Home संपादकीय Jind’s victory is also seen in the general budget.:आम बजट में भी दिखा जींद की विजय का असर

Jind’s victory is also seen in the general budget.:आम बजट में भी दिखा जींद की विजय का असर

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जींद में राजनीतिक वनवास खत्म होने के बाद भाजपा नेतृत्व हरियाणा को लेकर बेहद उत्साहित भी है और खासकर जींद के विकास पर उसकी विशेष नजर है। केंद्र सरकार के आम बजट में जींद को रेलवे की कई सौगातों का मिलना तो इसी बात का इंगित है। इस बजट पर गौर करें तो जींद में न केवल कई जगह पुरानी लाइनें बदली जाएंगी बल्कि जींद और हांसी के बीच नई रेलवे लाइन भी शुरू होगी। हालांकि यह परियोजना दस साल से प्रक्रिया में है। अब यह सिरे चढ़ने वाली है। इससे जींद चतुर्दिक रेल मार्ग से जुड़ जाएगा। दिल्ली-बठिंडा रेलवे सेक्शन पर तीन स्टेशनों पर इंटर ब्लॉक सेक्शन बनाए जाने हैं, इनमें जींद-बरसोला को भी शामिल किया जा रहा है। निश्चित रूप से इससे ट्रेन यातायात के सुचारु होने में मदद मिलेगी। जींद-बरसोला रेलवे स्टेशन के बीच इंटर ब्लॉक सेक्शन बनने से जींद रेलवे जंक्शन से एक ट्रेन को बरसोला पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके बीच में एक और सिग्नल लगेगा। मतलब जैसे ही ट्रेन इस सिग्नल को पार कर लेगी, तभी उसके पीछे की दूसरी ट्रेन को चलाया जा सकेगा। जींद की यह अब तक की सबसे बड़ी समस्या थी जो मोदी सरकार ने दूर करने का निर्णय लिया है।

जींद-नरवाना रेलवे लाइन पर रोज 70 यात्री गाड़ी और 20 मालगाड़ी चलती हैं। नई व्यवस्था से अगर एक ट्रेन के परिचालन में पांच मिनट भी बचेगा तो इससे लोगों को, रेल प्रशासन को बड़ी सहूलियत होगी। बजट में जींद की इन तीनों परियोजनाओं के लिए चार करोड़ 85 लाख 90 हजार रुपए का प्रावधान कर केंद्र सरकार ने जींद विधानसभा क्षेत्र के लोगों से किया गया अपना विकास का वादा पूरा करने की दिशा में अपना पहला कदम आगे बढ़ा दिया है। नरवाना-कुरुक्षेत्र रूट पर 25 करोड़ रुपए की लागत से साढ़े 31 किलोमीटर में टीआरआर होनी है। जींद-पानीपत रूट पर 5.70 किलोमीटर में सीटीआर होनी है। जिस पर पांच करोड़ रुपए का खर्च आएगा। जींद-पानीपत रूट पर साढ़े 40 किलोमीटर में सीटीआर पर 66 करोड़ 61 हजार रुपए खर्च होंगे। नरवाना-कुरुक्षेत्र रूट पर 27.67 किलोमीटर पर सीटीआर होनी है। इस पर 36 करोड़ 87 हजार रुपए राशि खर्च होगी। नरवाना-कुरुक्षेत्र रूट पर 1.96 किलोमीटर में सीटीआर पर छह करोड़ 52 लाख रुपए खर्च होंगे वहीं जींद-पानीपत रूट पर 10.72 किलोमीटर मे सीटीआर पर 21 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव बजट में शामिल किया गया है। वैसे भी जींद को रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कई उपहार दिए हैं।

