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हरियाणा सरकार ने कैसे की जनता की मूलभूत जरूरत मद में कटौती,समझें

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चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने अपना हाल ही में बजट प्रस्‍तुत किया है, लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि राज्‍य की सरकार ने किस तरह से बहुत थोड़ा-थोड़ा भाग निकालकर जनता की मूलभूत जरूरतों के मदों में कटौती की है। इसे लेकर यह आंकड़े देखे जा सकते हैं जो साफ बता रहे हैं कि सरकार कैसे नए बजट में विविध मदों में कटौती करने में कामयाब रही ।

प्रदेश में शिक्षा पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 1.28 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस मामले में बताना होगा कि वर्ष 2017-18 में खर्च 14.24 प्रतिशत था जो इस बजट में घटाकर 12.96 प्रतिशत कर दिया गया है।

इसी प्रकार सरकार ने एक अत्‍यधिक महत्‍वपूर्ण विभाग जन स्वास्थ्य विभाग के खर्चों में भी कटौती की है। इस वर्ष इस मद पर 3.20 प्रतिशत ही खर्च होगा जो कि पिछले वर्ष 2017-18 में 3.31 प्रतिशत था।

कृषि क्षेत्र के लिए बजट दर्शाता है कि सरकार किसानों के साथ केवल आंकड़ों का खेल खेल रही है। सरकार के किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की बात कहने के बाद भी कृषि बजट में भी .27 प्रतिशत की कटौती की गई है जो पिछले वर्ष 12.49 से घटकर 12.22 कर दिया गया है।

वहीं बिजली विभाग का बजट 6.31 प्रतिशत से घटाकर 5.87 प्रतिशत हुआ है । परिवहन विभाग का बजट घटाकर 6.23 प्रतिशत से 4.73 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण विकास विभाग के बजट में 1.09 प्रतिशत की कटौती की गई है। यह बजट वर्ष 2017-18 में 4.85 प्रतिशत था जो वर्ष 2018-19 के लिए 3.76 प्रतिशत रखा गया है।

एक सच्‍चाई यह भी कि केंद्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन एक्ट के अनुसार राजस्व घाटा 2010-11 तक शून्य हो जाना चाहिए था वह इस सरकार में 8 हजार करोड़ रुपए है।

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