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Real Estate and big Troubles: रियल एस्टेट और पहाड़ सी मुश्किलें

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कोरोना संकट के कारण देश के रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ा नुकसान हुआ है और आगे भी इसके उबरने में काफी लंबा समय लगेगा। जानकारों की माने तो रियल एस्टेट का उबार नहीं जल्दी होगा बल्कि आने वाले समय में इस सेक्टर बड़ी मुश्किलों से सामना करेगा।

देश में रियल एस्टेट सेक्टर का आकार 90000 करोड़ से अधिक है और ये देश की जीडीपी में 5% की हिस्सेदारी रखता है। कृषि के बाद एक यही क्षेत्र है जहां रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर मिलते हैं। इस बारे में जानकारों की माने तो आने वाले समय में रियल एस्टेट की कीमतों में 10 से 15 और अधिक से अधिक 20% तक कमी आयेगी और इसके लिए तैयार रहना चाहिए। सबसे पहले तैयार मकानों के दामों में कमी आएगी। ये सोच कर नहीं बैठना होगा कि आगे आने वाले समय में इन्हें दाम बढ़ेंगे बल्कि तुरंत कैश पाने के लिए इनको बेचना जरुरी होगा।

स्थिति यह है कि हर महीने होने वाले संपत्तियों के कुल सौदों में से 20 प्रतिशत सौदे निरस्त हो गए हैं और लोगों की राशि या तो डूब गई है या फिर आपसी समझ से वापस ले ली गई है जबकि पंजीयन कार्यालय में दस्तावेजों के पंजीयन रुक जाने से मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्क के रूप में मिलने वाले करोड़ों रुपये सरकारी खजाने में नहीं पहुंच पाए हैं।

वहीं जानकारों का ये भी कहना है कि इस क्षेत्र से जुड़े लोग ज्यादा लाभ कमाने के चक्कर में न पड़े क्योंकि रियल एस्टेट में सुधार होगा लेकिन लंबा वक़्त लगेगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में घरों की बिक्री 2019 की तुलना में 25 से 35 % तक कम होगी। इस बीच कुछ घर ऐसे होंगे जो बने नहीं होंगे लेकिन बिक चुके होंगे और ज्यादा बड़ी संख्या उनकी होगी जो बनकर तैयार खड़े हैं लेकिन बिके नहीं हैं और इन्ही के लिए घाटा सहना होगा।

एक रिपोर्ट की माने तो देशभर में 65 % लोग घर की किश्त नहीं चुकाते और ये अब आगे बढ़ने की ज्यादा आशंका है। अनुमान है कि 25 से 30 % इसमें गिरावट आ सकती है। इस बारे में बैंकों का सुझाव है कि सरकार इसमें दखल देते हुए निगम करों से आने वाले 6 महीने तक की राहत दी जानी चाहिए और सरकार से 20000 करोड़ डॉलर  के राहत पैकेज की मांग की है और आगामी छह महीनों के लिए दिवालिया कानून से जुड़ी गतिविधियों को रोकने की अपील की है।

नाइट फ्रैंक-फिक्की-नारेडको के 24वें रीयल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स-पहली तिमाही के मुताबिक, 2020 में क्षेत्र के लिए मौजूदा सेंटीमेंट अपने सर्वकालिक निचले स्तर 31 पर आ गई है। सर्वे के अनुसार क्षेत्र के लिए भविष्य की धारणा का स्कोर भी 36 पर आ गया है, जो बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 59 पर था।

संपत्ति क्षेत्र की सलाहकार नाइट फ्रैंक तथा उद्योग मंडल फिक्की और नारेडको के एक सर्वे में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में रीयल एस्टेट क्षेत्र में कुछ सुधार दिख रहा था। लेकिन कोविड-19 महामारी फैलने से इस क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है। क्षेत्र की मौजूदा और भविष्य की धारणा दोनों का इंडेक्स अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

रियल एस्टेट के जानकार बताते हैं कि आने वाले समय में प्रोपर्टी की कीमत में भारी कमी देखने को मिल सकती है। रेसिडेंशियल और कमर्शियल प्रोपर्टी की डिमांड घटेगी। प्रोपर्टी की कीमत में 20-30 फीसदी तक कटौती की जा सकती है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी हो सकती है। हालांकि बिल्डर्स को यह सुझाव दिया गया है कि जल्द से जल्द तैयार प्रोजेक्ट्स को सेल करने पर फोकस करें, इससे लिक्विडिटी की समस्या कम से कम हो।

इस साल मकानों की बिक्री पर बुरा असर पड़ सकता है। सर्वे के मुताबिक, हाउसिंग प्रोजेक्ट की बिक्री 64 फीसदी प्रभावित हो सकती है तथा कीमतों पर 64 फीसदी तक असर पड़ेगा। इसके अलावा नए लाॅन्च प्रोजेक्ट्स पर 65 फीसदी असर देखने को मिल सकता है। वहीं, ऑफिस स्पेस की मांग में 30 फीसदी की कमी आएगी। वर्ष 2019 में नेट ऑफिस स्पेस 4 करोड़ वर्गफुट था जो कि इस साल घटकर 2.8 करोड़ वर्गफुट तक रह सकता है। रीटेल क्षेत्र 85 लाख वर्ग फुट से 64 फीसदी घटकर 31 लाख वर्गफुट रह सकता है। पहले यह क्षेत्र रीयल एस्टेट में मंदी के बाद भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन महामारी की वजह से इनमें गिरावट आना तय है।

नकदी संकट से जूझ रहे रीयल क्षेत्र में बिक्री आय लगभग थम सी गई है। रीयल्टी कंपनियों के संगठनों के अनुसार, लाॅकडाउन के दौरान इस क्षेत्र को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान हो सकता है। इस सेक्टर की रिकवरी को कम से कम एक से दो साल लग सकते हैं।फिक्की के सर्वे में पहले ही कहा जा चुका है कि कारोबार में रिकवरी मांग की परिस्थितियों और कारोबार के सर्वाइवल पर निर्भर करेगी। नेशनल रीयल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि, ‘बिक्री पर प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है। इसका असर कंपनियों के मुनाफे पर दिखेगा। इसलिए पहली प्रतिक्रिया में रूप में वेतन कटौती हो सकती है। करीब 25 फीसदी तक नौकरियां जा सकती है।

इस बीच रियल एस्टेट कंपनियों को बड़ी राहत मिलती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रियल्टी परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा छह महीने बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) यानी रेरा कानून के तहत कोरोना महामारी को ‘दैवीय आपदा’ माना जाएगा। आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के रियल एस्टेट नियामकों को परामर्श जारी कर कोविड-19 को ‘दैवीय आपदा’ के रूप में लेने को कहेगा। इससे रेरा कानून के तहत इसे ‘मनुष्य के वश से बाहर की आपदा’ माना जाएगा।

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