Home राजनीति एमपी के पूर्व सीएम गौर ने अपनी ही सरकार को घेरा

एमपी के पूर्व सीएम गौर ने अपनी ही सरकार को घेरा

भोपाल। भाजपा के वरिष्ठ विधायक एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने आज विधानसभा में अपनी ही पार्टी को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गयी है। गौर ने प्रश्नकाल के दौरान निर्वाचन कार्यों में शिक्षकों से बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) की ड्यूटी का काम लेने को लेकर पूछे गए प्रश्न के परिप्रेक्ष्य में आरोप लगाया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है। उन्होंने अखिल भारतीय सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश गणित में 29वें और भाषा में 26वें स्थान पर है। उनके आरोपों पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने साथ देते हुए सत्तापक्ष को कठघरे में खड़ा किया।
गौर ने सरकार से मांग की कि शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव कार्य में न लगाये। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रदेश में कुल कितने शिक्षकों को चुनाव कार्य में लगाया है, उसका विस्तृत ब्योरा दें। इसके जवाब में सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य ने कहा कि राज्य में 65,000 मतदान केन्द्रों में 41,340 शिक्षक फोटो निर्वाचक नामावली के कार्य हेतु बीएलओ नियुक्त हैं एवं जिला निर्वाचन कार्यालयों में 86 शिक्षक की ड्यूटी अस्थायी रूप में निर्वाचन कार्य हेतु लगायी गयी है।
आर्य ने बताया कि बीएलओ अपनी ड्यूटी के समय को छोड़कर अतिरिक्त समय में सुबह, शाम या अवकाश के दिन बीएलओ का कार्य करते हैं। इसके लिए उन्हें 6,000 रूपये अतिरिक्त मानदेय दिया जाता है। बीएलओ की ड्यूटी से विभाग का कार्य प्रभावित नहीं होता है। गौर ने इस पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षकों के 45,000 पद रिक्त पड़े हैं और शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगाई जा रही है। इसमें अन्य विभाग के लोगों को लगाना चाहिए। इस पर आर्य ने कहा कि निर्वाचन कार्यों के लिए दूसरे विभागों से कर्मचारी भी लगाये जाते हैं। यह अस्थाई काम है और कर्मचारियों को अपना मूल काम करते हुए यह कार्य शनिवार-रविवार को करना चाहिए।

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