता या प्रतिपक्ष के नेता उनकी प्रभावशाली हिंदी और वाक्क पटुता के कायल थे। महिला राजनीति की बात करें तो आधुनिक भारतीय राजनीति में ऐसी प्रखर भाषा शैली और भाषाई ज्ञान शायद किसी के पास हो। वह हिंदी, संस्कृत, कन्नड़, हरियाणवी, पंजाबी और अंग्रेजी जैसे भाषाओं पर समान अधिकार रखती थी। भारतीय राजनीति और राजनेताओं की कतार में उनकी अलग पहचान बनी। हिंदी और संस्कृत को बराबर का सम्मान दिया। संसद में उन्होंने संस्कृत में शपथ लिया था। उनकी ओजस्वी भाषण शैली का कोई जबाब नहीं था। साल 2018 में संयुक्तराष्टÑ संघ में भारत का पक्ष रखते हुए पाकिस्तान पर जब हमला बोला तो वहां भी तालियां बजने लगी।
इसी तरह 2015 में भी पाकिस्तान के लिए यूएन में अच्छा भाषण दिया था। वह अटल बिहारी वाजपेयी और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं और अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी के साथ निर्वहन किया। हालांकि 2018 में उन्होंने चुनाव न लड़ने की घोषणा किया। क्योंकि मोदी सरकार की यह नीति है कि राजनीति में 60 साल के बाद रिटायर हो जाना चाहिए। जबकि सुषमा स्वराज रिटायर होने वाली नेताओं में नहीं थी। लेकिन पार्टी लाइन का सम्मान करते हुए राजनीति को बेहदशलीनता से अलविदा कहा। राजनीति में उन्होंने कभी भाई-भतीजावाद को हावी नहीं होने दिया। एक शालीन राजनीति को जिया और ओढ़ा। भारत की इस बेटी ने देश में ही नहीं दुनियां में भारत का नाम रोशन किया। हमेंशा साफ-सुथरी राजनीति की मिसाल पेश किया। राजनीति को निजी स्वार्थ से अलग रखा। हमेंशा वह राष्टÑहित को बरीयता में रखा। राजनीति में नैतिकता कायम रखी। उनकी रिक्कतता बेहद खलेगी। स्वराज देश आपको नमन करता है। आनने भारत की बेटियों का नाम रौंशन किया है। लेकिन तू फिर लौट कर आना।

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