जींद-हांसी रेलवे लाइन पर काम इस जिले की सबसे बड़ी उपलब्धि है। कई रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी और आरयूबी बनने हैं। कई जगह पुरानी पटरी बदली जानी है। इस बजट से जींद को विकास की नई गति मिलेगी। इसकी उम्मीद तो की ही जा सकती है। इसके अतिरिक्त रेल बजट में हिसार से अग्रोहा, फतेहाबाद, सिरसा के बीच रेललाइन बनाने के लिए 40 लाख रुपए के बजट का प्राविधान किया गया है। इस रेल लाइन के बनने से करीब पांच लाख लोग लाभान्वित होंगे। संप्रति अग्रोहा व फतेहाबाद जाने के लिए रोडवेज व प्राइवेट बसें ही एक विकल्प है। हिसार से सिरसा के लिए पहले से ही ट्रेनें चल रही हैं। अब अग्रोहा व फतेहाबाद के लिए ट्रेनें चलने से हिसार, फतेहाबाद व सिरसा के जिलों के लोगों को राहत मिलेगी। हिसार से सिरसा जाने वाले यात्रियों को इसका डबल फायदा होगा। हिसार से सिरसा तक पहले ही नौ ट्रेनें रोज चलती हैं। फतेहाबाद, अग्रोहा व सिरसा रूट पर रेलवे लाइन बनने से सिरसा जाने वाले यात्री दो रूटों से आवागमन कर सकेंगे। यह बजट फतेहाबाद व अग्रोहा के लिए न केवल ऐतिहासिक होगा बल्कि बेहद खास भी होगा क्योंकि इस बजट के तहत बनने वाली रेलवे लाइन फतेहाबाद व अग्रोहा के लिए पहली रेलवे लाइन होगी। जींद विधानसभा उपचुनाव जीतने के बाद डॉ. कृष्ण मिड्ढा की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात को इस योजना की वजह माना जा रहा है। मिड्ढा ने जींद के भावी विकास को लेकर दोनों नेताओं से चर्चा की थी और उन्हें दोनों ही के स्तर पर पूरा सहयोग देने का वचन भी मिला था। रेलवे बजट तो यही बताता है कि विकास की उनकी मुद पूरी करने का प्रयास आरंभ हो गया है।

गौरतलब है कि हाल ही में विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आए हैं जिसमें भाजपा की जीत के साथ ही जींद में उसका राजनीतिक वनवास टूटा है। 2009 में कांग्रेस सरकार में मंत्री रहते मांगेराम गुप्ता इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा से हार गए थे। इसके बाद 2014 के विधानसभा चुनाव में भी डॉ. हरिचंद मिड्ढा विधायक बने। अब जींद की जनता ने सत्ता पक्ष के उम्मीदवार को अपना विधायक चुना है। इसके साथ ही जींद पर हमेशा सत्ता से बाहर रहने का लगा टैग भी हट गया है। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जबरदस्त लहर के बीच जींद में भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्र बरवाला जब हारे थे तो राजनीति की वादियों में यही संदेश गूंजा था कि जींद की जनता सत्ता के खिलाफ चलती है लेकिन जींद ने इस मिथक को अपने ही निर्णय से ध्वस्त कर दिया है। यह भी सच है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में लहर के बाद भी जींद विधानसभा सीट से जिस उम्मीदवार से भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र बरवाला की पराजय हुई थी, उसी के परिवार के सदस्य को अपनी पार्टी से जोड़कर भाजपा ने जींद की चुनावी वैतरणी पार कर ली है।

दरअसल 2014 के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा के सुरेंद्र बरवाला और इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा के बीच हुआ था। डॉ. हरिचंद मिड्ढा के कार्यकाल में इनेलो में रहते जिस डॉ. कृष्ण मिड्ढा के निशाने पर विकास को लेकर भाजपा रही, चुनाव से महज दो महीने पहले उसे भाजपा ने अपनी राजनीतिक पतवार बनाकर वैतरणी पार कर ली। पिछले चुनाव में डॉ. हरिचंद मिड्ढा, सुरेंद्र बरवाला व टेकराम कंडेला उम्मीदवार थे। तीनों को मिलाकर 72 हजार मत मिले थे। इनमें डॉ. हरिचंद मिड्ढा को 31631, सुरेंद्र बरवाला को 29374 और टेकराम कंडेला को 11 हजार मत मिले थे। इस बार भी सुरेंद्र बरवाला और टेकराम कंडेला भाजपा के टिकट के दावेदार थे, लेकिन अंतिम समय में डॉ. कृष्ण मिड्ढा को टिकट मिल गया। इससे सुरेंद्र बरवाला और टेकराम कंडेला भाजपा से नाराज गए, लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल दोनों को मनाने में सफल रहे। इससे भाजपा के उम्मीदवार की स्थिति काफी मजबूत हो गई।

