Home ज्योतिष् धर्म Celebrate Lohri on Sunday, Makar Sankranti on January 15;रविवार को मनाएं लोहड़ी,मकर संक्राति 15 जनवरी को

Celebrate Lohri on Sunday, Makar Sankranti on January 15;रविवार को मनाएं लोहड़ी,मकर संक्राति 15 जनवरी को

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इस बार लोहड़ी का पर्व गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव तथा रविवार के कारण और भी विशेष है। यह पर्व मुख्य रुप से रबी की फसल से प्रभावित है। इसे किसानोत्सव भी कहा जा सकता है। कृषि समाज में यह नए वर्ष का आरंभ भी है जो वैसाखी से पहले आ जाता है। इसके एक या दो दिन बाद मकर संक्राति आ जाती है। संपूर्ण भारत में लोहड़ी का पर्व धार्मिक आस्था, ऋतु परिवर्तन, कृषि उत्पादन, सामाजिक औचित्य से जुड़ा है। लोहड़ी, मौसम परिवर्तन का सूचक तथा आपसी सौहार्द्र का परिचायक है।
मुख्यत: पंजाब का पर्व होने से इसके नाम के पीछे कई तर्क दिए जाते हैं। ल का अर्थ लकड़ी है, ओह का अर्थ गोहा यानी उपले, और ड़ी का मतलब रेवड़ी । तीनों अर्थों को मिला कर लोहड़ी बना है। दूसरे इसे कबीर की पत्नी लोई से भी जोड़ा जाता है। लोई….लोही और इसके बाद यह शब्द लोहड़ी बन गया ।

अग्नि प्रज्जवलन का शुभ मुहूर्त
13 जनवरी रविवार की सायंकाल 6 बजे लकड़ियां, समिधा, रेवड़ियां, तिल आदि सहित अग्नि प्रदीप्त करके अग्नि पूजन के रुप में लोहड़ी का पर्व मनाएं रात्रि 11 बजकर 42 मिनट तक।

सायंकाल लोहड़ी जलाने का अर्थ है कि अगले दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश पर उसका स्वागत करना। सामूहिक रुप से आग जलाकर सर्दी भगाना और मूंगफली , तिल, गज्जक , रेवड़ी खाकर षरीर को सर्दी के मौसम में अधिक समर्थ बनाना ही लोहड़ी मनाने का उद्ेश्य है। आधुनिक समाज में लोहड़ी उन परिवारों को सड़क पर आने को मजबूर करती है जिनके दर्शन पूरे वर्ष नहीं होते। रेवड़ी मूंगफली का आदान प्रदान किया जाता है। इस तरह सामाजिक मेल जोल में इस त्योहार का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अलावा कृषक समाज में नव वर्ष भी आरंभ हो रहा है। परिवार में गत वर्ष नए शिशु के आगमन या विवाह के बाद पहली लोहड़ी पर जश्न मनाने का भी यह अवसर है। दुल्ला भटटी की सांस्कृतिक धरोहर को संजो रखने का मौका है। बढ़ते हुए अश्लील गीतों के युग में ह्यसुंदरिए मुंदरिए हो ह्ण जैसा लोक गीत सुनना बचपन की यादें ताजा करने का समय है।
आयुर्वेद के दृष्टिकोण से जब तिल युक्त आग जलती है, वातावरण में बहुत सा संक्रमण समाप्त हो जाता है और परिक्रमा करने से शरीर में गति आती है । गावों मे आज भी लोहड़ी के समय सरसों का साग, मक्की की रोटी अतिथियों को परोस कर उनका स्वागत किया जाता है।

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद, 098156 19620

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