Home संपादकीय विचार मंच The movement of Zamat denigrates Islam! इस्लाम को बदनाम करती ज़मात की हरक़त ! 

The movement of Zamat denigrates Islam! इस्लाम को बदनाम करती ज़मात की हरक़त ! 

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भारत मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण इंसानी अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। भारत इस लड़ाई को बेहद मुस्तैदी से लड़ रहा है। सरकार की तरफ से उठाए गए कदम की विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सराहना की है। प्रधानमंत्री मोदी अब तक तीन बार देश की जनता के नाम संदेश प्रसारित कर चुके हैं। प्रतिपक्ष के राज नेताओं से भी बात किया है। कई राज्यों ने लॉक डाउन बढ़ाने की बात कही है। लेकिन तब्लीगी जमात की साजिश ने सरकार की नीति पर पलीता लगा दिया है। इसके पीछे कोई न कोई बड़ी साजिश हो सकती है। इसके पीछे आईएसआई , तालिबान और पाकिस्तान में सक्रिय आतंकियों की सोच तो काम नहीँ कर रही है जो ज़मात के लोगों को गिरी हुई हरक़त करने को उसका रही है। यह भी देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए जाँच का विषय हो सकती है। हालात यहाँ तक पहुँच गए सांसद निधि को दो साल के लिए निलम्बित करना पड़ा है।

 प्रधानमंत्री डाक्टरों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों, राज्योंआतंकियों  के मुख्यमंत्रियों से कोरोना से लड़ने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं और आवश्यक सलाह भी दे रहे हैं। लेकिन चुनौती तो तब बन गई है जब लाक डाउन के बाद भी वायरस का संक्रमण नहीं थम रहा है। दुनिया भर के 200 से अधिक देश इस महामारी की जद में हैं। महाराष्ट्र में सबसे बुरी हालत है। यूपी में 15 जिलों को पूरी तरह लॉक डाउन का फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया है।

दुनिया भर में 12 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। अब तक 56  हजार से अधिक मौत हो चुकी है। भारत में 2500 से अधिक संक्रमित हो चुके हैं। 56 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। 252 कोरोना संक्रमित डिविजन उभरे हैं। देश में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। तबलीगी जमात की हरकतों से पूरा देश शर्मसार है। सरकार के सामाने ऐसे राष्ट्र विरोधी तालिबानी सोच के लोग चुनौती बने हैं। सरकार एक नहीं कई मार्चों पर युद्ध लड़ रही है। यह वक्त राजनीति का नहीं है। हमें धर्म, संप्रदाय, भाषा, नस्ल से आगे निकल कर देश के लिए सोचना होगा। जब जीवन बचेगा तो सभ्यताएं और संस्कृतियां बचेंगी। यह देश सभी धर्मों और संप्रदायों का है, फिर इसे हिंदू और मुसलमान के चश्में से देखना कितनी बड़ी साजिश है। तबलीगी जमात की करतूतों से पूरा देश शर्मसार है।

भारत के लिए कोरोना वायरस से लड़ना आसान नहीं है। लेकिन सरकार इसे चुनौती मान कर हर प्रयास कर रही है। राज्य सरकारें भी बहुमूल्य जीवन बचाने के लिए पूरी तरह प्रयास रत हैं। मेडिकल स्टाप, पुलिस, साहित्यकार, संगीतकार, अभिनेता, राजनेता और मीडिया सभी एक साथ हैं। यह आलोचना का समय नहीं हैं एक जुटता का है। दिन रात स्वयंसेवियों की फौज भूखे लोगों को भोजन उपलब्ध करा रही है। जीवन बचाने के लिए सघर्ष चल रहा है। कोरोना से प्रभावित चीन में भारतीय लोग सोशलमीडिया पर चीन सरकार के अनुभवों को साझा कर रहे हैं। लोगों को इस वायरस से बचने की सलाह दे रहे हैं। भारत की जनता से अपील भी कर रहे हैं कि आप सरकार के साथ खड़े हों और उसके दिशा निर्देशों का पालन करें। लाक डाउन की वजह से पूरा देश ठहरा है।

