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महिलाओं के बढ़ते यौन शोषण पर आधारित फिल्म है ‘मातृ’

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मुंबई। रवीना टंडन की फिल्म ‘मातृ’ उस कड़ी की एक फिल्म है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ बढ़ते यौन शोषण की घटनाओं को फोकस करके कहानियां बनाई जाती हैं। इन कहानियों में मसाले भरने की ललक ऐसी फिल्मों को अपने मकसद से दूर ले जाती है। ये फिल्म भी इसी का नमूना है।

कहानी दिल्ली की एक टीचर विद्या (रवीना टंडन) और उनकी 13 साल की बेटी की है। दिल्ली के मुख्यमंत्री का बिगड़ैल बेटा अपने दोस्तों के साथ विद्या और उसकी बेटी के साथ गैंगरेप करता है। इस हादसे में विद्या की बेटी की जान चली जाती है, जबकि विद्या किसी तरह से बच जाती हैं। विद्या का पति भी उनका साथ छोड़ देता है। राजनीति के दबाव में पुलिस भी कुछ नहीं करती, तो विद्या खुद आगे आती है और एक के बाद एक करके सभी दोषियों को सजा देने का काम करती है।

फिल्म अति नाटकीयता की भयंकर तौर से शिकार है। इस वजह से न तो इसके मुख्य किरदारों के साथ कोई जुड़ाव न हो पाता है और न ही इस वीभत्स कांड को लेकर दर्शकों की संवेदना जुड़ती है। किसी फिल्म की इससे बड़ी नाकामयाबी और कोई नहीं हो सकती। मसाले ठूंसने के चक्कर में निर्देशक महोदय ने फिल्म को कहीं का नहीं छोड़ा। रवीना टंडन खुद इस फिल्म में मिसफिट लगीं और ओवर एक्टिंग का शिकार होकर रह गईं। उनकी ये वापसी निराश करने वाली है।

एक बेहद संवेदनशील मुद्दे के साथ कमर्शियल मसालों को जोड़ने की ललक ने पहले भी कई इस तरह की फिल्मों को अपने मकसद से भटकाया है। इस फिल्म को जो भी देखने जाएगा, वो खुद को ठगा महसूस करेगा। ऐसी फिल्मों में बड़े सितारों के नामों की जरूरत नहीं होती, लेकिन जब कटेंट कमजोर हो और निर्देशक अकुशल हो, तो इनका कोई भविष्य नहीं रह जाता। मातृ का बॉक्स ऑफिस पर कोई भविष्य नहीं है। फिल्म का नाम मातृ है और फिल्म में नाम मात्र के लिए भी कुछ ऐसा नहीं, जिसे अच्छा माना जा सके।

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