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Bua-babua, B-SP, we are together ….बुआ-बबुआ, ब-सपा, हम साथ-साथ हैं….

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लखनऊ। लोकसभा 2019 के चुनावी बिगुल तो बज ही चुका है लेकिन अब इसमें जबरदस्त उछाल आ गया है। कल तक कयास लग रहे थे अब यूपी की स्थिति काफी हद तक साफ हो चुकी है। बुआ और बबुआ का साथ अब यूपी की जनता को कितना पसंद आता है। यह देखने वाली बात होगी। लखनऊ के पांच सितारा होटल में प्रेस काफ्रेंस कर दिग्गज नेता मायावती और अखिलेश यादव ने साथ आने के अपने निर्णय को मीडिया के सामने रखा। दोनों ही पार्टियां लोकसभा 2019 का चुनाव एक दूसरे के सहयोग से लड़ेगी। शनिवार को बहुजन समाज पार्टी ( बसपा) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ को गोमती नगर में होटल ताज में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि यूपी में दोनों पार्टी 38-38 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और प्रदेश की दो सीट रायबरेली और अमेठी को कांग्रेस के लिए छोड़ दिया है।
मुस्लिम वोट बैंक है टारगेट
मायावती और अखिलेश की पार्टी के बीच हो रही दोस्ती के केंद्र में मुस्लिम वोट बैंक है। लोकसभा चुनाव के दौरान इस वोट बैंक में दोनों ही दल बिखराव नहीं चाहते। जिसे वह अपनी जीत की कुंजी मान रहे हैं। सपा और बसपा में 26 साल के लंबे समय बाद दोस्ती होने जा रही है। दोनों ही दलों की मुख्य ताकत मुस्लिम वोट बैंक को माना जाता है। मुस्लिम वोट बैंक जब भी जिस तरफ गया, दोनों में से उसी दल ने जीत हासिल की है। दोनों ही दलों द्वारा मुस्लिमों को साधने के लिए तमाम प्रयास किए जाते रहे हैं। उनका प्रयास है कि लोकसभा चुनाव में यह मुस्लिम वोट बैंक एकजुट रहे, जिसमें कोई बिखराव ना हो और उसके साथ ही उन्हें दलित, पिछड़ों और अति पिछड़ों का भी साथ मिले, जिससे वह भाजपा को हरा सकें।
बसपा के लिए साल 2014 चुनाव नहीं था अच्छा
लोकसभा चुनाव साल 2014 में बीजेपी के खाते में 71 सीटें आईं थी और सपा के खाते में 5 सीटे। इसके साथ ही कांग्रेस ने दो सीटें जीती थी और मायावती का पार्टी बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। गौरतलब है कि राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) प्रमुख अजीत सिंह भी इस गठबंधन में जुडे हुए हैं और वह इस चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। बसपा अजित सिंह को 3 सीटें देना चाहती है जबकि वह 4 सीटों की मांग पर अड़े हैं।

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