उपचुनाव में भाजपा ने शहरी उम्मीदवार को टिकट देकर ग्रामीण कार्यकर्ताओं को मजबूत किया। यह सोशल इंजीनियरिंग काफी सफल रही। पहली बार जींद के रण में उतरे बाहरी उम्मीदवारों को जींद की जनता ने नकार दिया है। हालांकि जींद में अब तक बाहर से आकर किसी बड़े नेता ने चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उपचुनाव में पहली बार दो दिग्गज चुनाव मैदान में उतरे और दोनों चुनाव हारे। जींद में अब तक 13 विधायक बने हैं। इनमें से कोई भी बाहरी नहीं बना। सबसे पहले 1967 व 1968 में कांग्रेस के दयाकृष्ण, 1972 में चौधरी दल सिंह, 1977 में मांगेराम गुप्ता, 1982 में बृजमोहन सिंगला, 1987 में परमानंद, 1991 में मांगेराम गुप्ता 1996 में बृजमोहन सिंगला, 2000 व 2005 में मांगेराम गुप्ता और इसके बाद 2009 व 2014 में हुए चुनाव में डॉ. हरिचंद मिड्ढा विधायक चुने गए।

चार दशक तक जींद की सियासत मांगेराम गुप्ता व बृजमोहन सिंगला के चारों ओर घूमती रही, लेकिन कोई भी बाहरी उम्मीदवार जींद में चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सका। इस चुनाव में पहली बार कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला और जजपा के दिग्विजय चौटाला यहां चुनाव लड़ने आए थे। दोनों ही जींद के बाहर के थे और उनका राजनीतिक हस्र क्या हुआ, यह किसी से छिपा नहीं है। जहां तक बड़ी हार -जीत का सवाल है तो पांचवीं बार जींद की धरती ने ऐसा किया है। पांचवीं बार यहां हार-जीत का फर्क दस हजार मतों से ज्यादा रहा है। 1967 में कांग्रेस के दयाकृष्ण 10541 मतों से निर्दल प्रत्याशी इंद्र सिंह को शिकस्त देकर विधायक बने थे। 1968 में हुए दूसरे चुनाव में हालांकि दयाकृष्ण फिर से विधायक बने, लेकिन वे महज 1597 मतों से ही आजाद उम्मीदवार शंकरदास को हरा सके। 1972 में कांग्रेस के दल सिंह ने कांग्रेस के दयाकृष्ण का 6282 मतों से हराया। 1977 में आजाद उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता ने जनता पार्टी के प्रताप सिंह को 6105 मतों से हराया। 1982 में लोकदल के बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को महज 146 मतों से हराया। 1987 में लोकदल के परमानंद ने 8102 मतों से कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया था। 1991 में दूसरी बार हार जीत का अंतर दस हजार वोट से अधिक का हुआ और कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने जनता पार्टी के टेकराम को 16133 मतों से हरा दिया।

1996 में हरियाणा विकास पार्टी के बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 18558 मतों से हराया था। वर्ष 2000 के चुनाव में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के गुलशन लाल को 4643 मतों से हराया। 2005 में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के सुरेंद्र बरवाला को 17435 मतों से हराया। 2009 के चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 7862 मतों से हराया था। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा ने भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को 31631 व बरवाला को 2257 मतों से हराया। हालिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने जेजेपी के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला को 12935 मतों से हराया है। जींद विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में जीत का असर दिखाई भी देने लगा है। आम बजट में जिस तरह जींद को तरजीह मिली है। हांसी, हिसार, अग्रोहा, सिरसा और फतेहाबाद को महत्व दिया गया है, उसके अपने राजनीतिक संकेत भी है। जींद में भाजपा की विजय के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा था कि अगर केंद्र सरकार का इशारा हो तो यहां भी आम चुनाव के साथ ही चुनाव कराए जा सकते हैं। तीन राज्यों की चुनावी शिकस्त के बाद जींद की जनता ने भाजपा का मनोबल बढ़ाया है, ऐसे में उसका यह फर्ज तो बनता ही है कि वह जींद के उत्तरोत्तर विकास के सपने को पूरा करे।

शिवकुमार शर्मा

(लेखक इंडिया न्यूज के डिप्टी एडिटर हैं)

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