फैक्टरियों में उत्पादन बंद हैं। कामगार पलायान कर रहे हैं। लोग घरों में कैंद हैं। देश को बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। हजारों अरब डालर का प्रतिदिन का नुसान हो रहा है। शेयर बाजार हर रोज डूब रहा है। विश्व बैंक ने कोरोना की लड़ाई जीतने के लिए भारत सरकार को बड़ी राहत देने की घोषणा की है। हजारों की संख्या में दानवीर प्रधानमंत्री केयर फंड में दान कर रहे हैं। लेकिन हमारे बीच के लोग ही सराकर के साथ हिंदू-मुस्लिम का घिनौना खेल खेल रहे हैं। नमाज अदा करने के बहाने इस्लाम को बदनाम किया जा रहा है। इस लड़ाई को देखे हुए सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसायिसों से संबंधित धर्म स्थलों पर ताला लटका है। उस स्थिति में दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज में तबलीगी जमात की हरकत शर्मसार करने वाली है। यह पवित्र इस्लाम को बदनाम करने की भी साजिश है। दुनिया का कोई भी धर्म इस तरह की गंदी हरक़त की इजाजत नहीँ देता है। ।

भारत में कुछ लोग इस्लाम को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। उसमें तबलीगी और दूसरे मौलवी शामिल हैं। हजारों लोग जो तब्लीगी जमात के संपर्क में आए क्वारंटीन में रखा गया है जबकि अब तक कोरोना से नौ जमातियों की मौत हो चुकी है। अब इससे बड़ी शर्म की बात क्या हो सकती है। तबलीगी जमात इस्लाम की आड़ में भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रचने में कामयाब हुआ है। जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला है, उस स्थिति में सबकुछ जानते हुए भी दिल्ली में हजारों लोग मरकज में कैसे जमा हुए। इसके लिए कौन गुनाहगार है। सरकारें भी अपनी जिम्मेदारी और जबाबदेही से नहीं बच सकती है। सरकार का खुफिया विभाग भी फेल रहा है। ऐसी स्थिति में इतनी भारी तादात में विदेशी कैसे पहुंच गए। उससे भी बड़ी बात यह है कि लाक डाउन के बाद भी 960 विदेशी पूरे भारत भर में टूरिस्ट वीजा की आड़ में फैल गए।

22 राज्यों के लोग इस जमात में शामिल हुए थे। आज हालात यह है कि तबलीगी जमात ने भारत को कोरोना हब बनाने की साजिश रची है। इतनी भारी संख्या में विदेशी भारत के बड़े और छोड़े शहरों में फैल गए लेकिन हमारी सरकारों और खुफिया को भनक तक नहीं लगी। इसके अलावा धर्म की आड़ में हजारों की भीड़ मस्जिदों में इकट्ठा कर कोरोना का वायरस खैरात में बांटा। जमात के लोग अस्पतालों में अभद्र व्यवहार पर उतरे हैं। नर्सों से अश्लीलता के साथ शौच कर रहें हैं। मेडिकल स्टाप पर थूक रहें हैं। वीडियो वायरल कर नमाज पढ़ने पर बल दिया जा रहा है। जमात से जुड़ी महिलाएँ एक दूसरे से जबरिया गले मिल रही हैं। निश्चित रुप से यह बड़ी साजिश हो सकती है। आईएसआई या भारत विरोधी तागत सक्रिय हो सकती हैं। इन्हें विदेश से फंडिंग भी मिल सकती हैं। यह एक सोची समझी रणनीतिक हो सकती है। इसकी जाँच होनी चाहिए। हमें टिप्पणी या आलोचना के बजाय सरकार का साथ दें और कोरोना की जंग में एक सच्चे राष्टवादी की तरह अपने दायित्व निभाएं। जब इंसानियत और मानवा सुरक्षित रहेगी तो देश बेचगा और जब देश बचेगा तो हम, हमारी संस्कृति विरासत, धर्म और दूसरी संस्कृति और सभ्यताएं जिंदा रहेंगी। इस वक्त देश के साथ खड़े होने का है।

– प्रभुनाथ शुक्ल

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